हमारे देश में किसान मेहनत और लगन से खेतों को हरा-भरा रखते हैं, लेकिन अब समय है कि वे नई तकनीकों को अपनाकर अपनी खेती को और बेहतर बनाएं। राजस्थान सरकार ने अपने किसानों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इस साल नवंबर 2025 से मार्च 2026 तक, राज्य के 100 किसानों को विदेश भेजा जाएगा, जहां वे आधुनिक खेती की तकनीकों को सीखेंगे। यह मौका उन किसानों को मिलेगा जो फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन यानी एफपीओ से जुड़े हैं। ये किसान नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, और ब्राजील जैसे देशों में जाकर वहां की उन्नत खेती के गुर सीखेंगे।
किसानों के लिए नई एफपीओ नीति
राजस्थान सरकार किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए एक नई एफपीओ नीति ला रही है। इस नीति के तहत राज्य में 500 नए कृषक उत्पादक संगठन बनाए जाएंगे। इन संगठनों का मकसद है कि किसानों को खेती के साथ-साथ बाजार में अपनी उपज बेचने, कंपनी पेटेंट लेने, और सर्टिफिकेशन जैसी सुविधाएं मिलें। यह पहली बार है कि सरकार ने किसानों को इतने बड़े स्तर पर ऐसी मदद देने की योजना बनाई है। इस नीति में एक जिला एक उत्पाद और पंच गौरव जैसी योजनाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि हर जिले की खास फसल को बढ़ावा मिले। यह कदम किसानों की आमदनी बढ़ाने और उनकी मेहनत को सही दाम दिलाने में मदद करेगा।
विदेश में प्रशिक्षण का सुनहरा मौका
राजस्थान सरकार के ‘नॉलेज एन्हांसमेंट प्रोग्राम’ के तहत 100 किसानों को विदेश भेजने की योजना बनाई गई है। ये किसान चार बैचों में नवंबर 2025 से मार्च 2026 तक नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, और ब्राजील जाएंगे। वहां वे सात दिन के प्रशिक्षण में हिस्सा लेंगे। इस दौरान किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों के बारे में बताया जाएगा, जैसे कि कम पानी में ज्यादा पैदावार कैसे लें, उन्नत बीजों का उपयोग, और मिट्टी की सेहत को कैसे सुधारें। इसके अलावा, वे इन देशों में चल रही कृषि सहकारी समितियों के कामकाज को भी समझेंगे, जो हमारे एफपीओ की तरह ही काम करती हैं। यह प्रशिक्षण किसानों को नई सोच और तकनीकों से लैस करेगा।
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चयन प्रक्रिया और जिम्मेदारी
इन 100 किसानों का चयन बहुत पारदर्शी तरीके से होगा। राज्य सरकार ने इसके लिए खास मानक तय किए हैं। नाबार्ड, एनसीडीसी, नैफेड जैसे संगठन 30 अगस्त तक चयनित किसानों की सूची तैयार करेंगे। जो किसान चुने जाएंगे, उन्हें यह वादा करना होगा कि वे कम से कम तीन साल तक अपने एफपीओ के साथ जुड़े रहेंगे। साथ ही, उन्हें विदेश से सीखी गई तकनीकों को अपने साथी किसानों के साथ साझा करना होगा। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि विदेश से मिला ज्ञान सिर्फ कुछ किसानों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे समुदाय को फायदा पहुंचे।
खेती को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की पहल
इस प्रशिक्षण का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमारे किसान नई और उन्नत तकनीकों को अपनाकर अपनी फसलों की पैदावार बढ़ा सकेंगे। चाहे वह ग्रीनहाउस खेती हो, ड्रिप इरिगेशन हो, या फिर जैविक खाद का सही उपयोग, ये तकनीकें राजस्थान जैसे सूखे इलाके में भी खेती को आसान और लाभकारी बना सकती हैं। साथ ही, इन तकनीकों से किसानों की लागत कम होगी और उनकी आमदनी बढ़ेगी। सरकार का यह कदम न सिर्फ किसानों को सशक्त करेगा, बल्कि राजस्थान की खेती को दुनिया के सामने एक नया मुकाम देगा।
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