1.5 करोड़ किसानों ने किया पंजीयन, 1522 मंडियों से अब घर बैठे बेचें फसल

किसानों के लिए अब फसल बेचना हुआ आसान! राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) पोर्टल के जरिए किसान बिचौलियों को अलविदा कहकर अपनी उपज सीधे खरीदारों को बेच रहे हैं। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि 30 जून 2025 तक इस डिजिटल मंच से 1522 मंडियाँ जुड़ चुकी हैं। करीब 1.79 करोड़ किसान, 2.67 लाख व्यापारी, और 4,518 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) इस पोर्टल पर पंजीकृत हैं। अब तक 4.39 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार इस मंच पर हो चुका है। यह पोर्टल किसानों को सही दाम और समय पर भुगतान दिलाने में गेम-चेंजर साबित हो रहा है।

क्या है ई-नाम ?

ई-नाम पोर्टल 2016 में शुरू हुआ था, ताकि देश की मंडियों को एक डिजिटल मंच से जोड़ा जाए। यह किसानों को बिचौलियों की मनमानी से बचाता है और उनकी फसल को सही कीमत दिलाता है। पंजाब के एक किसान, गुरप्रीत सिंह, ने बताया कि उन्होंने गेहूँ और धान को ई-नाम के जरिए बेचकर 15 प्रतिशत ज्यादा मुनाफा कमाया। पोर्टल पर फसलों की गुणवत्ता जाँच, ऑनलाइन नीलामी, और डिजिटल भुगतान की सुविधा है। यह मंच देश भर के खरीदारों तक पहुँच देता है, जिससे किसान अपनी फसल को बेहतर दाम पर बेच सकते हैं।

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पारदर्शी व्यापार, तेज भुगतान

ई-नाम की सबसे बड़ी खासियत है इसकी पारदर्शिता। यह पोर्टल 90 से ज्यादा फसलों के लिए गुणवत्ता मानक तय करता है और प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए सही कीमत सुनिश्चित करता है। किसान मोबाइल ऐप के जरिए ताजा कीमतों और माँग की जानकारी ले सकते हैं। भुगतान सीधे बैंक खाते में आता है, जिससे देरी की कोई गुंजाइश नहीं रहती। मध्य प्रदेश के एक किसान, रमेश वर्मा, ने बताया कि ई-नाम ने उनकी सोयाबीन की बिक्री को आसान बना दिया और पैसे तुरंत मिल गए।

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बड़ी कामयाबी

ई-नाम ने 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1522 मंडियों को एक मंच पर ला दिया है। 1.79 करोड़ किसानों और 2.67 लाख व्यापारियों के साथ यह मंच अब तक 4.39 लाख करोड़ रुपये का कारोबार कर चुका है। लघु किसान कृषि व्यवसाय कंसोर्टियम (एसएफएसी) इस पोर्टल को चलाता है। सरकार की योजना और मंडियों को जोड़ने और किसानों को डिजिटल खेती की ताकत देने की है। यह मंच लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने के साथ-साथ डिजिटल भुगतान को भी बढ़ावा दे रहा है।

कैसे शुरू करें?

ई-नाम से जुड़ना बेहद आसान है। किसान अपनी नजदीकी मंडी में पंजीकरण कराकर फसल को ऑनलाइन बेच सकते हैं। पोर्टल पर फसल की गुणवत्ता जाँच के बाद नीलामी होती है, और सौदे की जानकारी एसएमएस से मिलती है। एक लाइसेंस के जरिए व्यापारी पूरे देश की मंडियों में कारोबार कर सकते हैं। अगर आप भी अपनी फसल को बेहतर दाम पर बेचना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी मंडी या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें। ई-नाम खेती को न सिर्फ आसान बना रहा है, बल्कि मुनाफे का नया रास्ता खोल रहा है।

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  • Rahul

    मेरा नाम राहुल है। मैं उत्तर प्रदेश से हूं और संभावना इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है। मैं krishitak.com पर लेखक हूं, जहां मैं खेती-किसानी, कृषि योजनाओं पर केंद्रित आर्टिकल लिखता हूं। अपनी रुचि और विशेषज्ञता के साथ, मैं पाठकों को लेटेस्ट और उपयोगी जानकारी प्रदान करने का प्रयास करता हूं।

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