धान की बंपर पैदावार चाहिए तो जुलाई में इन 4 ‘दुश्मनों’ पर लगाएं लगाम, पूरी जानकारी विस्तार से

किसान भाइयों, के खेत हरे-भरे हो चले हैं, क्योंकि धान की फसल लहलहा रही है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 20 जून तक देशभर में 13.22 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई पूरी हो चुकी है, जो पिछले साल से 5 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। किसानों का रुझान इस फसल की ओर बढ़ रहा है, क्योंकि इसमें अच्छा मुनाफा छुपा है। लेकिन जुलाई का महीना इस फसल के लिए टेढ़ी खीर बन सकता है। इस दौरान पौधे तेजी से बढ़ते हैं, और उनकी नाजुक पत्तियाँ कीटों, रोगों, और खरपतवारों के लिए आसान निशाना बनती हैं। आइए, जानते हैं कि जुलाई में धान की फसल को कैसे बचाएँ, बीज कहाँ से लें।

जुलाई में फसल की रक्षा का मंत्र

जुलाई में धान की फसल का विकास चरम पर होता है, लेकिन यही समय खरपतवारों, कीटों, और रोगों का हमला भी बढ़ जाता है। खरपतवार सबसे बड़ी समस्या है, जो फसल को 5 से 85 फीसदी तक नुकसान पहुँचा सकता है, और कभी-कभी यह 100 फीसदी तक भी पहुँच जाता है। इनमें चौड़ी पत्ती, संकरी पत्ती, और मोथा जैसे दुश्मन शामिल हैं, जो पौधों की रोशनी और पोषण छीन लेते हैं। इन्हें नियंत्रित करने के लिए खेत से हाथ या खुरपी से निकालें, खासकर कतारों में बोई गई फसल में। कोनोवीडर या पैडीवीडर का इस्तेमाल भी प्रभावी है, जो खरपतवारों को जड़ से खत्म करता है।

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रोग और कीटों से बचाव की कला

धान की फसल को रोगों से बचाना जुलाई में सबसे बड़ी चुनौती है। जीवाणु पत्ती झुलसा रोग पौधों पर पानी जैसे धब्बे छोड़ता है, जो बाद में भूरे होकर पत्तियों को सिकोड़ देता है। इससे पौधों का विकास रुक जाता है, और पैदावार घटती है। इसकी रोकथाम के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लीन 15 मिलीलीटर और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 500 ग्राम को 500-600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। अगर प्रकोप गहरा हो, तो 10-15 दिन बाद दोहराएँ, लेकिन उर्वरकों का अत्यधिक इस्तेमाल न करें, क्योंकि यह रोग को बढ़ाता है। दूसरा खतरा भूरा फुदका कीट है, जो पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर करता है।

इसके लक्षण झुलसा जैसे दिखते हैं, और फसल गिरने लगती है। खेत की नियमित जांच करें और पौधों के बीच 20-25 सेंटीमीटर दूरी बनाए रखें, ताकि हवा का संचार हो और कीटों का जमावड़ा कम हो। प्रकोप बढ़ने पर इमिडाक्लोप्रिड 1 मिलीलीटर प्रति 3 लीटर पानी या कार्बरिल 2 ग्राम प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। देर से रोपाई होने पर ब्लास्ट रोग का खतरा बढ़ जाता है, जिसके लिए बीजों को कार्बेन्डाजिम 2-2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम से उपचारित करें। बीजों को 24 घंटे भिगोने के बाद इस दवा से इलाज करें, या 1% कार्बेन्डाजिम का छिड़काव करें।

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मिट्टी और पानी का संतुलन

धान की फसल के लिए मिट्टी और पानी का प्रबंधन जुलाई में अहम है। दोमट या चिकनी मिट्टी इस फसल के लिए सबसे अच्छी होती है, जिसमें पानी रुकावट न हो। मिट्टी का पीएच 5.5 से 7.0 के बीच रखें, और अगर जरूरत हो, तो मिट्टी जाँच लें। गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएँ, क्योंकि रासायनिक खाद का ज्यादा इस्तेमाल रोगों को न्यौता देता है। जुलाई में बारिश के साथ खेत में 5-7 सेंटीमीटर पानी बनाए रखें, लेकिन ज्यादा पानी से बचें, क्योंकि यह जड़ों को नुकसान पहुँचा सकता है। ड्रिप सिंचाई का सहारा लेकर पानी की बर्बादी रोकें।

बीज और सरकारी सहायता

धान के बीज पाने के लिए नजदीकी कृषि केंद्र या सहकारी समितियों का रुख करें, जहाँ प्रमाणित बीज उपलब्ध हैं। नेशनल सीड कॉर्पोरेशन (NSC) के स्टोर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, जैसे Amazon India या कृषि मंत्रालय की वेबसाइट्स, भी अच्छे विकल्प हैं। बीज खरीदते समय उनकी गुणवत्ता और अंकुरण क्षमता चेक करें। बुआई से पहले बीजों को 24 घंटे भिगोएँ और कार्बेन्डाजिम 2-2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम से उपचारित करें, ताकि बीमारी से बचा जा सके। सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के तहत जैविक खेती और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत ड्रिप सिंचाई के लिए सब्सिडी दे रही है।

बीज, खाद, और दवाओं पर छूट के लिए नजदीकी कृषि केंद्र से संपर्क करें। इसके अलावा, मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से नई तकनीकों की जानकारी मिल सकती है। धान की बढ़ती खेती से मुनाफा तय है, लेकिन जुलाई में सही देखभाल से यह और बढ़ सकता है। खरपतवार और रोग नियंत्रण से पैदावार में सुधार होता है, जो बाजार में अच्छा दाम दिलाता है।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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