जुलाई में बोएं सोयाबीन की ये बेस्ट किस्म, 30 क्विंटल तक दे रही पैदावार, होगी बंपर कमाई

मॉनसून की पहली बारिश के बाद खेतों में खरीफ फसलों की बुआई शुरू हो जाती है। इस समय सोयाबीन की खेती किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। यह फसल न सिर्फ़ तेल के लिए उपयोगी है, बल्कि इससे सोया दूध, सोया पनीर और सोया बड़ी जैसे कई उत्पाद बनते हैं, जिनकी बाज़ार में हमेशा अच्छी माँग रहती है। सही किस्म और सही तरीके अपनाकर 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार ली जा सकती है। अगर इस खरीफ सीज़न में सोयाबीन की खेती की योजना बना रहे हैं, तो सही जानकारी और तकनीक से मुनाफा बढ़ाया जा सकता है।

सही किस्म चुनें

सोयाबीन की खेती में सबसे ज़रूरी है ऐसी किस्म चुनना जो मिट्टी और मौसम के हिसाब से ठीक हो। कुछ उन्नत किस्में, जैसे JS-335, MSC 252, JS 9308, JS 2095, और JS 2036, अच्छा उत्पादन देती हैं। ये किस्में ज़्यादातर इलाकों में अच्छा रिजल्ट देती हैं। किस्म चुनने से पहले मिट्टी की जाँच कराना बेहतर रहता है। नज़दीकी कृषि केंद्र या ज़िला कृषि विभाग से सलाह लेकर सही बीज का चयन करें। इससे फसल की पैदावार बढ़ने की संभावना रहती है।

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क्षेत्र के हिसाब से किस्मों का चयन

हर इलाके में सोयाबीन की अलग-अलग किस्में बेहतर काम करती हैं। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में PK 416, PS 564, PS 1024, PS 1241, और DS 9814 जैसी किस्में अच्छा परिणाम देती हैं। मध्य भारत में NRC 7, ARC 37, JS 80-21, JS 93-05, और JS 335 से अच्छी पैदावार मिल सकती है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में बिरसा सोयाबीन 1, प्रताप सोया, और इंदिरा सोया उपयुक्त रहती हैं। पहाड़ी इलाकों के लिए पूसा 16, VL सोया 2, पालम सोया, हरा सोया, और PS 1347 अच्छा विकल्प हैं। मिट्टी और मौसम के हिसाब से सही किस्म चुनने से फसल मज़बूत होती है और मुनाफा बढ़ता है।

बुआई का सही समय और तकनीक

सोयाबीन की बुआई जून के आखिर या जुलाई की शुरुआत में करना सबसे अच्छा है। मॉनसून की बारिश शुरू होने पर, जब कम से कम 100 मिमी बारिश हो जाए, तब बुआई शुरू करें। खेत में पानी जमा न होने दें। अगर पानी जमा हो, तो नाली बनाकर निकासी की व्यवस्था करें। बीज बोते समय कतार से कतार की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर और बीजों के बीच 5 से 10 सेंटीमीटर का फासला रखें। बुआई से पहले मिट्टी की जाँच कराएँ, ताकि सही मात्रा में खाद डाली जा सके। सही समय और सही तरीके से बुआई करने से फसल अच्छी होती है।

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मिट्टी की ताकत बढ़ाएँ

सोयाबीन की फसल के लिए मिट्टी को ताकतवर बनाना ज़रूरी है। गोबर की खाद या वर्मी-कम्पोस्ट डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। अगर गाय-भैंस का गोबर उपलब्ध हो, तो उसे अच्छे से सड़ाकर खेत में डालें। नीम की खली या जैविक खाद भी फायदेमंद है। जैविक खेती से न सिर्फ़ फसल अच्छी होती है, बल्कि बाज़ार में जैविक सोयाबीन के उत्पादों का दाम भी बेहतर मिलता है। मिट्टी जाँच के लिए नज़दीकी कृषि केंद्र की मदद लें, ताकि पोषक तत्वों की कमी का पता चल सके।

पानी और कीट प्रबंधन

सोयाबीन की फसल को ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन बारिश कम होने पर हल्की सिंचाई करें। ड्रिप सिंचाई का उपयोग करें, क्योंकि यह पानी बचाता है और फसल को सही मात्रा में पानी मिलता है। सरकार ड्रिप सिस्टम के लिए सब्सिडी देती है, जिसके बारे में कृषि केंद्र से जानकारी ली जा सकती है। कीटों से बचाव के लिए नीम का तेल या जैविक कीटनाशक का छिड़काव करें। ये तरीके सस्ते और सुरक्षित हैं। समय पर कीट प्रबंधन से फसल को नुकसान नहीं होता और पैदावार बढ़ती है।

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  • Rahul Maurya

    मेरा नाम राहुल है। मैं उत्तर प्रदेश से हूं और मैंने संभावना इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है। मैं Krishitak.com का संस्थापक और प्रमुख लेखक हूं। पिछले 3 वर्षों से मैं खेती-किसानी, कृषि योजनाएं, और ग्रामीण भारत से जुड़े विषयों पर लेखन कर रहा हूं।

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