रबी मौसम में मटर की खेती किसानों की जेब भरने का शानदार मौका देती है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी ने काशी नंदन नाम की एक अगेती मटर की किस्म विकसित की है, जो सिर्फ 60 से 65 दिन में तैयार होकर बाजार में छा जाती है। इसकी मोटी, मीठी और चमकदार हरी फलियाँ न सिर्फ स्वाद में लाजवाब हैं, बल्कि बाजार में ऊँचे दाम भी दिलाती हैं। वैज्ञानिक रिसर्च और किसानों की सफलता की कहानियों के साथ यह किस्म उत्तर भारत से लेकर पूर्वी भारत तक हर जगह लोकप्रिय हो रही है। कम लागत में बंपर मुनाफे की चाह रखने वाले किसानों के लिए काशी नंदन एक सुनहरा अवसर है।
वैज्ञानिक रिसर्च से बनी खास किस्म
काशी नंदन को IIVR, वाराणसी के वैज्ञानिकों ने पेडिग्री सिलेक्शन तकनीक से विकसित किया है। यह अगेती किस्म मटर की पारंपरिक किस्मों से अलग है, क्योंकि यह जल्दी तैयार होती है और रोगों के प्रति सहनशील है। IIVR के मटर ब्रीडिंग प्रोग्राम के तहत इस किस्म को उच्च उपज, बेहतर स्वाद, और बाजार माँग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया।
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इसकी फलियाँ गहरे हरे रंग की, गोल और मोटी होती हैं, जिनमें मिठास और मुलायम दाने होते हैं। प्रति पौधा 10 से 12 फलियाँ लगती हैं, और प्रति हेक्टेयर 80 से 120 क्विंटल हरी फलियों की पैदावार मिल सकती है। IIVR के वैज्ञानिक डॉ. राकेश दुबे बताते हैं कि काशी नंदन को विशेष रूप से दिसंबर-जनवरी की माँग को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जब हरी मटर की कीमतें 30 से 50 रुपये प्रति किलो तक होती हैं।
बुवाई और खेती का सही तरीका
काशी नंदन अगेती मटर की बुवाई का सही समय उत्तर भारत में 25 अगस्त से 15 सितंबर तक है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में सितंबर मध्य से अक्टूबर की शुरुआत में बुवाई करें। प्रति हेक्टेयर 40 से 50 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। बुवाई से पहले बीज को ट्राइकोडर्मा (5 ग्राम प्रति किलो) या बाविस्टिन (2 ग्राम प्रति किलो) से उपचारित करें, ताकि फफूंद जनित रोगों से बचाव हो।
कतारों में बुवाई करें, जिसमें पंक्तियों के बीच 30 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 10 सेंटीमीटर की दूरी रखें। यह विधि खरपतवार नियंत्रण, निराई-गुड़ाई, और कीट प्रबंधन को आसान बनाती है। बिहार के एक किसान, रामनाथ यादव, ने बताया कि कतारों में बुवाई और बीज उपचार ने उनकी फसल को रोगमुक्त रखा और पैदावार 15 प्रतिशत बढ़ी।
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खाद और पानी का सही प्रबंधन
काशी नंदन अगेती मटर की अच्छी पैदावार के लिए खेत में 20 टन गोबर की खाद, 40 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस, और 40 किलोग्राम पोटाश डालें। नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और बाकी फूल आने से पहले दें। पहली सिंचाई बुवाई के 7 से 10 दिन बाद करें, फिर फूल और फलियाँ बनने के समय हर 12 से 15 दिन पर पानी दें। IIVR के मृदा वैज्ञानिकों के अनुसार, ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल करने से पानी की बचत होती है और फलियाँ ज्यादा रसीली बनती हैं। सही खाद और पानी का प्रबंधन पैदावार को 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक ले जा सकता है, जो किसानों की कमाई को बढ़ाता है।
रोग और कीटों से सुरक्षा
काशी नंदन अगेती मटर में पाउडरी मिल्ड्यू और पत्ती धब्बा जैसे रोगों का खतरा कम है, लेकिन सावधानी बरतें। पाउडरी मिल्ड्यू के लिए सल्फर (3 ग्राम प्रति लीटर) और पत्ती धब्बा के लिए मैनकोजेब (2.5 ग्राम प्रति लीटर) का छिड़काव करें। तेला (एफिड) जैसे कीटों से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड (0.3 मिली प्रति लीटर) का इस्तेमाल करें। झुलसा रोग से बचने के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (3 ग्राम प्रति लीटर) का छिड़काव हर 10-12 दिन पर करें। IIVR की एक हालिया स्टडी के मुताबिक, जैविक कीटनाशकों जैसे नीम तेल (5 मिली प्रति लीटर) का इस्तेमाल रासायनिक कीटनाशकों के साथ मिलाकर रोग और कीट नियंत्रण को और प्रभावी बना सकता है। यह पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है।
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मुनाफा ही मुनाफा
काशी नंदन अगेती मटर से प्रति हेक्टेयर 80 से 120 क्विंटल हरी फलियाँ मिल सकती हैं। दिसंबर-जनवरी में बाजार में हरी मटर का भाव 30 से 50 रुपये प्रति किलो रहता है, जिससे 3 से 5 लाख रुपये की कमाई हो सकती है। खेती की लागत, जिसमें बीज, खाद, और मजदूरी शामिल है, 60,000 से 80,000 रुपये आती है।
इस हिसाब से शुद्ध मुनाफा 2.5 से 4 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर हो सकता है। IIVR की रिसर्च के अनुसार, काशी नंदन की फलियाँ अपनी मिठास और आकर्षक रंग की वजह से स्थानीय और शहरी बाजारों में खूब बिकती हैं। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के एक किसान, अनिल मिश्रा, ने बताया कि काशी नंदन की खेती ने उनकी सालाना कमाई को दोगुना कर दिया।
क्यों चुनें काशी नंदन?
काशी नंदन अगेती मटर की खेती छोटे और बड़े दोनों तरह के किसानों के लिए फायदेमंद है। यह किस्म कम समय में तैयार होती है, जिससे किसान जल्दी बाजार में उतर सकते हैं। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और उच्च बाजार माँग इसे एक आदर्श नकदी फसल बनाती है। IIVR ने इसे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब, और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों के लिए अनुशंसित किया है। अगर आप इस किस्म की खेती शुरू करना चाहते हैं, तो IIVR या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से प्रमाणित बीज और तकनीकी सलाह लें। काशी नंदन न सिर्फ खेतों को हरा-भरा करता है, बल्कि किसानों की जिंदगी को भी समृद्ध बनाता है।
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