बरसात में करें हल्दी की इस किस्म की खेती, कम लागत में पाएं दोगुना मुनाफा

भारत में हल्दी की खेती किसानों के लिए बड़ा मुनाफा देने वाली साबित हो रही है। जिला कृषि अधिकारी राजितराम के मुताबिक, हल्दी न सिर्फ मसाले के रूप में बल्कि औषधीय गुणों के कारण भी बाजार में खूब बिकती है। इसकी मांग साल भर रहती है, जिससे किसानों को अच्छा दाम मिलता है। अगर सही समय पर और उन्नत किस्मों के साथ हल्दी की खेती की जाए, तो कम लागत में लाखों रुपये की कमाई हो सकती है। बरसात का मौसम, खासकर अगस्त का महीना, हल्दी की बुवाई के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस समय लगाई गई फसल अच्छी पैदावार देती है और किसानों की मेहनत को सही दाम दिलाती है।

सिम पीतांबर: कम समय में बंपर पैदावार

हल्दी की सिम पीतांबर किस्म को केंद्रीय औषधीय एवं सगंध अनुसंधान संस्थान ने विकसित किया है। यह किस्म खास इसलिए है, क्योंकि यह सिर्फ 5 से 6 महीने में पककर तैयार हो जाती है, जबकि आम हल्दी की फसल को 7 से 9 महीने लगते हैं। इसकी एक और खासियत है कि इसे कीट और रोग कम प्रभावित करते हैं। इससे एक हेक्टेयर में 650 क्विंटल तक की शानदार पैदावार मिल सकती है। बाराबंकी के किसान रामलाल यादव ने बताया कि सिम पीतांबर ने उनकी खेती को आसान और फायदेमंद बना दिया है।

सोरमा: नारंगी रंग की शानदार फसल

सोरमा किस्म की हल्दी के कंद अंदर से चटकीले नारंगी रंग के होते हैं, जो बाजार में अच्छी मांग रखते हैं। इस किस्म को तैयार होने में करीब 210 दिन लगते हैं। प्रति एकड़ इसकी पैदावार 80 से 90 क्विंटल तक हो सकती है। यह किस्म उन किसानों के लिए फायदेमंद है, जो रंग-बिरंगी और आकर्षक हल्दी की खेती करना चाहते हैं। बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलने से किसानों का मुनाफा बढ़ता है।

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सुगंधम: जल्दी तैयार, लंबी फसल

सुगंधम हल्दी की एक और उन्नत किस्म है, जो 200 से 210 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी फसल का आकार थोड़ा लंबा और रंग हल्का पीला होता है। प्रति एकड़ 80 से 90 क्विंटल तक की पैदावार इसे किसानों के लिए पसंदीदा बनाती है। यह किस्म उन क्षेत्रों के लिए खास तौर पर अच्छी है, जहाँ मिट्टी और जलवायु हल्दी की खेती के लिए अनुकूल हो। मिर्जापुर के किसान श्यामसुंदर ने बताया कि सुगंधम ने उनकी खेती की लागत कम की और मुनाफा बढ़ाया।

सुदर्शन: छोटी लेकिन आकर्षक

सुदर्शन किस्म की हल्दी आकार में छोटी लेकिन दिखने में बेहद खूबसूरत होती है। यह 230 दिनों में तैयार हो जाती है और प्रति एकड़ 110 से 115 क्विंटल की पैदावार देती है। इसकी खासियत यह है कि यह बाजार में अपनी बनावट और गुणवत्ता के कारण अच्छा दाम दिलाती है। छोटे और मझोले किसानों के लिए यह किस्म खास तौर पर फायदेमंद है, क्योंकि यह कम जगह में भी अच्छी पैदावार देती है।

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आरएच 5: बड़ी पैदावार का वादा

आरएच 5 हल्दी की एक ऐसी किस्म है, जो 80 से 100 सेंटीमीटर ऊँचे पौधों वाली होती है। इसे पकने में 210 से 220 दिन लगते हैं। इस किस्म से प्रति एकड़ 200 से 220 क्विंटल तक की बंपर पैदावार मिल सकती है। यह उन किसानों के लिए बेस्ट है, जो बड़े पैमाने पर हल्दी की खेती करना चाहते हैं। इसकी मजबूत फसल और ज्यादा पैदावार इसे बाज़ार में खास बनाती है।

किसानों के लिए सलाह

कृषि अधिकारी राजितराम सलाह देते हैं कि हल्दी की खेती में सफलता के लिए सही किस्म का चयन और बरसात के मौसम में बुवाई जरूरी है। अच्छी मिट्टी, समय पर सिंचाई और उचित देखभाल से हल्दी की फसल और भी बेहतर हो सकती है। अगर किसान इन उन्नत किस्मों का इस्तेमाल करें, तो कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। हल्दी की बढ़ती मांग को देखते हुए यह खेती छोटे और बड़े दोनों तरह के किसानों के लिए फायदे का सौदा है।

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  • Shashikant

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