उत्तर प्रदेश में धान की रोपाई का समय चल रहा है, और किसान अपनी फसल की तैयारी में जुटे हैं। लेकिन इस बार खेतों में तेजी से फैल रहे खरपतवार किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन रहे हैं। ये खरपतवार न सिर्फ धान के पौधों की वृद्धि को रोकते हैं, बल्कि फसल की पैदावार में भी भारी कमी ला सकते हैं। अगर समय रहते इन्हें नियंत्रित न किया जाए, तो किसानों की मेहनत और लागत दोनों बेकार हो सकती हैं। अच्छी खबर यह है कि कृषि विभाग खरपतवार नियंत्रण के लिए दवाओं पर 50% सब्सिडी दे रहा है, जिससे किसान कम खर्च में अपनी फसल को बचा सकते हैं।
रोपाई से पहले करें खेत की तैयारी
कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि धान की रोपाई का समय चल रहा है। कुछ किसानों ने रोपाई पूरी कर ली है, जबकि कुछ संडा धान की बुवाई कर रहे हैं। जिन किसानों ने अभी रोपाई नहीं की है, उनके लिए खरपतवार नियंत्रण का आसान तरीका है। रोपाई से 10 दिन पहले खेत में पानी भरकर जुताई कर लें। इससे पहले से उगे खरपतवार मिट्टी में दब जाएँगे और उनकी वृद्धि रुक जाएगी। यह तरीका न सिर्फ खरपतवार को कम करता है, बल्कि खेत को रोपाई के लिए बेहतर भी बनाता है।
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रोपाई के बाद खरपतवार का नियंत्रण
अगर धान की रोपाई हो चुकी है और खेत में खरपतवार उग आए हैं, तो किसान दवाओं का छिड़काव करके इन्हें खत्म कर सकते हैं। खरपतवार मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं चौड़ी पत्ती वाले और नीम पत्ती वाले। चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए ‘नीमसार’ जैसी दवा का छिड़काव बहुत कारगर है। इसके अलावा बाजार में कई अन्य दवाएँ भी उपलब्ध हैं, जो खरपतवार को जड़ से खत्म कर सकती हैं। अगर रोपाई से पहले खरपतवार दिख रहे हैं, तो एक हफ्ते पहले दवा का छिड़काव कर लें। इससे बाद में मेहनत कम लगेगी और फसल की वृद्धि बेहतर होगी।
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50% सब्सिडी का लाभ कैसे लें
कृषि विभाग खरपतवार नियंत्रण की दवाओं पर 50% सब्सिडी दे रहा है, जिससे किसानों का खर्च काफी कम हो जाता है। ये दवाएँ ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर उपलब्ध हैं। किसानों को सिर्फ अपना आधार कार्ड और खेत से संबंधित दस्तावेज लेकर जाना होगा। वहाँ से वे सब्सिडी पर दवाएँ आसानी से ले सकते हैं। मिर्जापुर के किसान श्यामसुंदर ने बताया कि इस सब्सिडी ने उनकी खेती की लागत को आधा कर दिया और खरपतवार की समस्या से भी छुटकारा मिला। यह सुविधा छोटे और बड़े दोनों तरह के किसानों के लिए बड़ी राहत है।
खरपतवार नियंत्रण के फायदे
खरपतवार न सिर्फ मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, बल्कि फसल की पैदावार को भी 20-30% तक कम कर सकते हैं। समय पर खरपतवार नियंत्रण करने से धान के पौधों को ज्यादा पानी और पोषण मिलता है, जिससे उनकी वृद्धि तेज होती है। साथ ही, अच्छी पैदावार से किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं। कृषि अधिकारी सलाह देते हैं कि किसान नियमित रूप से अपने खेतों की निगरानी करें और खरपतवार दिखते ही तुरंत कदम उठाएँ।
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