सोयाबीन की फसल पर मंडरा रहा है राइजोक्टोनिया ब्लाइट का खतरा? ICAR-NSI ने दी ये सलाह

मानसून के दौरान सोयाबीन की फसलों में राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट जैसे फफूंद रोग का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। यह रोग नम और गर्म मौसम में फसल को भारी नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे पैदावार में 35-60% तक की कमी आ सकती है। ICAR-नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट (NSI), इंदौर ने इस खतरनाक रोग से निपटने के लिए किसानों को विशेष सलाह दी है। समय पर सही कदम उठाकर किसान अपनी फसल को बचा सकते हैं और बंपर पैदावार पा सकते हैं। मध्य प्रदेश के किसान रामस्वरूप ने बताया कि इस सलाह ने उनकी फसल को पिछले साल भारी नुकसान से बचाया था।

रोग की पहचान कैसे करें

राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट की पहचान के लिए किसानों को अपने खेतों में पौधों की पत्तियों, तनों और डंठलों पर ध्यान देना चाहिए। इस रोग के शुरुआती लक्षणों में पत्तियों पर गीले, भूरे या हरे-भूरे धब्बे दिखाई देते हैं, जो बाद में सूखकर भूरे या काले हो जाते हैं। तनों और फलियों पर भी लाल-भूरे घाव बन सकते हैं। नम मौसम में पौधों पर सफेद फफूंदी (माइसीलियम) या छोटे-छोटे भूरे स्क्लेरोशिया (कठोर फफूंदी संरचनाएँ) दिखाई दे सकते हैं। यह रोग खेत के निचले हिस्से में, खासकर घने पत्तों वाले क्षेत्रों में तेजी से फैलता है। नियमित रूप से खेत की जाँच करना जरूरी है, ताकि रोग को शुरू में ही पकड़ा जा सके।

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ICAR-NSI की सलाह: फफूंदनाशक का इस्तेमाल

ICAR-NSI ने राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी फफूंदनाशकों की सलाह दी है। जैसे ही रोग के लक्षण दिखें, तुरंत निम्नलिखित में से किसी एक फफूंदनाशक का छिड़काव करें:

  • फ्लक्सापाय्रोक्साड 167 ग्राम/लीटर + पायरोक्लोस्ट्रोबिन 333 ग्राम/लीटर SC @ 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर

  • पायरोक्लोस्ट्रोबिन 133 ग्राम/लीटर + एपॉक्सीकॉनाजोल 50 ग्राम/लीटर SE @ 750 मिली प्रति हेक्टेयर

  • पायरोक्लोस्ट्रोबिन 20 WG @ 375–500 ग्राम प्रति हेक्टेयर
    ये दवाएँ रोग को रोकने में कारगर हैं और फसल की पैदावार को सुरक्षित रखती हैं।

छिड़काव के लिए जरूरी सावधानियाँ

फफूंदनाशक का छिड़काव करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। पूरे खेत में दवा का छिड़काव एकसमान होना चाहिए, इसके लिए साफ पानी और अच्छी तरह कैलिब्रेटेड स्प्रेयर का इस्तेमाल करें। अगर रोग का प्रभाव कम न हो, तो 10-12 दिनों बाद दोबारा छिड़काव करें। तेज हवा या बारिश के समय छिड़काव से बचें, क्योंकि इससे दवा का असर कम हो सकता है। खेत के निचले हिस्सों और घने पत्तों वाली जगहों पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि वहाँ रोग ज्यादा फैलता है। साथ ही, खेत में खरपतवार न बढ़ने दें, क्योंकि वे भी रोग के लिए वैकल्पिक मेजबान बन सकते हैं।

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अन्य उपाय और सुझाव

राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट से बचाव के लिए सिर्फ दवाएँ ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य उपाय भी कारगर हैं। खेत में फसल चक्र अपनाएँ, लेकिन ध्यान रखें कि चावल, मक्का या सेम जैसी फसलों के साथ चक्र कम प्रभावी हो सकता है, क्योंकि यह रोग इन फसलों को भी प्रभावित करता है। खेत की जुताई करने से मिट्टी में मौजूद स्क्लेरोशिया की संख्या कम हो सकती है। सोयाबीन की ऐसी किस्में चुनें, जो इस रोग के प्रति कम संवेदनशील हों, हालाँकि पूरी तरह प्रतिरोधी किस्में अभी उपलब्ध नहीं हैं। नियमित स्काउटिंग करें और खेत के छायादार या गीले हिस्सों पर खास ध्यान दें। नजदीकी कृषि अधिकारी या ICAR-NSI से संपर्क करके और सलाह लें।

राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट का समय पर नियंत्रण न सिर्फ सोयाबीन की फसल को बचाता है, बल्कि किसानों की मेहनत को भी सही दाम दिलाता है। ICAR-NSI की इन सलाहों का पालन करके किसान अपनी फसल को इस खतरनाक रोग से बचा सकते हैं। मध्य भारत में सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों के लिए यह सलाह खास तौर पर फायदेमंद है, क्योंकि यहाँ मानसून में रोग का खतरा ज्यादा रहता है। अपनी फसल की नियमित निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाएँ।

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  • Shashikant

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