मध्य प्रदेश के कई जिलों में किसान परेशान हैं। उनकी खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल अचानक सूख रही है। कुछ किसानों को लगा कि यह कीटनाशकों की वजह से हो रहा है, लेकिन कृषि विभाग ने साफ किया कि यह झुलसा रोग यानी राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट का असर है। इस रोग से पौधे मुरझाने लगते हैं और फसल को भारी नुकसान हो सकता है। लेकिन चिंता न करें, कृषि वैज्ञानिकों ने इसके लिए आसान और कारगर उपाय बताए हैं, जो किसानों की फसल को बचा सकते हैं।
झुलसा रोग से कैसे निपटें
कृषि विभाग के अफसरों ने जाँच के बाद बताया कि सोयाबीन के पौधों में जो लक्षण दिख रहे हैं, वे झुलसा रोग की वजह से हैं। इस रोग से पौधे की पत्तियाँ और तना सूखने लगता है। इसे रोकने के लिए सही समय पर फफूंदनाशक दवाइयों का छिड़काव जरूरी है। किसान भाई फ्लक्सापायरोक्सैड और पाइराक्लोस्ट्रोबिन की 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा या पाइराक्लोस्ट्रोबिन और एपॉक्सीकोनाजोल की 750 मिली प्रति हेक्टेयर मात्रा का इस्तेमाल करें। अगर खेत में एन्थ्रेक्नोज रोग के लक्षण दिखें, तो टेबुकोनाजोल 25.9 ईसी या टेबुकोनाजोल 38.39 एससी की 625 मिली प्रति हेक्टेयर मात्रा में छिड़काव करें। ये दवाइयाँ फसल को रोग से बचाने में मदद करेंगी।
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पीला मोजेक का इलाज
कई खेतों में सोयाबीन की फसल में पीला मोजेक रोग भी देखा जा रहा है। यह रोग वायरस की वजह से होता है और पौधों की पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं। अगर आपके खेत में यह रोग दिखे, तो सबसे पहले संक्रमित पौधों को खेत से हटा दें, ताकि यह और न फैले। इसके बाद फ्लोनिकामिड की 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर, थायमेथोक्साम और लैम्ब्डा साइहैलोथ्रिन की 125 मिली प्रति हेक्टेयर, या बीटासाइफ्लुथिन और इमिडाक्लोप्रिड की 350 मिली प्रति हेक्टेयर मात्रा में छिड़काव करें। ये दवाइयाँ पीला मोजेक फैलाने वाले कीटों को रोकेंगी और फसल को सुरक्षित रखेंगी।
तना मक्खी और कीटों से बचाव
सोयाबीन की फसल को तना मक्खी और दूसरे कीट भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। इनसे बचने के लिए वही कीटनाशक जो पीला मोजेक के लिए बताए गए हैं, इस्तेमाल करें। सही मात्रा में और सही समय पर छिड़काव करने से फसल को कीटों से बचाया जा सकता है। अगर आप रासायनिक दवाइयों का कम इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो प्राकृतिक तरीके भी आजमा सकते हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि खेत में टी-आकार के पक्षी बसेरे लगाएँ। ये बसेरे कीट खाने वाले पक्षियों को आकर्षित करेंगे, जो कीटों को खाकर फसल को बचा सकते हैं। इससे रासायनिक दवाइयों की जरूरत भी कम होगी।
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किसानों के लिए सलाह
अगर आपके खेत में सोयाबीन की फसल में सूखने या पीलेपन के लक्षण दिख रहे हैं, तो देर न करें। तुरंत अपने नजदीकी कृषि अधिकारी से संपर्क करें। वे आपके खेत की जाँच करके सही दवा और छिड़काव की सलाह देंगे। समय पर कार्रवाई करने से आप अपनी फसल को भारी नुकसान से बचा सकते हैं। साथ ही, अपने गाँव के दूसरे किसानों को भी इन उपायों के बारे में बताएँ ताकि सभी की फसल सुरक्षित रहे। अगर आपको फफूंदनाशक या कीटनाशक खरीदने में दिक्कत हो रही है, तो स्थानीय कृषि केंद्र से संपर्क करें।
सरकार से मदद की उम्मीद
मध्य प्रदेश के किसानों का कहना है कि अगर सरकार की तरफ से सही समय पर मदद मिले, तो वे अपनी फसल को और बेहतर तरीके से बचा सकते हैं। कृषि विभाग की सलाह को मानकर और थोड़ी सी मेहनत से आप अपनी सोयाबीन की फसल को झुलसा रोग और पीला मोजेक से बचा सकते हैं। यह समय कदम उठाने का है, ताकि आपकी मेहनत और फसल बेकार न जाए।
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