किसान भाइयों, हमारे खेतों की मेहनत और सरकार की मज़बूत नीतियों ने उत्तर प्रदेश को खेती का चैंपियन बना दिया है। पिछले आठ सालों में उत्तर प्रदेश ने गन्ना, गेहूँ, और इथेनॉल उत्पादन में देश में पहला स्थान हासिल किया है। ये उपलब्धि हमारे खेतों की ताकत और सरकार के समर्पण का नतीजा है। चाहे गन्ने की मिठास हो, गेहूँ की सुनहरी बालियाँ हों, या इथेनॉल की बढ़ती माँग, उत्तर प्रदेश हर क्षेत्र में अव्वल है। आइए, जानें कि कैसे ये राज्य खेती में नया इतिहास रच रहा है और किसान भाई इसका फायदा कैसे उठा सकते हैं।
गन्ना उत्पादन, मिठास में नंबर एक
उत्तर प्रदेश ने गन्ना उत्पादन में देश को गर्व करने का मौका दिया है। 2022 में राज्य ने 177 मिलियन टन से ज़्यादा गन्ना पैदा किया, जो देश के कुल गन्ना उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत है। मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, और बिजनौर जैसे जिले इसकी अगुवाई कर रहे हैं। उपजाऊ दोमट मिट्टी, गंगा-यमुना का दोआब क्षेत्र, और बेहतर सिंचाई व्यवस्था ने गन्ने की खेती को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। किसान भाइयों ने रैटूनिंग तकनीक अपनाई, जिसमें जड़ों से दोबारा फसल ली जाती है, जिससे लागत कम और मुनाफा ज़्यादा होता है। गन्ने से चीनी, गुड़, और इथेनॉल जैसे उत्पाद बन रहे हैं, जो ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को मज़बूत कर रहे हैं।
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गेहूँ उत्पादन, खेतों का सुनहरा गौरव
गेहूँ की खेती में भी उत्तर प्रदेश ने बाजी मारी है। 2024-25 में राज्य ने देश के कुल गेहूँ उत्पादन का 32-34 प्रतिशत हिस्सा दिया, यानी लगभग 35.7 मिलियन टन। गंगा-यमुना की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु ने गेहूँ की फसल को बंपर बनाया। किसान भाई HD-2967 और DBW-187 जैसी उन्नत किस्मों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो ज़्यादा उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता देती हैं। सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना, जो 2025 में 2,275 रुपये प्रति क्विंटल है, ने किसानों को सही दाम दिलाया। e-NAM पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और PM-AASHA योजना से गेहूँ की बिक्री आसान हो रही है, जिससे मुनाफा बढ़ रहा है।
इथेनॉल उत्पादन, नई ऊर्जा, नया मुनाफा
इथेनॉल उत्पादन में उत्तर प्रदेश ने देश को नई राह दिखाई है। गन्ने से बने शीरे (मोलासेस) का इस्तेमाल कर राज्य ने जैव ईंधन के क्षेत्र में क्रांति ला दी। 2022-23 में उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों ने रिकॉर्ड इथेनॉल उत्पादन किया, जो भारत के जैव ईंधन कार्यक्रम का मज़बूत आधार है। ये न सिर्फ़ पेट्रोल की जगह ले रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी बचाता है। मेरठ और सहारनपुर जैसे जिलों में चीनी मिलें गन्ने को चीनी और इथेनॉल में बदल रही हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त कमाई हो रही है। सरकार की नीतियाँ, जैसे गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP), ने इस क्षेत्र को और मज़बूत किया है।
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सरकार की नीतियाँ, किसानों का सहारा
पिछले आठ सालों में उत्तर प्रदेश सरकार ने खेती को नई दिशा दी है। 14 प्रतिशत की कृषि विकास दर, जो राष्ट्रीय औसत से 4.5 प्रतिशत ज़्यादा है, इसकी मिसाल है। मुफ्त बिजली, बेहतर सिंचाई, और उन्नत बीजों की उपलब्धता ने किसानों की मेहनत को रंग दिया। PMFBY (प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना) के तहत नुकसान होने पर मुआवज़ा मिल रहा है। किसान भाई अपने खेतों को PMFBY में रजिस्टर कर 2 प्रतिशत प्रीमियम पर बीमा करा सकते हैं। इसके अलावा, e-समृद्धि और e-NAM जैसे पोर्टल्स ने फसलों की बिक्री को आसान और पारदर्शी बनाया है।
उत्तर प्रदेश ने गन्ना, गेहूँ, और इथेनॉल उत्पादन में नंबर एक बनकर साबित कर दिया कि हमारे खेतों की मेहनत और सरकार की नीतियाँ मिलकर चमत्कार कर सकती हैं। ये उपलब्धि हर किसान भाई के लिए गर्व की बात है। अपनी फसलों को e-NAM पर रजिस्टर करें, PMFBY का फायदा उठाएँ, और उन्नत बीजों का इस्तेमाल करें।
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