उत्तर प्रदेश में खेती करने वाले भाइयों के लिए अच्छी खबर है। योगी सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में कहीं भी खाद की कमी नहीं है। हर जिले और मंडल में यूरिया, डीएपी, और एनपीके जैसे उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को हिदायत दी है कि वे लगातार नजर रखें ताकि किसानों को खाद लेने में कोई परेशानी न हो। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि खाद की कालाबाजारी और ज्यादा कीमत वसूलने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। इस समय प्रदेश में करीब 6 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 4 लाख मीट्रिक टन डीएपी, और 3 लाख मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। इसका मतलब है कि खरीफ के मौसम में किसानों को खाद की कोई दिक्कत नहीं होगी।
जरूरत से ज्यादा खाद न जमा करें
मुख्यमंत्री योगी जी ने किसानों से गुजारिश की है कि वे खाद का जरूरत से ज्यादा भंडारण न करें। जितनी खेती के लिए जरूरत हो, उतना ही खाद लें। ऐसा करने से हर किसान को समय पर खाद मिल सकेगा। सरकार ने खाद की उपलब्धता और वितरण पर कड़ी नजर रखी है ताकि कोई भी किसान खाली हाथ न रहे। योगी जी ने कहा कि उनकी सरकार किसानों की हर जरूरत को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। चाहे खाद हो, बीज हो, या फिर सिंचाई की सुविधा, सब कुछ समय पर उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि खेती में कोई रुकावट न आए।
सब्सिडी से किसानों को बड़ी राहत
यूपी सरकार किसानों के लिए लगातार कदम उठा रही है। मिसाल के तौर पर, यूरिया की एक बोरी का असली दाम 2,174 रुपये है, लेकिन सरकार की सब्सिडी की वजह से यह किसानों को सिर्फ 266.50 रुपये में मिल रही है। इस तरह की मदद से किसानों का खर्च कम हो रहा है और उनकी कमाई बढ़ रही है। यही वजह है कि प्रदेश में खाद्यान्न का उत्पादन बढ़कर 737 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गया है। पहले, सपा सरकार के समय में कृषि क्षेत्र का जीएसवीए यानी सकल मूल्य वर्धन सिर्फ 2 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 7 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों का नतीजा है।
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खरीफ और रबी सीजन के लिए बड़ी तैयारी
इस साल खरीफ 2024-25 में अब तक 32 लाख मीट्रिक टन खाद की बिक्री हो चुकी है, जो पिछले साल के मुकाबले साढ़े चार लाख मीट्रिक टन ज्यादा है। अगले रबी सीजन 2025-26 के लिए सरकार ने 138.78 लाख हेक्टेयर जमीन पर खेती का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल से 4 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। इसके लिए किसानों को 10 लाख क्विंटल सब्सिडी वाले बीज और 12.80 लाख मिनी किट दिए जाएंगे। गन्ना किसानों को दलहन और तिलहन की बुआई के लिए मुफ्त बीज भी मिलेंगे। इससे किसानों को न सिर्फ खेती में आसानी होगी, बल्कि उनकी फसल की गुणवत्ता और पैदावार भी बढ़ेगी।
कालाबाजारी और तस्करी पर सख्ती
खाद की कालाबाजारी और तस्करी को रोकने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। खासकर उन जिलों में, जो नेपाल जैसे सीमावर्ती इलाकों के पास हैं, वहाँ तस्करी रोकने के लिए कड़ी चौकसी बरती जा रही है। कालाबाजारी करने वालों, ज्यादा कीमत वसूलने वालों, या खाद जमा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो रही है। सरकार का मकसद है कि हर किसान को सही दाम पर और समय पर खाद मिले। इसके लिए कृषि विभाग हर मंडल में खाद की उपलब्धता पर नजर रख रहा है और नियमित आंकड़े जारी कर रहा है।
हर मंडल में खाद का भंडार
कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सभी मंडलों में खाद का पर्याप्त स्टॉक है। जैसे, सहारनपुर में 17,195 मीट्रिक टन यूरिया और 6,980 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। मेरठ में 39,104 मीट्रिक टन यूरिया और 16,864 मीट्रिक टन डीएपी मौजूद है। इसी तरह, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, और वाराणसी जैसे मंडलों में भी खाद का अच्छा खासा भंडार है। कुल मिलाकर, पूरे प्रदेश में 6 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया, 3.93 लाख मीट्रिक टन डीएपी, और 3 लाख मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। इससे साफ है कि किसानों को खाद की कोई कमी नहीं होगी।
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