Amul Dairy Plant: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पशुपालकों और दूध के कारोबार से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। बागपत में जल्द ही अमूल का एक नया डेयरी प्लांट शुरू होने जा रहा है। यह प्लांट हर दिन 10 लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग करेगा, जो स्थानीय किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। इसकी घोषणा देश की सबसे बड़ी डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटी, बनास डेयरी ने अपनी हालिया वार्षिक साधारण सभा (AGM) में की।
बनास डेयरी के अध्यक्ष शंकर चौधरी ने बताया कि यह उत्तर भारत में उनका पांचवां प्लांट होगा। इससे पहले बनास डेयरी ने फरीदाबाद, कानपुर, लखनऊ, और वाराणसी में अपने प्लांट शुरू किए हैं, जिनमें से वाराणसी के प्लांट का उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। यह नया प्लांट पश्चिमी यूपी के दूध उत्पादकों को नई ताकत देगा और उनकी आय बढ़ाने में मदद करेगा।
देश का सबसे बड़ा मिल्क पाउडर प्लांट
बनास डेयरी ने AGM में एक और बड़ी घोषणा की। सोसाइटी जल्द ही देश का सबसे बड़ा मिल्क पाउडर प्लांट शुरू करने जा रही है, जो हर दिन 150 टन मिल्क पाउडर बनाएगा। शंकर चौधरी ने बताया कि पीक सीजन में दूध की खरीद इतनी बढ़ जाती है कि उसे बेचने में दिक्कत होती है।
अभी तक इसके लिए निजी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो काफी महंगा पड़ता है। लेकिन इस नए प्लांट के शुरू होने से यह खर्च कम होगा और तीन साल में इसकी लागत निकल आएगी। यह प्लांट न केवल दूध को संरक्षित करने में मदद करेगा, बल्कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम भी दिलाएगा। इससे डेयरी उद्योग और मजबूत होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।
ये भी पढ़ें- कैसे करें छत पर मछली पालन, बाजार जाकर नही खरीदना पड़ेगा, घर से कमाई का नया ढंग
अमेरिकी डेयरी के दावों पर खुलकर बोले चौधरी
AGM में शंकर चौधरी ने अमेरिकी डेयरी उद्योग के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका मांसाहारी पशुओं के दूध को बढ़ावा दे रहा है और भारत को दूध व अनाज आयात करने का प्रस्ताव दे रहा है। अमेरिका की कोशिश है कि वह अपने मांसाहारी पशुओं का दूध भारतीय बाजार में लाए। चौधरी ने बताया कि अमेरिका में बड़े-बड़े पशु फार्म हैं, जहाँ चारे का खर्च नहीं करना पड़ता, क्योंकि उनके पास मैदानों में प्रचुर मात्रा में घास उपलब्ध है।
वहाँ की गायें एक दिन में 50 लीटर तक दूध दे सकती हैं, जिसे वे 15-20 डॉलर प्रति लीटर बेचते हैं। इसके अलावा, वे स्लॉटरहाउस से बचे हुए फैट को चारे में मिलाकर पशुओं को खिलाते हैं, जिससे उनका खर्च और कम हो जाता है। लेकिन बनास डेयरी और गुजरात के डेयरी फार्म देसी गायों को बढ़ावा दे रहे हैं, जो भारतीय खेती और संस्कृति के लिए ज्यादा उपयुक्त हैं। यह देसी गायों को संरक्षित करने और उनकी नस्ल को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
ये भी पढ़ें- क्या आपकी भी गाय,भैंस हो रहीं हैं बाँझपन की शिकार तो करें ये उपाय
बनास डेयरी की आर्थिक ताकत
बनास डेयरी ने अपनी आर्थिक प्रगति के बारे में भी जानकारी दी। साल 2024-25 में डेयरी ने 21,295 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए डेयरी ने 11.6 फीसद की बढ़ोतरी के साथ 23,761 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है। यह न केवल बनास डेयरी की ताकत दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सहकारी मॉडल के जरिए किसानों को कितना फायदा हो सकता है। डेयरी ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिले और दूध की खरीद से लेकर बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
पश्चिमी यूपी में क्या होगा फायदा?
बागपत का यह नया डेयरी प्लांट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। यह प्लांट 17 एकड़ में बन रहा है और इसमें करीब 657 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इससे न केवल स्थानीय पशुपालकों को अपने दूध का बेहतर दाम मिलेगा, बल्कि हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिलेगा। अनुमान है कि यह प्लांट 400 से ज्यादा लोगों को सीधे रोजगार देगा और 4,000 से ज्यादा लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुंचाएगा। साथ ही, यह पश्चिमी यूपी के उन किसानों को भी राहत देगा, जो अभी तक माँग और आपूर्ति की अनिश्चितता से जूझ रहे थे।
ये भी पढ़ें- यह गाय आपकी किस्मत बदल देगी, रोजाना देती है 30 लीटर दूध, प्रतिदिन कमाए 2000 हजार रूपए