सोयाबीन फसल पर सफेद मक्खी का हमला! कृषि विभाग ने दी बचाव की अहम सलाह

हमारे देश में सोयाबीन की खेती किसानों की कमाई का बड़ा जरिया है। लेकिन बदलते मौसम और नमी के कारण इस फसल पर सफेद मक्खी और उससे फैलने वाले पीले मोजेक वायरस का खतरा बढ़ जाता है। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने खेतों की नियमित जांच करें और कुछ आसान उपाय अपनाकर अपनी फसल को बचा लें। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि सोयाबीन फसल को इन कीटों और बीमारियों से कैसे बचाया जाए, ताकि आपकी मेहनत बेकार न जाए।

खेत की नियमित जांच करें

सोयाबीन की फसल इस समय बढ़ने की अवस्था में है। ऐसे में बारिश, नमी, और तापमान में बदलाव के कारण सफेद मक्खी का प्रकोप बढ़ सकता है। यह छोटा-सा कीट पत्तियों के नीचे छिपकर फसल को नुकसान पहुंचाता है और पीला मोजेक वायरस फैलाता है। अगर पत्तियों पर पीले धब्बे दिखें या पत्तियां मुरझाने लगें, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। हर तीन-चार दिन में अपने खेत का दौरा करें और पत्तियों के नीचे की तरफ ध्यान से देखें। अगर सफेद मक्खी दिखे, तो शुरुआत में ही उसे काबू करने की कोशिश करें। इससे बड़ा नुकसान होने से पहले फसल को बचाया जा सकता है।

शुरुआती प्रकोप से निपटने का तरीका

अगर आपको खेत में सफेद मक्खी की थोड़ी-बहुत मौजूदगी दिखे, तो घबराने की जरूरत नहीं है। शुरुआत में आप प्राकृतिक तरीकों से इसे काबू कर सकते हैं। जिन पत्तियों पर सफेद मक्खी दिखे, उन्हें तोड़कर खेत से बाहर ले जाकर नष्ट कर दें। इससे कीट का फैलाव कम होगा। इसके अलावा, खेत में पीले चिपचिपे कार्ड लगाना एक अच्छा तरीका है। ये कार्ड सफेद मक्खी को अपनी ओर खींचते हैं और उन्हें फंसाकर मार देते हैं। प्रति एकड़ 20 से 25 कार्ड लगाने से अच्छा असर दिखता है। यह तरीका सस्ता और आसान है, जिसे हर किसान अपने खेत में आजमा सकता है।

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जरूरत पड़ने पर कीटनाशकों का उपयोग

अगर सफेद मक्खी का प्रकोप बढ़ जाए और चिपचिपे कार्ड से काम न चले, तो कीटनाशकों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। लेकिन ध्यान रहे, कोई भी दवा इस्तेमाल करने से पहले अपने नजदीकी कृषि अधिकारी या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। कृषि विभाग ने कुछ खास दवाओं की सलाह दी है, जो सोयाबीन अनुसंधान केंद्र ने भी अनुशंसित की हैं। आप एसिटामिप्रिड और बायफेन्थ्रिन का मिश्रण, फ्लोनीकेमिड, या थायोमिथोक्सम और लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन का घोल बना सकते हैं। इन दवाओं को 450 से 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। छिड़काव सुबह या शाम के समय करें, जब हवा हल्की हो। इससे दवा पौधों पर अच्छे से लगती है और असर भी ज्यादा होता है।

सावधानी से बचाएं अपनी फसल

सोयाबीन की फसल को सफेद मक्खी और पीले मोजेक वायरस से बचाना मुश्किल नहीं है, बशर्ते आप समय पर सावधानी बरतें। नियमित रूप से खेत की जांच करें, शुरुआती लक्षण दिखते ही कदम उठाएं, और जरूरत पड़े तो सही दवाओं का उपयोग करें। यह भी जरूरी है कि आप अपने खेत के आसपास साफ-सफाई रखें, ताकि कीटों को छिपने की जगह न मिले। अगर आप इन आसान उपायों को अपनाएंगे, तो आपकी फसल न सिर्फ बचेगी, बल्कि अच्छी पैदावार भी देगी। कृषि विभाग के विशेषज्ञों की सलाह मानें और अपने अनुभव को दूसरे किसानों के साथ भी साझा करें, ताकि सबकी खेती लहलहाए।

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  • Shashikant

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