Ban On 11 Pesticides In UP: हमारे देश का बासमती चावल अपनी खुशबू और स्वाद के लिए दुनियाभर में मशहूर है। खासकर उत्तर प्रदेश के किसान इसकी खेती में बड़ा योगदान देते हैं। लेकिन कुछ हानिकारक कीटनाशकों के इस्तेमाल से बासमती की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा था, जिसके कारण विदेशी बाजारों में इसकी मांग कम हो रही थी।
अब उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए बासमती धान की खेती में 11 कीटनाशकों पर 60 दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। यह रोक 1 अगस्त 2025 से शुरू हो चुकी है और राज्य के 30 जिलों में लागू रहेगी। इस कदम से न सिर्फ बासमती की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि किसानों की कमाई भी बढ़ेगी। आइए जानते हैं कि यह योजना क्या है और किसानों के लिए इसका क्या मतलब है।
कीटनाशकों पर रोक का कारण
बासमती चावल की मांग यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, कुवैत, और कतर में बहुत ज्यादा है। लेकिन इन देशों में खाने की चीजों के लिए सख्त नियम हैं। अगर चावल में कीटनाशकों के अवशेष मिलते हैं, तो वे इसे जहरीला मानकर वापस कर देते हैं। जिला कृषि रक्षा अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि कुछ किसान बासमती की खेती में ऐसे कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे थे, जिनके अवशेष चावल में लंबे समय तक रहते थे।
इससे निर्यात में दिक्कत आ रही थी और किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा था। इसीलिए सरकार ने इन हानिकारक कीटनाशकों पर रोक लगाने का फैसला किया है। यह कदम बासमती की गुणवत्ता को बचाने और भारत की साख को दुनिया में बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
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किन कीटनाशकों पर लगी रोक
कृषि विभाग ने 1 अगस्त से 60 दिनों के लिए 11 कीटनाशकों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इनमें ट्राईसाइक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरोपायरीफॉस, टेब्यूकोनॉजॉल, प्रापिकोनोजोल, थायोमेथोक्सम, प्रोफेनोफॉस, इमीडाक्लोप्रिड, कार्बेंडाजिम, और कार्बोफ्यूरॉन शामिल हैं। ये कीटनाशक फसलों को कीटों और फंगस से बचाने के लिए इस्तेमाल होते थे, लेकिन इनके अवशेष चावल में रहने की वजह से निर्यात में रुकावट आ रही थी। सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे इन कीटनाशकों का इस्तेमाल बंद करें और इसके बजाय जैविक या कम हानिकारक विकल्प अपनाएं। इससे न सिर्फ फसल की गुणवत्ता बनी रहेगी, बल्कि मिट्टी की सेहत भी बेहतर होगी।
किन जिलों में लागू है यह प्रतिबंध
यह प्रतिबंध उत्तर प्रदेश के 30 जिलों में लागू किया गया है, जहां बासमती चावल की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इन जिलों में आगरा, अलीगढ़, औरैया, बागपत, बरेली, बिजनौर, बदायूं, बुलंदशहर, एटा, कासगंज, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, इटावा, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस, मथुरा, मैनपुरी, मेरठ, मुरादाबाद, अमरोहा, कन्नौज, मुजफ्फरनगर, शामली, पीलीभीत, रामपुर, सहारनपुर, शाहजहांपुर, और संभल शामिल हैं। इन जिलों के किसानों को सलाह दी गई है कि वे प्रतिबंधित कीटनाशकों की बिक्री और इस्तेमाल से बचें। अगर कोई दुकानदार इन कीटनाशकों को बेचता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
किसानों के लिए सलाह
कृषि विभाग किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहा है। मुरादाबाद जैसे जिलों में किसान पहले ही रासायनिक कीटनाशकों को छोड़कर जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार ने सलाह दी है कि किसान अपनी फसल की नियमित जांच करें और सुरक्षित विकल्पों का उपयोग करें। जैविक खाद और कम हानिकारक कीटनाशकों का इस्तेमाल न सिर्फ फसल को बेहतर बनाएगा, बल्कि मिट्टी को भी लंबे समय तक उपजाऊ रखेगा। किसानों को अपने नजदीकी कृषि केंद्र से संपर्क करके सही सलाह लेनी चाहिए। यह भी जरूरी है कि किसान एक-दूसरे के साथ अपने अनुभव साझा करें, ताकि सभी को फायदा हो।
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