सितंबर-अक्टूबर की यह फसल बना देगी लखपति, कुछ ही महीनों में होगी बंपर कमाई!

Strawberry Farming: किसान भाइयों, स्ट्रॉबेरी की खेती अब सिर्फ पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के वैज्ञानिकों ने एक नई और उन्नत तकनीक विकसित की है, जिसे पाइप-आधारित खेती या हाइड्रोपोनिक्स कहते हैं। इस तकनीक में स्ट्रॉबेरी के पौधे मिट्टी के बजाय पाइपों में लगाए जाते हैं, और एक खास पोषक मिश्रण की मदद से उगाए जाते हैं। यह तरीका कम जगह में ज्यादा पैदावार देता है, जिससे छोटे किसान भी बंपर मुनाफा कमा सकते हैं। हरियाणा जैसे मैदानी इलाकों में यह तकनीक स्ट्रॉबेरी की खेती को आसान और फायदेमंद बना रही है।

पाइप-आधारित खेती की खासियत

पाइप-आधारित खेती में एक ट्रॉली जैसा ढांचा बनाया जाता है, जिसमें पीवीसी पाइप लगाए जाते हैं। इन पाइपों में निश्चित दूरी पर छेद किए जाते हैं, जहां स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए जाते हैं। मिट्टी की जगह कोकोपीट, वर्मीकम्पोस्ट और परलाइट का मिश्रण इस्तेमाल होता है, जो पौधों को जरूरी पोषण देता है। इस तकनीक में पानी और पोषक तत्व सीधे जड़ों तक पहुंचते हैं, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं। हरियाणा के हिसार और भिवानी जैसे इलाकों में यह तकनीक बहुत लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि यह पारंपरिक खेती से तीन से चार गुना ज्यादा पौधे उगाने की सुविधा देती है। साथ ही, इसमें खरपतवार की समस्या भी नहीं होती।

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खेती के लिए सही तैयारी

इस तकनीक को शुरू करने के लिए सबसे पहले एक मजबूत ढांचा तैयार करना जरूरी है। पीवीसी पाइपों को ट्रॉली या रैक पर लगाएं, और हर 20-30 सेंटीमीटर पर छेद करें। कोकोपीट, वर्मीकम्पोस्ट और परलाइट को 3:1:1 के अनुपात में मिलाकर पौधों के लिए बेस तैयार करें। सितंबर से नवंबर का समय हरियाणा में रोपाई के लिए सबसे अच्छा है। कसूरी सुप्रीम, कैमारोसा, या विंटर डॉन जैसी किस्में इस तकनीक के लिए बेहतर हैं, क्योंकि ये जल्दी फल देती हैं और बाजार में अच्छी मांग रखती हैं। पौधों को लगाते समय ध्यान रखें कि उनका क्राउन हिस्सा मिश्रण की सतह पर रहे, ताकि जड़ें अच्छे से बढ़ सकें।

पानी और पोषण का सही प्रबंधन

पाइप-आधारित खेती में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम का इस्तेमाल होता है, जो पानी और पोषक तत्वों को सीधे जड़ों तक पहुंचाता है। हरियाणा की गर्म जलवायु में यह तरीका पानी की बचत करता है, क्योंकि इसमें 70-80% कम पानी लगता है। एक खास पोषक मिश्रण, जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, और अन्य सूक्ष्म तत्व शामिल होते हैं, को पानी में मिलाकर सप्लाई किया जाता है। हर हफ्ते मिश्रण की मात्रा को चेक करें, ताकि पौधों को सही पोषण मिले। सुबह या शाम के समय ड्रिप सिस्टम चलाएं, ताकि गर्मी में पानी का वाष्पीकरण न हो। इस तकनीक से पौधे स्वस्थ रहते हैं और फल जल्दी तैयार होते हैं।

कीटों और बीमारियों से बचाव

पाइप-आधारित खेती में मिट्टी नहीं होती, इसलिए मिट्टी से होने वाली बीमारियां, जैसे जड़ सड़न, बहुत कम होती हैं। फिर भी, थ्रिप्स और लाही जैसे कीट स्ट्रॉबेरी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके लिए नीम का तेल या जैविक कीटनाशक, जैसे एजाडिरेक्टिन, का छिड़काव करें। अगर फफूंदी या ग्रे मोल्ड जैसे लक्षण दिखें, तो नजदीकी कृषि केंद्र से सलाह लेकर फफूंदनाशक का इस्तेमाल करें। हरियाणा के किसान भाई खेत को साफ रखें और पाइपों की नियमित जांच करें, ताकि पानी का रिसाव न हो। इससे फसल सुरक्षित रहेगी और पैदावार बढ़ेगी।

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कम लागत, ज्यादा मुनाफा

पाइप-आधारित खेती में शुरुआती लागत थोड़ी ज्यादा हो सकती है, क्योंकि इसमें पाइप, ड्रिप सिस्टम, और पोषक मिश्रण की जरूरत पड़ती है। एक छोटे सेटअप (3000 वर्ग फुट) के लिए लगभग 20-25 हजार रुपये का खर्च आता है। लेकिन इसमें प्रति एकड़ 50,000 तक पौधे लगाए जा सकते हैं, जो पारंपरिक खेती के मुकाबले 3-4 गुना ज्यादा है। हरियाणा में स्ट्रॉबेरी का बाजार भाव 800-1200 रुपये प्रति किलो तक जाता है। अच्छे प्रबंधन से 5-6 टन की पैदावार आसानी से मिल सकती है, जिससे 4-5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो सकता है। यह तकनीक छोटे किसानों के लिए भी वरदान है।

सरकारी मदद से आसान शुरुआत

हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार हाइड्रोपोनिक्स खेती को बढ़ावा देने के लिए कई सब्सिडी योजनाएं चला रही हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) के तहत पॉलीहाउस और हाइड्रोपोनिक्स सेटअप के लिए 50-60% तक सब्सिडी मिल सकती है। अपने नजदीकी कृषि केंद्र या जिला बागवानी अधिकारी से संपर्क करें और इन योजनाओं की जानकारी लें।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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