किसान भाइयों के लिए खुशखबरी है! भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), अदलपुरा ने वाराणसी की यूरोग्रीन क्रॉप साइंसेज के साथ एक बड़ा समझौता किया है। इस समझौते के तहत अब लोबिया की “काशी निधि” और भिंडी की “काशी सहिष्णु” किस्मों के उन्नत बीज यूरोग्रीन कंपनी बनाएगी। यह खबर न सिर्फ किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि वाराणसी को सब्जी बीजों का नया केंद्र बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। IIVR की “काशी ब्रांड” की किस्में अपनी गुणवत्ता के लिए मशहूर हैं, और अब ये बीज ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचेंगे।
काशी निधि और काशी सहिष्णु की खासियत
काशी निधि लोबिया और काशी सहिष्णु भिंडी की किस्में खास तौर पर भारतीय खेतों के लिए बनाई गई हैं। काशी निधि लोबिया की फलियां कोमल, हरी, और स्वादिष्ट होती हैं, जो बाजार में अच्छी कीमत लाती हैं। यह किस्म कम समय में अच्छी पैदावार देती है और गर्मी व बारिश दोनों मौसमों में उगाई जा सकती है। वहीं, काशी सहिष्णु भिंडी दो बड़े वायरल रोगों के खिलाफ मजबूत है, जिससे आपको कीटनाशकों का कम इस्तेमाल करना पड़ता है। इसका मतलब है कि खेती की लागत कम होगी और मुनाफा ज्यादा। दोनों ही किस्में लंबे समय तक फल देती हैं, जिससे किसानों को लगातार कमाई होती रहती है।
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खेती का आसान और देसी तरीका
लोबिया और भिंडी की खेती के लिए खेत की अच्छी तैयारी जरूरी है। खेत को गहरी जुताई करके भुरभुरा बना लें और प्रति हेक्टेयर 15-20 टन गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाएं। लोबिया की बुआई के लिए मई से जुलाई और भिंडी के लिए फरवरी से मार्च का समय सबसे अच्छा है। काशी निधि के बीज 20-25 सेंटीमीटर की दूरी पर और काशी सहिष्णु के बीज 30 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं। बुआई के बाद हल्का पानी दें, ताकि मिट्टी नम रहे। अगर आपके खेत में रेतीली दोमट मिट्टी है, तो यह दोनों फसलों के लिए एकदम सही है। खरपतवार को समय-समय पर उखाड़ते रहें, ताकि पौधों को पूरा पोषण मिले।
कीटों से बचाव के प्राकृतिक नुस्खे
काशी सहिष्णु भिंडी वायरल रोगों के खिलाफ मजबूत है, लेकिन लाही और फल छेदक जैसे कीटों से बचाव के लिए सावधानी बरतनी होगी। नीम के तेल का हल्का घोल बनाकर छिड़काव करें, जो कीटों को दूर रखता है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता। लोबिया में चीटियों और ततैया जैसे मित्र कीटों को प्रोत्साहन दें, जो हानिकारक कीटों को खा जाते हैं। अगर खेत में फफूंदी के लक्षण दिखें, तो नजदीकी कृषि केंद्र से सलाह लेकर जैविक फफूंदनाशक का इस्तेमाल करें। खेत को साफ रखें और पुराने पौधों के अवशेष हटा दें, ताकि रोग न फैलें।
कम लागत, ज्यादा मुनाफा
काशी निधि और काशी सहिष्णु की खेती में लागत कम आती है, क्योंकि ये किस्में रोगों के खिलाफ मजबूत हैं और कीटनाशकों का कम इस्तेमाल होता है। IIVR के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के अनुसार, काशी सहिष्णु से किसानों की आय 20-25% तक बढ़ सकती है। एक एकड़ में भिंडी की खेती से 8-10 टन और लोबिया से 6-8 टन पैदावार मिल सकती है। बाजार में भिंडी का भाव 30-50 रुपये प्रति किलो और लोबिया का 40-60 रुपये प्रति किलो तक जाता है। अच्छे प्रबंधन से एक एकड़ में 1.5-2 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा आसानी से कमाया जा सकता है।
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बीज कहां से मंगवाएं
काशी निधि और काशी सहिष्णु के सत्यापित बीज अब यूरोग्रीन क्रॉप साइंसेज के जरिए आसानी से उपलब्ध होंगे। आप अपने नजदीकी कृषि केंद्र या बीज विक्रेता से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन (NSC) के ऑनलाइन स्टोर (mystore.in) पर भी ऐसी उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध हो सकते हैं। अपने स्थानीय NSC डीलर से इन बीजों की जानकारी लें। कई राज्यों में सरकार बीजों पर सब्सिडी देती है, इसलिए जिला कृषि कार्यालय से सब्सिडी योजनाओं के बारे में पूछें। यह सुनिश्चित करें कि आपको शुद्ध और सत्यापित बीज ही मिलें।
सरकारी मदद से खेती को बनाएं आसान
केंद्र और राज्य सरकारें सब्जी खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) और अन्य कृषि योजनाओं के तहत बीज, खाद, और उपकरणों पर 50-60% तक सब्सिडी मिल सकती है। अपने नजदीकी कृषि केंद्र या जिला बागवानी अधिकारी से संपर्क करें और इन योजनाओं का लाभ उठाएं। साथ ही, IIVR और कृषि विश्वविद्यालयों की ट्रेनिंग में हिस्सा लें, ताकि आप नई तकनीकों और देसी नुस्खों से अपनी खेती को और बेहतर बना सकें। काशी निधि और काशी सहिष्णु के साथ अपनी खेती को मुनाफे का नया रास्ता दें।
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