प्राकृतिक औषधि उद्योग में अक्सर मिलावट और धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आती रहती हैं। हल्दी, अश्वगंधा और तुलसी जैसे औषधीय पौधों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता की जांच करना आसान नहीं होता। लेकिन अब केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (CIMAP) के वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एक अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है, जो औषधीय पौधों की सटीक पहचान करके उनकी असलियत सुनिश्चित करेगी।
कैसे काम करती है तकनीक
इस नई तकनीक में हाई-रेजोल्यूशन मास स्पेक्ट्रोमेट्री को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ा गया है। यह पौधों के अनूठे रासायनिक फिंगरप्रिंट का विश्लेषण करती है और यह पता लगाती है कि पौधा असली है या उसमें मिलावट की गई है। शोध “फूड केमिस्ट्री” नामक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसमें बताया गया है कि यह विधि औषधीय पौधों की प्रामाणिकता की जांच के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
98% से अधिक सटीक परिणाम
CIMAP के निदेशक प्रमोद कुमार त्रिवेदी के अनुसार, इस तकनीक को वास्तविक बाजार के नमूनों और असली नमूनों की तुलना करके परखा गया। परीक्षण के बाद पता चला कि यह तकनीक पौधों की भौगोलिक पहचान और किस्म को 98 फीसदी से अधिक सटीकता के साथ बताती है। इतना ही नहीं, यह मिलावटी नमूनों को भी तुरंत पहचान लेती है।
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हैंडहेल्ड मशीन से मौके पर जांच
शोधकर्ताओं की टीम ने इस तकनीक पर आधारित एक छोटी हैंडहेल्ड मशीन भी बनाई है। इसमें जड़ी-बूटियों के नमूने रखकर स्कैन किया जाता है और तुरंत यह जानकारी मिल जाती है कि नमूना असली है या मिलावटी। शोध के मुख्य लेखक सीएच रत्नशेखर के अनुसार, यह हैंडहेल्ड स्कैनिंग मॉडल औषधीय पौधों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। अब बाजारों और सप्लाई चेन में मौके पर ही जांच करना आसान होगा।
औषधि उद्योग के लिए बड़ा बदलाव
यह तकनीक किसानों, औषधि उद्योग, निर्यातकों और नियामक संस्थाओं सभी के लिए लाभकारी है। इससे जड़ी-बूटियों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी, निर्यात में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा और उपभोक्ताओं को शुद्ध उत्पाद मिलेंगे। यह खोज भारत को प्राकृतिक औषधि उद्योग में और अधिक विश्वसनीय बनाएगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी मांग बढ़ाएगी।
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