गर्मियों के मौसम में पशुपालकों को हरे चारे की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे पशुओं के दूध उत्पादन में कमी आती है। लेकिन, कुछ ऐसी फसलें हैं जिनकी खेती करके पशुपालक इस समस्या से निजात पा सकते हैं। इन फसलों को उगाने से न केवल हरे चारे की कमी दूर होगी, बल्कि पशुओं का दूध उत्पादन भी बढ़ेगा। इससे पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होगी।
गर्मियों में उगाई जाने वाली फसलें
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अतुल कुमार के अनुसार, गर्मियों में लोबिया, मक्का, बरसीम, नेपियर घास और ज्वार जैसी फसलें पशुओं के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं। ये फसलें तेजी से बढ़ती हैं और हरे चारे की कमी को पूरा करती हैं। इन फसलों की खेती करने से न केवल पशुओं को पौष्टिक चारा मिलता है, बल्कि खेत की उर्वरक क्षमता भी बढ़ती है।
नेपियर घास: पशुओं के लिए उत्तम चारा
नेपियर घास पशुओं के लिए एक उत्तम चारा माना जाता है। इसमें क्रूड प्रोटीन 8-10%, क्रूड रेशा 30% और कैल्शियम 0.5% होता है। इसके अलावा, इसमें 16-20% शुष्क पदार्थ, 60% पाचन क्षमता और 3% ऑक्सालेट होता है। नेपियर घास को दलहनी चारे के साथ मिलाकर पशुओं को खिलाना चाहिए। इसकी खेती करने से पशुपालकों को चारे की कमी का सामना नहीं करना पड़ता।
बरसीम घास: दूध उत्पादन बढ़ाने में सहायक
बरसीम घास पशुओं के दूध उत्पादन को बढ़ाने में बहुत मददगार होती है। इसे भूसे के साथ मिलाकर पशुओं को खिलाना चाहिए। तीन किलो भूसे में डेढ़ किलो बरसीम घास मिलानी चाहिए। बरसीम घास खाने वाले पशु निरोगी रहते हैं और यह पचाने में आसान होती है। दुधारू पशुओं को बरसीम का चारा फरवरी से अप्रैल महीने तक खिलाना चाहिए।
ज्वार: पशुओं के लिए पौष्टिक चारा
ज्वार की चरी को पशुओं के लिए सबसे उत्तम हरा चारा माना जाता है। इसे हरा, सूखा और साइलेज के रूप में पशुओं को खिलाया जा सकता है। ज्वार में जब 50% फूल आ जाएं, तब उसे पशुओं को खिलाना चाहिए। इस अवस्था में ज्वार खिलाने के बेहतर परिणाम मिलते हैं। ज्वार के चारे में औसतन 4.5 से 6.5% क्रूड प्रोटीन होता है, जो पशुओं के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
लोबिया: प्रोटीन से भरपूर चारा
लोबिया का चारा पशुओं के लिए अत्यंत पौष्टिक होता है। इसमें 17 से 18% प्रोटीन, कैल्शियम और फास्फोरस भरपूर मात्रा में होता है। लोबिया के शुरुआती ताजा पत्तियों और डंठल में 0% कच्चा प्रोटीन, 3.0% ईथर का अर्क और 26.7% कच्चा फाइबर होता है। यह चारा पचाने में आसान होता है और पशुओं के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
गर्मियों के मौसम में पशुओं के लिए हरे चारे की कमी को दूर करने के लिए लोबिया, मक्का, नेपियर घास, बरसीम और ज्वार जैसी फसलों की खेती करना एक बेहतर विकल्प है। इन फसलों को उगाने से न केवल पशुओं को पौष्टिक चारा मिलेगा, बल्कि दूध उत्पादन में भी वृद्धि होगी। इससे पशुपालकों की आय में भी सुधार होगा।
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