Soybean Price: सोयाबीन का रेट सुधरा लेकिन दर्द बाकी! MSP से नीचे बिक रही फसल, किसानों की चिंता बरकरार

Soybean Price: देश के सोयाबीन किसान एक बार फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से दूर रहने की वजह से परेशान हैं। जनवरी 2026 में मंडियों में सोयाबीन के दाम पिछले साल से बेहतर जरूर हैं लेकिन ये लागत और मेहनत के हिसाब से काफी कम हैं। नवंबर और दिसंबर 2025 में औसत भाव क्रमशः 4707.23 रुपये और 4789.18 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। अगर तमिलनाडु और मणिपुर जैसे कुछ राज्यों के असामान्य ऊंचे भावों को छोड़ दें तो औसत करीब 4250 रुपये प्रति क्विंटल रह जाता है। ये MSP 5328 रुपये प्रति क्विंटल से 1000 से 1100 रुपये कम है।

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे मुख्य सोयाबीन उत्पादक राज्यों में दिसंबर के भाव 4300 से 4600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे। मध्य प्रदेश में औसत 4300 रुपये, महाराष्ट्र में 4383 रुपये और राजस्थान में 4466 रुपये प्रति क्विंटल रहा। ये सभी भाव MSP से 15 से 20 प्रतिशत नीचे हैं। नवंबर से दिसंबर के बीच कुछ राज्यों में हल्की तेजी आई लेकिन ये MSP तक पहुंचने के लिए काफी नहीं थी।

किसानों की बढ़ती चिंता और बाजार की स्थिति

सोयाबीन देश के लिए खाद्य तेल उत्पादन की सबसे अहम फसल है। खरीफ 2025 में किसानों ने पिछले साल से कम बुवाई की, जिससे रकबा और उत्पादन में गिरावट आई। कई राज्यों में बारिश और रोग-कीटों से फसल को नुकसान पहुंचा। मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को मुआवजा दिया और भावांतर योजना लागू की, जिसमें मॉडल रेट और MSP के बीच का अंतर सीधे किसानों के खाते में भेजा गया। लेकिन कई किसान भावांतर से भी नाखुश हैं और सीधे MSP की मांग कर रहे हैं।

महाराष्ट्र में महायुति सरकार ने सोयाबीन पर 6000 रुपये प्रति क्विंटल MSP का वादा किया था लेकिन वो अभी अधूरा है। यहां किसान वर्तमान MSP से भी वंचित हैं। आने वाले खरीफ सीजन में सोयाबीन की बुवाई पर असर पड़ने की आशंका है। मौसम विभाग ने अल-नीनो की स्थिति बने रहने का अनुमान जताया है, जिससे मॉनसून में कम बारिश हो सकती है और खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।

किसानों को सही भाव कब मिलेगा

विशेषज्ञों का कहना है कि सोयाबीन के दाम में सुधार तो हुआ लेकिन MSP तक पहुंचने में अभी समय लगेगा। अगर सरकारी खरीद बढ़ी या अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ऊपर गईं तो भाव सुधर सकते हैं। लेकिन फिलहाल किसान कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं। कई जगहों पर भावांतर योजना से राहत मिली लेकिन किसान सीधी MSP खरीद की मांग कर रहे हैं।

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  • Shashikant

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