शीतलहर में गेंहू की सिंचाई जरूरी या खतरनाक? एक्सपर्ट की सलाह नहीं मानी तो जाएगी पूरी पैदावार

Wheat Crop Tips: जनवरी-फरवरी की कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने किसान भाइयों की गेहूं की फसल को मुश्किल में डाल दिया है। मौसम विभाग ने कई राज्यों में अगले दिनों तक शीतलहर और पाला का अलर्ट जारी किया है। इस समय गेहूं की फसल कंद विकास और बालियां बनने की महत्वपूर्ण अवस्था में होती है। ठंड से पत्तियां जड़ सकती हैं, बढ़वार रुक सकती है और पैदावार में 20-30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। लेकिन सही समय पर सिंचाई, मिट्टी चढ़ाई और रोग बचाव के उपाय अपनाकर फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं को पाले से बचाने के लिए सिंचाई का समय और तरीका बहुत मायने रखता है। सुबह-सुबह या रात में सिंचाई करने से ठंडी नमी से पाला ज्यादा लगता है। इसलिए दोपहर के समय हल्की सिंचाई करें। पानी इतना दें कि मिट्टी गीली हो जाए लेकिन जलभराव न हो। जलभराव से जड़ें सड़ सकती हैं और फसल गिरने का खतरा बढ़ जाता है। अगर मिट्टी भारी है तो सिंचाई के बीच अंतर रखें। हल्की सिंचाई से मिट्टी में नमी बनी रहती है और पाला का असर कम होता है।

पाला और शीतलहर से फसल बचाने के आसान तरीके

पाला पड़ने पर गेहूं की पत्तियां सफेद या भूरी हो जाती हैं और किनारे जले हुए दिखने लगते हैं। इससे फोटोसिंथेसिस रुक जाता है और दाने अच्छे नहीं भरते। पाला से बचाव के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई सबसे कारगर है। पानी देने से मिट्टी का तापमान बढ़ता है और पाला कम लगता है। कई किसान भाई पौधों पर पुआल या सूखी घास की पतली परत बिछा देते हैं, जो रात की ठंड से बचाव करती है। अगर फसल छोटी है तो पॉलीथीन शीट से ढक सकते हैं।

शीतलहर में हवा तेज चलती है, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं। इसलिए खेत की मेढ़ें मजबूत रखें और पौधों के बीच हवा का प्रवाह अच्छा बनाए रखें। अगर पत्तियां पीली पड़ रही हों या धब्बे दिख रहे हों तो ये फफूंद रोग के संकेत हैं। अर्ली ब्लाइट या लेट ब्लाइट का खतरा रहता है। ऐसे में टेबूकोनाजोल या हेक्साकोनाजोल का छिड़काव 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से करें। स्प्रे सुबह या शाम करें और मौसम साफ होने पर ही करें।

पैदावार बढ़ाने की कुंजी

गेहूं की फसल में इस समय दूसरी या तीसरी सिंचाई का दौर चल रहा है। वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि सिंचाई के साथ यूरिया की टॉप ड्रेसिंग जरूर करें। सिंचाई के 2-3 दिन बाद यूरिया छिड़कें ताकि पौधे नाइट्रोजन पाकर हरे-भरे रहें। ज्यादा ठंड में नाइट्रोजन की कमी से पत्तियां पीली पड़ सकती हैं। फास्फोरस और पोटाश का बैलेंस भी रखें, क्योंकि पोटाश पौधों को ठंड सहन करने की ताकत देता है।

मिट्टी चढ़ाई का काम भी पूरा कर लें। पौधों के तने तक भुरभुरी मिट्टी चढ़ाएं ताकि जड़ें मजबूत हों और कंद अच्छे बैठें। खरपतवार निकालते रहें और खेत साफ रखें। अगर खेत में जलभराव हो रहा है तो निकास का इंतजाम करें।

किसान भाइयों के लिए खास सलाह और आगे की तैयारी

कुल मिलाकर इस ठंड में गेहूं की फसल को बचाने के लिए दोपहर की सिंचाई, मिट्टी चढ़ाई और समय पर दवा का छिड़काव सबसे जरूरी है। मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें और फसल की रोज जांच करें। अगर पाला लग गया है तो घबराएं नहीं, हल्की सिंचाई और पोटाश युक्त खाद से फसल रिकवर हो सकती है। अपने इलाके के कृषि विज्ञान केंद्र या विशेषज्ञ से सलाह लें।

किसान भाइयों, ये समय फसल की सेहत का टर्निंग पॉइंट है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर आप अपनी मेहनत को सुरक्षित रख सकते हैं और बंपर पैदावार ले सकते हैं।

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  • Shashikant

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