देश में कीटनाशकों के बढ़ते दुरुपयोग और फर्जी दवाओं की समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने ड्राफ्ट पेस्टीसाइड मैनेजमेंट बिल 2025 जारी किया है। ये बिल पुराने इनसेक्टिसाइड एक्ट 1968 को पूरी तरह बदल देगा। मुख्य उद्देश्य है कि किसान भाइयों को असली और सुरक्षित कीटनाशक मिलें, फर्जीवाड़ा खत्म हो और पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य पर कोई खतरा न रहे। बिल में रजिस्ट्रेशन, लाइसेंसिंग, बिक्री और सजा के नियमों को बहुत सख्त बनाया गया है।
किसान भाइयों के लिए ये बिल बहुत राहत की बात है क्योंकि बाजार में फर्जी और घटिया कीटनाशक इतने ज्यादा हैं कि फसल तो प्रभावित होती ही है, साथ ही स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। कई बार किसान महंगी दवा खरीदकर भी फायदा नहीं पाते क्योंकि वो नकली या एक्सपायर्ड होती हैं। इस बिल से ऐसी समस्याओं पर लगाम लगेगी।
फर्जी दवाओं पर सख्ती
बिल में पेस्टीसाइड रजिस्ट्रेशन को और पारदर्शी बनाया गया है। अब हर कीटनाशक को रजिस्टर कराने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण और पर्यावरण प्रभाव का पूरा डाटा देना होगा। फर्जी या घटिया दवा बनाने वालों पर सख्त सजा का प्रावधान है – जुर्माना कई लाख से लेकर करोड़ तक और जेल की सजा 5 से 7 साल तक हो सकती है।
लाइसेंसिंग के नियम भी बदल गए हैं। दुकानदारों को अब ज्यादा ट्रेनिंग और प्रमाणपत्र लेना होगा। बिना लाइसेंस के दवा बेचने पर लाइसेंस रद्द होने के साथ भारी जुर्माना लगेगा। ऑनलाइन बिक्री पर भी सख्ती है – सिर्फ रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म पर ही दवा बेची जा सकेगी।
बिल में किसानों की सुरक्षा पर विशेष फोकस है। दवा की पैकेजिंग पर स्पष्ट चेतावनी, इस्तेमाल का तरीका और एक्सपायरी डेट बड़ी फॉन्ट में लिखना अनिवार्य होगा। जहरीले कीटनाशकों पर प्रतिबंध बढ़ाने की बात है और जैविक विकल्पों को बढ़ावा दिया जाएगा।
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किसानों को क्या फायदे मिलेंगे
इस बिल से किसानों को असली दवा मिलेगी, जिससे फसल पर असर अच्छा होगा और पैदावार बढ़ेगी। फर्जी दवा से होने वाला नुकसान रुकेगा। स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा क्योंकि घटिया दवाओं से त्वचा रोग, सांस की समस्या और कैंसर जैसी बीमारियां कम होंगी।
बिल में दवा की कीमतों पर भी नजर रखने का प्रावधान है ताकि किसानों को महंगी दवा न थोपी जाए। अगर कोई कंपनी फर्जी दवा बेचती पकड़ी गई तो उसकी पूरी कंपनी पर कार्रवाई हो सकती है। ये किसानों के लिए न्यायपूर्ण व्यवस्था लाएगा।
बिल पर क्या है किसानों की राय
कई किसान संगठनों ने बिल का स्वागत किया है लेकिन कुछ ने कहा कि इसे और मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्हें लगता है कि फर्जी दवा बनाने वालों पर और सख्त सजा होनी चाहिए। साथ ही जैविक कीटनाशकों को बढ़ावा देने के लिए अलग से सब्सिडी और ट्रेनिंग की जरूरत है। सरकार ने कहा है कि बिल पर सभी पक्षों की राय ली जाएगी और उसे बेहतर बनाया जाएगा।
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