देश में बीजों की गुणवत्ता और उपलब्धता को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। फर्जी बीज, कमजोर उत्पादन और किसानों को धोखा देने की घटनाएं आम हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने नया बीज विधेयक 2025 का ड्राफ्ट तैयार किया है। ये विधेयक पुराने बीज अधिनियमों को बदलकर बीज उद्योग को और पारदर्शी, जवाबदेह और किसान-अनुकूल बनाने का दावा करता है। लेकिन किसान संगठनों और विशेषज्ञों में इसके कुछ प्रावधानों को लेकर चिंता भी है।
विधेयक का मुख्य उद्देश्य है कि किसानों को असली, प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले बीज मिलें। फर्जी बीज बनाने और बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और बीज की कीमतें नियंत्रित रहें। साथ ही नई वैरायटी विकसित करने वाली कंपनियों को भी प्रोत्साहन मिले। लेकिन रॉयल्टी, पेटेंट और किसान के अधिकारों पर नए नियमों से बहस छिड़ गई है।
विधेयक के मुख्य प्रावधान और उनके असर
विधेयक में बीज रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य और पारदर्शी बनाने पर जोर है। अब हर बीज को रजिस्टर कराने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण, फील्ड ट्रायल और पर्यावरण प्रभाव का पूरा डाटा देना होगा। फर्जी या घटिया बीज बेचने पर भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। दुकानदारों को लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा और बिना लाइसेंस के बिक्री पर लाइसेंस रद्द होने के साथ जुर्माना लगेगा।
किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि वे अपनी फसल से बीज रख सकते हैं और अगली फसल के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। विधेयक में किसान को ये अधिकार दिया गया है कि वह अपनी जरूरत के लिए बीज रख सकता है और बेच भी सकता है। लेकिन अगर बीज किसी कंपनी की पेटेंटेड वैरायटी का है तो रॉयल्टी देने का प्रावधान है। ये रॉयल्टी किसान की बिक्री पर निर्भर करेगी।
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कई किसान संगठनों का कहना है कि ये प्रावधान छोटे किसानों के लिए बोझ बन सकता है। अगर वे पेटेंटेड वैरायटी का बीज इस्तेमाल करते हैं तो रॉयल्टी देनी पड़ेगी, जो उनकी लागत बढ़ा सकती है। दूसरी तरफ सरकार और बीज कंपनियां कहती हैं कि ये प्रावधान नई रिसर्च और बेहतर वैरायटी लाने के लिए जरूरी है। कंपनियां ज्यादा निवेश करेंगी तभी किसानों को बेहतर बीज मिलेंगे।
किसानों पर क्या असर पड़ेगा
फायदे की बात करें तो विधेयक से फर्जी बीज खत्म होंगे। किसान भाइयों को असली और प्रमाणित बीज मिलेंगे, जिससे पैदावार बढ़ेगी और नुकसान कम होगा। बीज की कीमतें नियंत्रित रहेंगी और बाजार में पारदर्शिता आएगी। जैविक और देशी बीजों को बढ़ावा मिलेगा।
चिंताएं ये हैं कि पेटेंट और रॉयल्टी से बीज की कीमतें बढ़ सकती हैं। छोटे किसान जो अपनी फसल से बीज रखते हैं, उन्हें भी प्रभावित होना पड़ सकता है। कई किसान संगठन कह रहे हैं कि विधेयक में किसान के अधिकारों को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि कोई कंपनी किसानों पर दबाव न डाल सके।
कुल मिलाकर ये विधेयक किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करने की कोशिश है लेकिन इसमें कुछ संतुलन की जरूरत है। सरकार ने कहा है कि सभी पक्षों की राय ली जाएगी और विधेयक को बेहतर बनाया जाएगा।
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