उत्तर भारत के किसान भाइयों के लिए जनवरी का महीना मुसीबत लेकर आया है। जहां एक तरफ ठंड और कोहरा फसल को परेशान कर रहा था, वहीं अब अचानक तापमान बढ़ने से नया संकट खड़ा हो गया है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार के कई इलाकों में दिन का तापमान सामान्य से 4-6 डिग्री ज्यादा चल रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ये गर्मी गेहूं की फसल के लिए बहुत खतरनाक है। इसकी वजह से बालियां जल्दी आने लगी हैं, दाने छोटे रह जाएंगे और पैदावार में 10 से 20 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं को दाने भरने के लिए ठंडा मौसम चाहिए। जनवरी-फरवरी में अगर तापमान 25-30 डिग्री से ऊपर चला जाए तो फसल की बढ़वार रुक जाती है और दाने पिचके रह जाते हैं। कई किसान भाई पहले से ही खेतों में ये लक्षण देख रहे हैं पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं और बालियां छोटी आ रही हैं। अगर समय पर उपाय नहीं किए गए तो मेहनत पर पानी फिर सकता है।
तापमान बढ़ने से फसल पर क्या असर पड़ता है
गेहूं की फसल में दाने भरने की प्रक्रिया फोटोसिंथेसिस पर निर्भर करती है। ज्यादा गर्मी से पौधे का भोजन बनाने का काम धीमा पड़ जाता है। नतीजा ये होता है कि दाने छोटे और हल्के रह जाते हैं। बाजार में ऐसे दानों की कीमत भी कम मिलती है। साथ ही गर्मी से रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है – सफेद रतुआ, करनाल बंट और लूज स्मट जैसे रोग तेजी से फैल सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने बताया कि इस समय फसल दूध अवस्था या दाना बनने की स्टेज में है। अगर तापमान 30 डिग्री से ऊपर रहा तो दाने सिकुड़ जाएंगे और चमक कम हो जाएगी। कई इलाकों में किसान भाई पहले से ही चिंतित हैं क्योंकि बालियां समय से पहले आ गई हैं।
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वैज्ञानिकों की सलाह: अभी करें ये उपाय
वैज्ञानिकों ने किसानों को तुरंत कुछ आसान उपाय अपनाने की सलाह दी है। सबसे पहले हल्की सिंचाई करें। दोपहर के समय पानी दें ताकि पौधों को ठंडक मिले और नमी बनी रहे। ज्यादा पानी न दें, वरना जलभराव से रोग लग सकते हैं।
पोटाश और सल्फर युक्त खाद जरूर डालें। पोटाश पौधों को गर्मी सहन करने की ताकत देता है और दाने अच्छे भरते हैं। सल्फर से पत्तियां हरी रहती हैं और फोटोसिंथेसिस तेज होता है। अगर पत्तियां पीली पड़ रही हैं तो यूरिया की हल्की टॉप ड्रेसिंग करें।
रोगों पर नजर रखें। अगर पत्तियों पर सफेद पाउडर या भूरे धब्बे दिखें तो प्रोपिकोनाजोल या टेबूकोनाजोल का छिड़काव करें। स्प्रे सुबह या शाम करें और मौसम साफ होने पर ही करें।
आगे का मौसम और किसानों के लिए सावधानी
मौसम विभाग का कहना है कि जनवरी के अंत तक तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। फरवरी में सामान्य ठंड लौट सकती है लेकिन अभी सतर्क रहना जरूरी है। किसान भाई रोज खेत की जांच करें और मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें।
किसान भाइयों, ये समय फसल की सेहत का निर्णायक दौर है। हल्की सिंचाई, पोटाश-स्लफर खाद और समय पर स्प्रे से आप अपनी फसल को बचा सकते हैं। नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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