उत्तर प्रदेश के किसान भाइयों के लिए पिछले 9 साल बहुत खास रहे हैं। राज्य सरकार की कृषि नीतियों और लगातार प्रयासों से प्रदेश में कृषि विकास की दर 14 प्रतिशत से ज्यादा रही है। ये आंकड़ा देश के कई राज्यों से काफी बेहतर है और किसानों की मेहनत का सच्चा फल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लोन माफी से लेकर रिकॉर्ड उत्पादन तक का सफर रहा है। राज्य अब गेहूं, धान, गन्ना, दालें और तिलहन में देश का सबसे बड़ा उत्पादक बन चुका है।
सरकार ने 2017 से अब तक कई बड़े कदम उठाए हैं। सबसे पहले किसान कर्ज माफी योजना से लाखों किसानों को राहत मिली। उसके बाद सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, उन्नत बीजों का वितरण, कृषि यंत्रों पर भारी सब्सिडी और MSP पर खरीद को मजबूत किया गया। इन सबका नतीजा ये हुआ कि प्रदेश में फसल उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हुई। गेहूं का उत्पादन 3 करोड़ टन से ज्यादा पहुंच गया है और धान में भी रिकॉर्ड तोड़ा गया है।
लोन माफी से शुरू हुआ बदलाव
2017 में सरकार ने किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज माफ किया। इससे लाखों छोटे और सीमांत किसानों को नई शुरुआत मिली। कर्ज मुक्त होने के बाद किसान बीज, खाद और यंत्रों में निवेश कर सके। इसके बाद पीएम किसान सम्मान निधि योजना से सालाना 6000 रुपये की सहायता मिली। राज्य स्तर पर भी कई योजनाएं शुरू हुईं जैसे मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना और सोलर पंप सब्सिडी। इन सबने किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत की और खेती में नए निवेश का रास्ता खोला।
गेहूं-धान में देश का नंबर 1
पिछले 9 सालों में उत्तर प्रदेश ने गेहूं और धान में रिकॉर्ड उत्पादन किया है। गेहूं का उत्पादन 3 करोड़ टन से ऊपर पहुंच गया है और धान में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। गन्ना उत्पादन में प्रदेश पहले से ही नंबर 1 है। दालों और तिलहन में भी अच्छी प्रगति हुई है। सरकार की MSP पर खरीद नीति से किसानों को अच्छे दाम मिले और वे बाजार में धोखा खाने से बचे।
कृषि विकास दर 14 प्रतिशत से ज्यादा रहने का मुख्य कारण सिंचाई सुविधाओं का विस्तार है। ट्यूबवेल, नहरों और लिफ्ट सिंचाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। सोलर पंप योजना से हजारों किसानों को मुफ्त बिजली मिली। उन्नत बीजों का वितरण और जैविक खेती को बढ़ावा देने से मिट्टी की उर्वरता बनी रही।
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