ऊसर जमीन भी देगी बंपर फसल! ट्रेंच विधि से लगाएं गन्ने की ये 2 किस्में और साथ में करें सब्जी खेती

Sugarcane Farming Tips : किसान भाई, अगर आपके पास ऊसर जमीन पड़ी है और आपको लगता है कि अब इसमें कुछ नहीं उग सकता, तो रुकिए! उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान ने ऐसी किस्में तैयार की हैं, जो ऊसर जमीन को सोने की खान बना सकती हैं। इन दिनों बसंतकालीन गन्ने की बुवाई चल रही है, और यूपी 14234 और को.शा. 14233 जैसी किस्में ऊसर जमीन में बंपर पैदावार दे रही हैं। ट्रेंच विधि से बुवाई करें, तो साथ में सब्जियाँ भी उगा सकते हैं। इससे न सिर्फ गन्ने का खर्च निकल आएगा, बल्कि जेब भी भर जाएगी। चलिए, आपको इसका पूरा तरीका बताते हैं।

ऊसर जमीन की टेंशन खत्म

कई किसानों को लगता है कि ऊसर जमीन बेकार है, लेकिन ऐसा नहीं है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के वैज्ञानिकों ने गन्ने की ऐसी किस्में बनाई हैं, जो ऊसर मिट्टी में भी शानदार उत्पादन देती हैं। संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक बताते हैं कि यूपी 14234 और को.शा. 14233 ऊसर जमीन के लिए बेस्ट हैं। ये किस्में नमक वाली मिट्टी में भी हार नहीं मानतीं और 80-100 टन प्रति हेक्टेयर तक पैदावार दे सकती हैं। बस बुवाई के वक्त सही तरीका अपनाएँ, तो मुनाफा पक्का है।

ट्रेंच विधि से बुवाई

गन्ने की खेती में ट्रेंच विधि कमाल की है। पहले खेत की गहरी जुताई करें—ट्रैक्टर से 2-3 बार हल चलाएँ, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। फिर ट्रेंच डिगर या हल से 1 फीट चौड़ी और 20-25 सेमी गहरी नालियाँ बनाएँ। नालियों में 1-2 आँख वाले गन्ने के टुकड़े 30 सेमी की दूरी पर बो दें। दो नालियों के बीच 4-5 फीट जगह छोड़ें। बीज को बोने से पहले फफूंदनाशक (कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम/लीटर पानी) से उपचार करें। मिट्टी में गोबर की सड़ी खाद (10-15 टन/हेक्टेयर) डालें और संतुलित उर्वरक (120 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो फॉस्फोरस, 40 किलो पोटाश) का इस्तेमाल करें। ट्रेंच विधि से फसल गिरने का डर कम रहता है, और पैदावार भी बढ़िया होती है।

सहफसली सब्जियों का कमाल

ट्रेंच विधि में दो लाइनों के बीच 4-5 फीट की जगह बचती है। इस जगह में आप भिंडी, मूली, पालक, धनिया या लौकी जैसी सब्जियाँ उगा सकते हैं। ये सब्जियाँ 2-3 महीने में तैयार हो जाती हैं, और गन्ने की फसल को नुकसान भी नहीं पहुँचातीं। मिसाल के तौर पर, 1 हेक्टेयर में भिंडी से 50-60 क्विंटल पैदावार हो सकती है, जो 20-30 रुपये/किलो बिके, तो 10-15 हज़ार रुपये आसानी से मिल जाएँगे। इससे गन्ने की खेती का खर्च निकल आएगा, और ऊपर से मुनाफा बचेगा। सब्जियाँ उगाने से खेत की गुड़ाई भी आसान हो जाती है।

देखभाल के आसान टिप्स

ऊसर जमीन में पानी का खास ध्यान रखें। पानी रुकने न दें, वरना जड़ें सड़ सकती हैं। हफ्ते में 1-2 बार हल्की सिंचाई करें। कीटों से बचाने के लिए नीम तेल (5 मिली/लीटर पानी) का छिड़काव करें। खेत को खरपतवार से साफ रखें, ताकि गन्ने को पूरा पोषण मिले। 45-50 दिन बाद पहली गुड़ाई करें। यूपी 14234 और को.शा. 14233 ऊसर मिट्टी में भी 10-12 महीने में तैयार हो जाती हैं। इनकी खासियत है कि ये सूखा और नमक सहन कर लेती हैं।

मुनाफा

1 हेक्टेयर में गन्ने की खेती का खर्च 50-60 हज़ार रुपये आता है। यूपी 14234 और को.शा. 14233 से 80-100 टन पैदावार मिल सकती है। 3000 रुपये/टन के हिसाब से 2.4-3 लाख रुपये की कमाई। सहफसली सब्जियों से 15-20 हज़ार रुपये अलग से। कुल मिलाकर 2-2.5 लाख रुपये का मुनाफा। तो ऊसर जमीन को कोसने की बजाय, आज ही बुवाई शुरू करें और मालामाल बनें!

ये भी पढ़ें- तरबूज मीठा निकलेगा या फीका? बिना काटे पहचानने के ये 5 जबरदस्त टिप्स आजमाएं!

Author

  • Rahul Maurya

    मेरा नाम राहुल है। मैं उत्तर प्रदेश से हूं और मैंने संभावना इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है। मैं Krishitak.com का संस्थापक और प्रमुख लेखक हूं। पिछले 3 वर्षों से मैं खेती-किसानी, कृषि योजनाएं, और ग्रामीण भारत से जुड़े विषयों पर लेखन कर रहा हूं।

    Krishitak.com के माध्यम से मेरा उद्देश्य है कि देशभर के किसानों तक सटीक, व्यावहारिक और नई कृषि जानकारी आसान भाषा में पहुँचे। मेरी कोशिश रहती है कि हर लेख पाठकों के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी साबित हो, जिससे वे खेती में आधुनिकता और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकें।

    View all posts

Leave a Comment