Organic Lump Cabbage Farming : गांठ गोभी, जिसे कोहलरबी या नॉल-खोल कहते हैं, गोभी की फैमिली की फसल है, और इसका कंद जमीन के ऊपर बनता है। ये शलजम और गोभी का मिला-जुला स्वाद देता है – हल्का मीठा और कुरकुरा। ऑर्गेनिक खेती से न सिर्फ सेहतमंद सब्जी मिलती है, बल्कि मिट्टी भी अच्छी रहती है और बाज़ार में इसके दाम भी बढ़िया मिलते हैं। इसे सलाद, सब्जी या अचार में खा सकते हैं। ठंडे मौसम में ये खूब बढ़ती है, और गर्मी में भी सही देखभाल से उगाई जा सकती है। आइए जानते हैं कि अपने खेत में गांठ गोभी की ऑर्गेनिक खेती कैसे करें।
गांठ गोभी को समझें
गांठ गोभी का कंद गोल होता है, हल्का हरा या बैंगनी रंग का, और पौधे के तने पर जमीन से थोड़ा ऊपर बनता है। ये ठंडी फसल है, मगर सही तरीके से उगाने पर गर्मियों में भी अच्छी पैदावार देती है। इसमें विटामिन C, कैल्शियम और फाइबर भरपूर होता है, जो सेहत के लिए बढ़िया है। गाँव में इसे उगाना आसान है, क्यूंकि ये कम जगह लेती है और 60-70 दिनों में तैयार हो जाती है। ऑर्गेनिक तरीके से उगाने पर ये रसायनों से मुक्त रहती है, जो बाज़ार में 40-60 रुपये किलो तक बिक सकती है।
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खेत को ऑर्गेनिक तरीके से तैयार करें
गांठ गोभी के लिए खेत में ऐसी जगह चुनें जहाँ धूप अच्छी पड़े और पानी जमा न हो। दोमट या बलुई मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी है, जिसका pH 5.5 से 6.5 हो। खेत को जोत लें और 10-15 किलो गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट प्रति वर्ग मीटर डाल दें। रासायनिक खाद का बिल्कुल इस्तेमाल न करें। मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए हल चलाएं और खरपतवार साफ करें। क्यारियाँ बनाएं, ताकि पानी देने में आसानी हो। ठंड शुरू होने से पहले (अक्टूबर-नवंबर) या गर्मी में (फरवरी-मार्च) खेत तैयार करें।
बीज बोने का देसी तरीका
गांठ गोभी को बीज से उगाया जाता है। नर्सरी में बीज बोएं—1 मीटर चौड़ी और 3 मीटर लंबी क्यारी बनाएं। बीज को 1-2 इंच गहरा बोएं और हल्की मिट्टी से ढक दें। पौधों के बीच 20-25 सेंटीमीटर की दूरी रखें। बोने के बाद हल्का पानी छिड़कें। 25-30 दिन में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। मैदानी इलाकों में अगस्त से नवंबर और पहाड़ों में फरवरी-मार्च में बोएं। बीज को 24 घंटे पानी में भिगो दें, इससे अंकुर जल्दी निकलते हैं। रोपाई के बाद पौधों को सहारा दें।
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इसके बीज कहाँ से मिलेंगे
गांठ गोभी के बीज ढूंढना आसान है। अपने गाँव की नजदीकी नर्सरी में जाकर पूछें, वहाँ ऑर्गेनिक बीज मिल सकते हैं। अगर न मिलें, तो सरकारी कृषि केंद्र या बागवानी विभाग से संपर्क करें, जहाँ सस्ते में अच्छे बीज मिलते हैं। ऑनलाइन भी ऑर्डर कर सकते हैं – नर्सरी लाइव, उगाओ.कॉम या अमेज़न पर ये 50-100 रुपये में उपलब्ध हैं। गाँव में कोई पहले से उगा रहा हो, तो उससे थोड़े बीज माँग लें। बीज लेते वक्त देखें कि वो ताजा और रसायन-मुक्त हों, ताकि ऑर्गेनिक खेती का मज़ा बना रहे।
पानी और ऑर्गेनिक खाद का ध्यान
पहले महीने गांठ गोभी को हफ्ते में 2-3 बार पानी दें, मगर मिट्टी गीली न रखें। बारिश हो तो पानी कम करें। गोबर की खाद के साथ हर 15-20 दिन में नीम की खली, राख या वर्मी कंपोस्ट डालें। अगर कंद छोटे रहें, तो गोबर का घोल बनाकर छिड़कें। खरपतवार को हाथ से निकालें और कंद के आसपास हल्की मिट्टी चढ़ाएं। गर्मी में पानी थोड़ा बढ़ाएं, ताकि पौधा सूखे नहीं। रसायनिक दवाइयों की जगह देसी तरीके अपनाएं।
कीटों से ऑर्गेनिक बचाव
कीड़ों से बचाने के लिए नीम का तेल पानी में मिलाकर छिड़कें। लहसुन और मिर्च का घोल भी कीटों को भगाता है। अगर पत्तियाँ पीली पड़ें, तो गोबर और राख का मिश्रण डालें। पौधों को हवा मिले, इसके लिए खेत को खुला रखें। फफूंद से बचाने के लिए खेत में जल निकासी अच्छी करें। ये देसी नुस्खे पौधे को स्वस्थ रखते हैं और ऑर्गेनिक फसल देते हैं।
कटाई कब और कैसे करें
गांठ गोभी 60-70 दिन में तैयार हो जाती है। जब कंद 2-3 इंच का हो और पत्तियाँ हल्की पीली पड़ने लगें, तो कटाई करें। कंद को चाकू से काट लें। एक पौधे से 200-300 ग्राम कंद मिल सकता है। प्रति हेक्टेयर 200-300 क्विंटल तक पैदावार हो सकती है। शाम को काटें, ताकि धूप से कंद खराब न हों। ताजा बेचें या छाया में रखें।
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