Nano Urea: किसान भाइयों, खेती में अब पुराने यूरिया को भूल जाओ। नैनो यूरिया नाम की नई चीज़ बाज़ार में आ गई है, जो आपके खेतों को हरा-भरा और जेब को भरा-भरा रखेगी। ये एक खास तरल खाद है, जो पुराने दानेदार यूरिया से कहीं बेहतर काम करती है। कम लगाओ, ज़्यादा पाओ – यही इसका फंडा है। गाँव के मेहनती किसानों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं। आइए, जानते हैं कि ये नैनो यूरिया है क्या और ये आपके लिए इतना खास क्यों है।
नैनो यूरिया (Nano Urea) क्या है?
नैनो यूरिया एक तरल खाद है, जिसमें नाइट्रोजन की ताकत भरी होती है। इसमें 20% नाइट्रोजन होता है, लेकिन ये पुराने यूरिया से कई गुना ज़्यादा असरदार है। पुराना यूरिया मिट्टी में डालो, तो आधा से ज़्यादा बर्बाद हो जाता है। लेकिन नैनो यूरिया 90% तक फसल को फायदा देता है। ये पौधों की पत्तियों से सीधा सोख लिया जाता है, तो कम मात्रा में भी फसल चमकने लगती है। गेहूँ, धान, या कोई भी फसल हो, नैनो यूरिया उसकी ताकत बढ़ाता है और पैदावार को दनादन ऊपर ले जाता है।
कब और कैसे करें इस्तेमाल
नैनो यूरिया लगाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, लेकिन सही वक़्त और तरीका ज़रूरी है। अगर तुम गेहूँ या ऐसी फसलों की खेती करते हो, तो पहली बार पानी देने के बाद इसे छिड़कने की जल्दबाज़ी मत करो। छोटे पौधों पर ये ज़मीन पर गिरकर खराब हो सकता है। दूसरी या तीसरी बार पानी देने के वक़्त इसका छिड़काव करो, तब फायदा पूरा मिलेगा। एक लीटर पानी में 5 मिलीलीटर नैनो यूरिया मिलाकर स्प्रे बनाओ और पौधों की पत्तियों पर अच्छे से छिड़क दो। एक हेक्टेयर खेत के लिए 500 मिलीलीटर काफ़ी है। बस, इतने में तुम्हारी फसल लहलहा उठेगी।
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क्यों है ये किसानों का फेवरेट
नैनो यूरिया किसान भाइयों की जेब का खास ख्याल रखता है। ये पुराने यूरिया से सस्ता पड़ता है और कम मात्रा में भी ज़बरदस्त नतीजे देता है। पत्तियों से सीधे सोखे जाने की वजह से फसल की क्वालिटी चमकती है और पैदावार बढ़ती है। सबसे मज़ेदार बात, ये मिट्टी और पानी को गंदा नहीं करता। पुराना यूरिया तो ज़मीन और तालाबों को खराब कर देता है, लेकिन नैनो यूरिया पर्यावरण का दोस्त है। साथ ही, इसके इस्तेमाल से पानी की बर्बादी भी कम होती है। यानी, कम खर्च में ज़्यादा फायदा और गाँव का पर्यावरण भी साफ़।
नैनो यूरिया बनाम दानेदार यूरिया
नैनो यूरिया और दानेदार यूरिया के बीच कई अंतर हैं। नैनो यूरिया में नाइट्रोजन की मात्रा कम होने के बावजूद इसकी एफिशिएंसी अधिक होती है। यह सीधे पौधों द्वारा अवशोषित हो जाता है, जबकि दानेदार यूरिया का बड़ा हिस्सा व्यर्थ हो जाता है। इसके अलावा, नैनो यूरिया सस्ता और अधिक पर्यावरण-अनुकूल है।
पैरामीटर | नैनो यूरिया | दानेदार यूरिया |
---|---|---|
नाइट्रोजन की मात्रा | 20% | 46% |
एफिशिएंसी | लगभग 90% | लगभग 30-40% |
उपयोग की विधि | पत्तियों पर छिड़काव | मिट्टी में मिलाना |
लागत | सस्ती और प्रभावी | महंगी और कम प्रभावी |
पर्यावरण प्रभाव | कम प्रदूषण | अधिक प्रदूषण |
सावधानियां
नैनो यूरिया का उपयोग करते समय सही मात्रा और विधि का पालन करना आवश्यक है। इसे जरूरत से ज्यादा न लगाएं और बारिश के दौरान इसका छिड़काव न करें। सही समय पर और सही तरीके से उपयोग करने से यह अधिक प्रभावी होगा।
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