पशुपालक भाइयों, गर्मी में गाय-भैंस का विशेष ख्याल रखना जरूरी है, क्योंकि तापमान 35 डिग्री से ऊपर जाने पर पशु तनाव में आते हैं, जिससे दूध उत्पादन 20-50% कम हो सकता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान जैसे गर्म क्षेत्रों में देसी नुस्खे और सही देखभाल से पशुओं का स्वास्थ्य और दूध बरकरार रखा जा सकता है। देसी चीजें जैसे रिजका, जौ, चोकर, और गुड़ खिलाने से पशु तंदुरुस्त रहते हैं। कम लागत (500-1,000 रुपये/पशु/महीना) में दूध 2-3 लीटर/पशु बढ़ सकता है, जिससे 2,000-3,000 रुपये अतिरिक्त कमाई हो सकती है। आइए जानें गर्मी में देखभाल और देसी आहार।
गर्मी में पशुओं की समस्याएँ
गर्मी में गाय-भैंस को हीट स्ट्रेस, कम भूख, और निर्जलीकरण का खतरा रहता है। इससे दूध में वसा (फैट) 0.5-1% कम हो सकती है। साँस लेने की गति बढ़ती है, और पशु सुस्त हो जाते हैं। पानी की कमी से पाचन कमजोर होता है, और रोग (मुँहपका, खुरपका) बढ़ते हैं। देसी नस्लें (साहीवाल, थारपारकर) गर्मी ज्यादा सहन करती हैं, लेकिन होल्सटीन, जर्सी जैसी विदेशी नस्लों को विशेष देखभाल चाहिए। सही आहार और प्रबंधन से इन समस्याओं को 70-80% कम किया जा सकता है।
ठंडक और छाया की व्यवस्था
पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए छायादार, हवादार गोशाला जरूरी है। गोशाला में छप्पर (तिनशेड) या पेड़ों की छाया रखें। छत पर नीम, बबूल की पत्तियाँ डालें ताकि गर्मी कम हो। पंखे (500-1,000 रुपये) या फॉगर सिस्टम (5,000-10,000 रुपये) लगाएँ। दिन में 2-3 बार गोशाला में पानी छिड़कें। पशुओं को सुबह 10 बजे से पहले और शाम 4 बजे बाद चराएँ। तालाब या नहर में नहलाएँ, इससे तनाव 50% कम होता है। साफ, ठंडा पानी (20-30 लीटर/पशु/दिन) उपलब्ध रखें।
देसी आहार: स्वास्थ्य और दूध के लिए
गर्मी में पशुओं की भूख कम होती है, इसलिए पौष्टिक, हल्का आहार दें। देसी चीजें सस्ती और असरदार हैं:
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रिजका (ल्यूसर्न): प्रोटीन (18-22%) और विटामिन से भरपूर। 10-15 किलो ताजा रिजका/पशु/दिन दें। दूध 1-2 लीटर बढ़ता है। लागत 300-500 रुपये/क्विंटल।
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जौ और चोकर: जौ (1-2 किलो/पशु) और गेहूँ का चोकर (2-3 किलो) ठंडक देते हैं। पानी में भिगोकर खिलाएँ। लागत 20-30 रुपये/किलो।
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गुड़ और नमक: 100-200 ग्राम गुड़ और 50 ग्राम नमक रोज दें। भूख बढ़ती है, और निर्जलीकरण रुकता है। लागत 50-100 रुपये/किलो।
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मक्का और बाजरा साइलेज: 5-10 किलो साइलेज पाचन सुधारता है। लागत 200-300 रुपये/क्विंटल।
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नीम और बरगद की पत्तियाँ: 1-2 किलो पत्तियाँ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। मुफ्त उपलब्ध।
आहार सुबह 6-8 बजे, दोपहर 1-2 बजे, और शाम 6-7 बजे दें। 1-2 किलो खनिज मिश्रण (कैल्शियम, फॉस्फोरस) हर महीने दें। सही आहार से दूध में वसा 0.5% बढ़ती है।
पानी और नहलाने का प्रबंध
पशुओं को दिन में 4-5 बार साफ पानी पिलाएँ। पानी में 50 ग्राम नमक या 100 ग्राम गुड़ मिलाएँ ताकि इलेक्ट्रोलाइट्स बने रहें। सुबह-शाम नहलाएँ, खासकर भैंस को, क्योंकि वे गर्मी ज्यादा महसूस करती हैं। नहलाने से तनाव 30-40% कम होता है। गोशाला में पानी का गड्ढा (3×3 फीट) बनाएँ, जिसमें भैंस लेट सकें। पानी की टंकी छाया में रखें। सही जल प्रबंधन से दूध उत्पादन 10-15% बढ़ता है।
रोग और कीटों से बचाव
गर्मी में मच्छर और मक्खियाँ बढ़ती हैं, जो मुँहपका, खुरपका फैलाती हैं। गोशाला में नीम का धुआँ करें। 5 मिलीलीटर नीम तेल और 10 मिलीलीटर गोमूत्र को 1 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें। हर 15 दिन में टीकाकरण (FMD, HS) कराएँ। पशु चिकित्सक से सलाह लें। खुरों की जाँच करें, क्योंकि गीली जगह से खुर सड़न हो सकती है। जैविक उपायों से रोग 60-70% कम होते हैं।
कमाई और फायदे हिसाब
10 गाय-भैंस की देखभाल में आहार, पानी, और गोशाला की लागत 5,000-10,000 रुपये/महीना है। सही देखभाल से दूध 2-3 लीटर/पशु बढ़ता है। 40 रुपये/लीटर से 10 पशुओं से 2,000-3,000 रुपये/महीना अतिरिक्त कमाई। सालाना 24,000-36,000 रुपये/पशु मुनाफा। गोबर से वर्मी कम्पोस्ट (5,000-10,000 रुपये/टन) बेचकर आय बढ़ाएँ। बड़े स्तर (20-30 पशु) पर 5-7 लाख रुपये सालाना कमाई संभव
ताजा, साफ आहार दें। गोशाला में गंदगी न जमने दें। पशुओं को तनाव से बचाएँ। देसी नस्लें प्राथमिकता दें। NDDB या पशुपालन विभाग से मुफ्त सलाह और टीकाकरण लें। छोटे स्तर (2-5 पशु) से शुरू करें। गर्मी में देसी आहार और सही देखभाल से गाय-भैंस का दूध और स्वास्थ्य बरकरार रखें।
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