बिना पॉलीहाउस अब उगाइए चेरी टमाटर, बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित की नई किस्में

पूर्वी भारत के किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के वैज्ञानिकों ने चेरी टमाटर की ऐसी नई किस्में विकसित की हैं, जिन्हें अब पॉलीहाउस या ग्रीनहाउस की जरूरत नहीं है। ये किस्में खुले खेतों में आसानी से उगाई जा सकती हैं, जिससे छोटे और मझोले किसानों के लिए खेती की लागत कम होगी। छह साल की मेहनत और रिसर्च के बाद तैयार ये किस्में पूर्वी सिंधु-गंगा क्षेत्र की जलवायु के लिए खास तौर पर बनाई गई हैं। इस क्षेत्र में बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, और उत्तरी झारखंड जैसे इलाके शामिल हैं। इस लेख में इन नई किस्मों की खासियत, फायदे, और किसानों तक पहुंचाने की योजना के बारे में बताया गया है।

जलवायु के लिए उपयुक्त नई किस्में

पूर्वी सिंधु-गंगा क्षेत्र की जलवायु गर्म और नम है, जहां बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव आम बात है। पहले चेरी टमाटर की खेती केवल पॉलीहाउस जैसी संरक्षित तकनीकों में ही संभव थी, क्योंकि पुरानी किस्में इस क्षेत्र की जलवायु में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती थीं। लेकिन बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने लंबी रिसर्च के बाद ऐसी किस्में तैयार की हैं, जो इस जलवायु में भी अच्छी पैदावार देती हैं।

ये किस्में खुले खेतों में उगने के लिए उपयुक्त हैं, जिससे किसानों को महंगे पॉलीहाउस बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस रिसर्च का नेतृत्व सब्जी विज्ञान विभाग की वैज्ञानिक डॉ. शिरीन अख्तर और डॉ. तीर्थार्थ चट्टोपाध्याय ने किया, जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. राजेश कुमार ने भी सहयोग दिया। कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह और निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह के मार्गदर्शन में ये प्रोजेक्ट पूरा हुआ।

चेरी टमाटर की खासियत

चेरी टमाटर आकार में छोटे होते हैं, लेकिन ये दिखने में रंग-बिरंगे और आकर्षक होते हैं। इनका स्वाद हल्का मीठा होता है, और ये सलाद, सूप, या कच्चे खाने के लिए बहुत पसंद किए जाते हैं। इनकी शेल्फ लाइफ भी अच्छी होती है, यानी इन्हें लंबे समय तक रखा जा सकता है। शहरी बाजारों में इनकी भारी मांग है, और निर्यात के लिए भी ये अच्छा विकल्प हैं। इनकी ऊंची कीमत और बहुमुखी उपयोगिता के कारण किसानों के लिए ये फसल मुनाफे का सौदा है। नई किस्में इस क्षेत्र की मिट्टी और मौसम के हिसाब से तैयार की गई हैं, जिससे पैदावार बढ़ेगी और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

खुले खेतों में खेती के फायदे

पहले चेरी टमाटर की खेती के लिए पॉलीहाउस जरूरी था, जिसका खर्च छोटे किसानों के लिए भारी पड़ता था। पॉलीहाउस बनाने और उसकी देखभाल में हजारों रुपये खर्च हो जाते थे, जिसके कारण ये खेती बड़े किसानों या कंपनियों तक सीमित थी। लेकिन BAU की नई किस्मों ने इस बाधा को खत्म कर दिया है। अब आम किसान भी अपने खेतों में चेरी टमाटर उगा सकते हैं। ये किस्में पूर्वी गंगा के मैदानी क्षेत्रों की गर्मी, नमी, और बारिश को सहन कर सकती हैं। इससे खेती की लागत कम होगी, और छोटे किसानों को भी अच्छा मुनाफा कमाने का मौका मिलेगा।

किसानों तक पहुंचाने की योजना

बिहार कृषि विश्वविद्यालय अब इन नई किस्मों को किसानों तक पहुंचाने के लिए तेजी से काम कर रहा है। इसके लिए अलग-अलग जलवायु वाले इलाकों में मल्टी-लोकेशन ट्रायल किए जा रहे हैं, ताकि ये पक्का हो सके कि ये किस्में हर तरह के खेतों में अच्छा प्रदर्शन करेंगी। साथ ही, इन टमाटरों की पोषण गुणवत्ता और फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं पर भी रिसर्च की जा रही है, ताकि बाजार में इनकी मांग और कीमत बढ़े।

विश्वविद्यालय निजी बीज कंपनियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), और एग्री-स्टार्टअप्स के साथ मिलकर इन किस्मों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की योजना बना रहा है। इससे किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज आसानी से मिल सकेंगे, और उनकी फसल को बाजार में सही दाम मिलेगा।

सतत खेती की दिशा में कदम

ये नई किस्में न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाएंगी, बल्कि सतत खेती को भी बढ़ावा देंगी। डॉ. ए.के. सिंह के अनुसार, ये रिसर्च विज्ञान और पर्यावरण के बीच तालमेल का बेहतरीन उदाहरण है। चेरी टमाटर की खेती से जल, जमीन, और अन्य संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा। साथ ही, ये फसल खेती में विविधता लाएगी, जिससे किसानों को आय के नए रास्ते मिलेंगे। ये किस्में छोटे किसानों के लिए खास तौर पर फायदेमंद हैं, क्योंकि ये कम लागत में ज्यादा मुनाफा दे सकती हैं। पूर्वी भारत के किसानों के लिए ये एक नया अवसर है, जो उनकी मेहनत को और फलदायी बनाएगा।

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  • Rahul Maurya

    मेरा नाम राहुल है। मैं उत्तर प्रदेश से हूं और मैंने संभावना इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है। मैं Krishitak.com का संस्थापक और प्रमुख लेखक हूं। पिछले 3 वर्षों से मैं खेती-किसानी, कृषि योजनाएं, और ग्रामीण भारत से जुड़े विषयों पर लेखन कर रहा हूं।

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