Subsidy On Micro Irrigation: किसान भाइयों, खेती में मेहनत तो आप बरसों से कर रहे हैं, लेकिन अब समय है स्मार्ट खेती का। उत्तर प्रदेश सरकार आपके लिए एक ऐसी योजना लाई है, जो आपके खेतों को हरा-भरा रखेगी और पानी की हर बूँद को कीमती बनाएगी। इस योजना का नाम है माइक्रो इरिगेशन। इसके जरिए आप ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक तकनीकों से सिंचाई कर सकते हैं। इससे न सिर्फ पानी बचेगा, बल्कि फसल की पैदावार बढ़ेगी और आपकी जेब भी भरेगी। आइए, जानें कि यह तकनीक कैसे आपके खेतों में कमाल कर सकती है।
माइक्रो इरिगेशन क्या है?
माइक्रो इरिगेशन का मतलब है खेतों में पानी को सोच-समझकर इस्तेमाल करना। पुराने तरीकों में पानी खेत में बिखर जाता था, लेकिन ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम पानी को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचाते हैं। इससे पानी की बर्बादी रुकती है और फसल को उतना ही पानी मिलता है, जितना जरूरी है। आजमगढ़ के रामलाल जी ने पिछले साल ड्रिप इरिगेशन लगवाया। वो बताते हैं, “पहले मेरे खेत में पानी की कमी से फसल मुरझा जाती थी। अब ड्रिप सिस्टम से हर पौधे को पानी मिलता है, और मेरी फसल पहले से दोगुनी हो गई।” आप भी इस तकनीक को अपनाकर अपनी खेती को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं।
65 से 90 फीसदी अनुदान
उत्तर प्रदेश सरकार आपके लिए माइक्रो इरिगेशन को आसान बनाने के लिए पूरी मदद कर रही है। ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के तहत सरकार 65 से 90 फीसदी तक अनुदान दे रही है। इस साल 2025-26 के लिए आजमगढ़ में 1970 हेक्टेयर खेतों में ड्रिप इरिगेशन, मिनी स्प्रिंकलर, पोर्टेबल स्प्रिंकलर, और रेनगन स्प्रिंकलर लगाने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि लघु और सीमांत किसानों को 90 फीसदी तक अनुदान मिलेगा, जबकि अन्य किसानों को 80 फीसदी। अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों के लिए भी खास प्रावधान हैं, जिनके लिए 433 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया है।
यह अनुदान लेने के लिए आपको UPMIP पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। पंजीकरण की प्रक्रिया आसान है, और यह पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर काम करती है। अगर आप जल्दी आवेदन करेंगे, तो इस योजना का फायदा जरूर मिलेगा। अपने नजदीकी उद्यान विभाग के दफ्तर से संपर्क करें, वो आपको हर कदम पर मदद करेंगे।
माइक्रो इरिगेशन के फायदे
माइक्रो इरिगेशन का सबसे बड़ा फायदा है पानी की बचत। ड्रिप सिस्टम से पानी बूँद-बूँद करके पौधों तक जाता है, जिससे 50-70 फीसदी पानी बचता है। इसके अलावा, फसल को सही समय पर सही मात्रा में पानी मिलने से पैदावार बढ़ती है। स्प्रिंकलर सिस्टम उन फसलों के लिए बढ़िया है, जिन्हें बौछार की जरूरत होती है। हमारे गाँव के श्याम भाई ने मिनी स्प्रिंकलर लगवाया और उनकी सब्जियों की फसल ने कमाल कर दिया। वो कहते हैं, “पहले पानी की कमी से आधा खेत सूख जाता था। अब स्प्रिंकलर से हर कोना हरा-भरा है।”
यह तकनीक न सिर्फ फसल की क्वालिटी बढ़ाती है, बल्कि मेहनत और खर्च भी कम करती है। कीटनाशक और खाद भी कम लगते हैं, क्योंकि पानी के साथ ये सीधे जड़ों तक पहुँचते हैं। इससे आपकी जेब पर बोझ कम होगा और मुनाफा ज्यादा।
सब्जी की खेती में भी अनुदान
अगर आप टमाटर, शिमला मिर्च, मसाला मिर्च, या खरीफ प्याज की खेती करते हैं, तो आपके लिए और खुशखबरी है। सरकार ने इन फसलों के लिए 45 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा है, और लागत का 75 से 90 फीसदी तक अनुदान दे रही है। इसके लिए आपको www.dbt.uphorticulture.in पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। आवेदन करने के बाद हार्ड कॉपी 15 दिनों के अंदर उद्यान विभाग के दफ्तर में जमा कर दें। यह योजना आपकी सब्जी की खेती को और फायदेमंद बनाएगी।
स्मार्ट खेती की ओर कदम बढ़ाएँ
किसान भाइयों, खेती सिर्फ मेहनत का नाम नहीं, बल्कि स्मार्ट सोच का भी खेल है। माइक्रो इरिगेशन जैसी तकनीकें अपनाकर आप पानी, समय, और पैसे की बचत कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार आपके साथ है, और यह अनुदान आपके खेतों को नई ताकत देगा। देर न करें, आज ही अपने नजदीकी उद्यान विभाग के दफ्तर जाएँ, पंजीकरण कराएँ, और इस योजना का फायदा उठाएँ। आपके खेत हरे-भरे हों, और आपकी कमाई बढ़े, यही हमारी शुभकामना है।
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