भारत में तिल की खेती ना सिर्फ किसानों की आय बढ़ाती है, बल्कि खाद्य तेल की जरूरत को पूरा करने में भी बड़ी भूमिका निभाती है। केंद्र सरकार तिल जैसी तिलहन फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएँ चला रही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स-ऑयलसीड्स के तहत किसानों को कई तरह की सब्सिडी दी जा रही है। अगर आप तिल की खेती शुरू करना चाहते हैं, तो ये योजनाएँ आपके लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने का रास्ता खोल सकती हैं। बीज, उर्वरक, कीटनाशक, और मशीनरी पर सब्सिडी के साथ सरकार किसानों का बोझ कम कर रही है।
बीज और उर्वरक पर सब्सिडी का लाभ
तिल की खेती में सबसे जरूरी है अच्छी क्वालिटी के बीज। सरकार ने इसे सस्ता और सुलभ बनाने के लिए बीज सब्सिडी की व्यवस्था की है। बिहार में किसानों को तिल के बीज पर 80 फीसदी तक सब्सिडी मिलती है, यानी आपको सिर्फ 20 फीसदी कीमत चुकानी पड़ती है। उत्तर प्रदेश के अमेठी जैसे जिलों में 10 साल से कम पुराने बीजों पर 20 से 30 फीसदी और 10 साल से ज्यादा पुराने बीजों पर 40 से 50 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा, जैविक उर्वरक और वर्मी कम्पोस्ट पर भी छूट मिलती है। मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में तिलहन के लिए विशेष योजनाएँ चल रही हैं, जो जैविक खाद और उर्वरक पर 50 फीसदी तक सब्सिडी देती हैं।
आधुनिक खेती के लिए मशीनरी का होना जरूरी है, लेकिन छोटे किसानों के लिए ये महँगी पड़ती है। सरकार ने इस समस्या को समझा और तिल की खेती के लिए मशीनों पर 40 से 60 फीसदी तक सब्सिडी देने की व्यवस्था की। थ्रेसर, पावर वीडर, सीड ड्रिल, और स्प्रेयर जैसे उपकरणों पर ये छूट मिलती है। उदाहरण के लिए, राजस्थान में राजकिसान साथी पोर्टल के जरिए किसान 50 फीसदी सब्सिडी पर मशीनें खरीद सकते हैं। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी स्माम किसान योजना के तहत 50 से 80 फीसदी तक अनुदान मिलता है। अगर आप मशीन खरीदना चाहते हैं, तो अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क करें।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन का योगदान
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन तिलहन फसलों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस मिशन का लक्ष्य तिल, सरसों, मूंगफली, और सोयाबीन जैसी फसलों की पैदावार बढ़ाना है। इसके तहत किसानों को उन्नत बीज, प्रशिक्षण, और कीट प्रबंधन की सलाह दी जाती है। मिशन के तहत तिल की खेती के लिए क्लस्टर बनाए गए हैं, जहाँ किसानों को मुफ्त बीज और तकनीकी सहायता मिलती है। ये मिशन 2024-25 से 2030-31 तक 10,103 करोड़ रुपये के बजट के साथ चल रहा है। इससे आयातित खाद्य तेल पर भारत की निर्भरता 57 फीसदी से घटकर 28 फीसदी तक लाने का लक्ष्य है।
नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स-ऑयलसीड्स तिल की खेती को और मजबूत करने के लिए शुरू किया गया है। इस मिशन के तहत किसानों को तिल के उन्नत बीज मुफ्त दिए जा रहे हैं। साथ ही, सूरजमुखी, मूंगफली, और सरसों जैसी फसलों के लिए भी प्रोत्साहन मिल रहा है। मिशन में किसान उत्पादक संगठनों और सहकारी समितियों को जोड़ा गया है, जो बीज और मशीनों की खरीद में मदद करते हैं। अगर आप इस मिशन का फायदा लेना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से जानकारी लें।
न्यूनतम समर्थन मूल्य का फायदा
सरकार ने तिल की फसल को बेचने में किसानों की मदद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। 2023-24 में तिल का एमएसपी 8,635 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 2024-25 में बढ़कर 9,267 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इससे किसानों को बाजार में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलती है और उनकी मेहनत का सही दाम मिलता है। अगर आप तिल की खेती करते हैं, तो एमएसपी का फायदा उठाने के लिए स्थानीय मंडी या सहकारी समितियों से संपर्क करें।
प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता
कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र समय-समय पर तिल की खेती के लिए प्रशिक्षण आयोजित करते हैं। इनमें नई तकनीकों, जैविक कीटनाशकों, और ड्रिप सिंचाई जैसे तरीकों की जानकारी दी जाती है। मध्य प्रदेश में जायद सीजन के लिए तिल की किस्में जैसे टीकेजी-22 और जेटीएस-8 की सलाह दी जाती है। साथ ही, ड्रिप सिंचाई और जैविक खाद के इस्तेमाल से पैदावार बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। ये प्रशिक्षण किसानों को कम लागत में ज्यादा उत्पादन करने में मदद करते हैं।
सब्सिडी कैसे लें
अगर आप तिल की खेती के लिए सब्सिडी लेना चाहते हैं, तो अपने जिले के कृषि विभाग कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें। आधार कार्ड, जमाबंदी की नकल, और बैंक खाता विवरण जैसे दस्तावेज तैयार रखें। कई राज्यों में ऑनलाइन पोर्टल जैसे राजकिसान साथी या एमपी कृषि पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद कृषि अधिकारी आपके खेत और दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे, फिर सब्सिडी सीधे आपके खाते में आएगी।
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