देशभर में नकली खाद-बीज का जाल! 16 राज्यों में सप्लाई, 22 फैक्ट्री सीज, 12 अफसर सस्पेंड और 20 FIR दर्ज

Fake fertilizer Seed scam: राजस्थान सरकार ने नकली खाद, बीज, और कीटनाशक बनाने वाले माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है। पिछले 14 दिनों में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने स्वयं छापेमारी का नेतृत्व किया, जिसमें 40 कंपनियों का निरीक्षण किया गया। इनमें से 20-22 फैक्ट्रियों को सीज कर दिया गया है। किशनगढ़ में 20 FIR दर्ज की गई हैं, और मिलीभगत के आरोप में कृषि विभाग के 12 अधिकारियों को निलंबित किया गया है। मंत्री मीणा ने बताया कि इन नकली उत्पादों की सप्लाई राजस्थान से 16 राज्यों में हो रही थी, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा था। यह कार्रवाई किसानों के हितों की रक्षा और खेती की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

किशनगढ़ में नकली डीएपी और एसएसपी का खुलासा

किशनगढ़ के अजमेर क्षेत्र में छापेमारी के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कई फैक्ट्रियाँ नकली डीएपी (डायमोनियम फॉस्फेट), एनपीके, और एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) जैसे उर्वरक तैयार कर रही थीं। इनमें मार्बल पाउडर, मिट्टी, और रंगीन रसायनों का उपयोग किया जा रहा था। उदयपुर कलाँ, टिलोनिया, और नालू जैसे गाँवों में स्थित इन इकाइयों से लगभग 2,800 मीट्रिक टन नकली खाद जब्त की गई। किशनगढ़ में 20 FIR दर्ज की गईं, और आठ इकाइयों को फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985 की धारा 28(1)(d) के तहत सील कर दिया गया। सैंपल जाँच के लिए भेजे गए हैं, और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। यह खुलासा दर्शाता है कि नकली खाद का कारोबार कितना संगठित था।

श्रीगंगानगर में नकली बीज की फैक्ट्रियाँ पकड़ी गईं

3 और 4 जून 2025 को श्रीगंगानगर के RIICO औद्योगिक क्षेत्र में 14 बीज उत्पादक इकाइयों पर छापेमारी की गई। शंकर सीड्स, शक्ति सीड्स, और हार्वेस्टर फूड जैसी कंपनियों में भारी अनियमितताएँ पाई गईं। यहाँ पुराने और खराब बीजों को नए बैग में पैक किया जा रहा था, और उन्हें आकर्षक बनाने के लिए हानिकारक रंगों का उपयोग हो रहा था। एक फैक्ट्री में हरे रसायन से भरे ड्रम मिले, जो बीजों को रंगने के लिए इस्तेमाल हो रहे थे। इन नकली बीजों से फसल की पैदावार कम होने और किसानों को आर्थिक नुकसान का खतरा था। कृषि मंत्री ने इन इकाइयों को सील करने और FIR दर्ज करने के आदेश दिए।

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जयपुर में प्रतिबंधित कीटनाशक बरामद

11 जून 2025 को जयपुर के बगरू और VKI औद्योगिक क्षेत्रों में छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में प्रतिबंधित रसायन ‘फोरेट’ बरामद किया गया। यह रसायन भारत सरकार द्वारा कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत प्रतिबंधित है, क्योंकि यह मिट्टी और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। मंत्री मीणा ने आधी रात तक इस ऑपरेशन की निगरानी की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इस छापेमारी ने नकली कीटनाशकों के अवैध कारोबार को उजागर किया, जो राजस्थान के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी फैला हुआ था।

12 अधिकारियों पर गिरी गाज

छापेमारी के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कुछ कृषि विभाग के अधिकारी नकली माफियाओं के साथ मिले हुए थे। मंत्री मीणा ने बताया कि 12 अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इनमें से नौ अधिकारियों को किशनगढ़ में कार्रवाई के लिए भेजा गया था, लेकिन उन्होंने जानबूझकर लापरवाही बरती। वहीं, तीन अधिकारियों को जयपुर में छापेमारी करनी थी, लेकिन उन्होंने अपने फोन बंद कर लिए। इन अधिकारियों की मिलीभगत ने नकली कारोबार को बढ़ावा दिया, जिसके चलते किसानों को नकली उत्पादों से नुकसान हुआ। निलंबन के साथ-साथ इनके खिलाफ आगे की जाँच जारी है।

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16 राज्यों में नकली उत्पादों की सप्लाई

कृषि मंत्री ने खुलासा किया कि राजस्थान से नकली खाद, बीज, और कीटनाशकों की सप्लाई 16 राज्यों, जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, और पंजाब में हो रही थी। मध्य प्रदेश के खरगौन में पुलिस ने एक ट्रक पकड़ा, जिसमें नकली जिप्सम भरा था। ये नकली उत्पाद न केवल फसलों को नुकसान पहुँचा रहे थे, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और किसानों की आजीविका को भी खतरे में डाल रहे थे। मंत्री मीणा ने कहा कि किसानों की लगातार शिकायतों के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई, और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

किसानों के लिए सलाह और भविष्य की कार्रवाई

कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे केवल सरकार द्वारा प्रमाणित दुकानों या विश्वसनीय डीलरों से ही खाद, बीज, और कीटनाशक खरीदें। नकली उत्पादों की शिकायत तुरंत स्थानीय कृषि विभाग में दर्ज करें। राजस्थान कृषि विभाग ने 15 मई से 10 जुलाई 2025 तक खरीफ सीजन के लिए विशेष गुणवत्ता नियंत्रण अभियान शुरू किया है। इस दौरान पूरे राज्य में 277 अन्य इकाइयों की जाँच की जाएगी। अब तक 1,464 सैंपल लिए गए हैं, जिनमें से 136 नकली पाए गए। दोषियों के खिलाफ फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985 और एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट, 1955 के तहत कार्रवाई हो रही है।

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  • Rahul Maurya

    मेरा नाम राहुल है। मैं उत्तर प्रदेश से हूं और मैंने संभावना इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है। मैं Krishitak.com का संस्थापक और प्रमुख लेखक हूं। पिछले 3 वर्षों से मैं खेती-किसानी, कृषि योजनाएं, और ग्रामीण भारत से जुड़े विषयों पर लेखन कर रहा हूं।

    Krishitak.com के माध्यम से मेरा उद्देश्य है कि देशभर के किसानों तक सटीक, व्यावहारिक और नई कृषि जानकारी आसान भाषा में पहुँचे। मेरी कोशिश रहती है कि हर लेख पाठकों के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी साबित हो, जिससे वे खेती में आधुनिकता और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकें।

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