जानें क्यों पाकिस्तान में घटने लगा सिंधु जल का प्रवाह, ठप होने लगी खरीफ की खेती, सिंध-पंजाब में हाहाकार

Indus Water Flow Decreasing In Pakistan: पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु नदी के पानी में कटौती की है। इससे पाकिस्तान के सिंध प्रांत में फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है। पानी के बिना खेती की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन, पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांतों में आज यही हाल है। सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद भारत ने सिंधु नदी और इसकी सहायक नदियों के पानी के बहाव में कटौती शुरू कर दी है। इसका सबसे बड़ा असर पाकिस्तान की खेती पर पड़ रहा है, खासकर खरीफ फसलों की बुआई के इस मौसम में। सिंध के किसान पानी की कमी से परेशान हैं, तो पंजाब में भी हालात चिंताजनक हैं।

सिंधु जल संधि का इतिहास

सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी, जिसे विश्व बैंक ने मध्यस्थता करके लागू करवाया। यह संधि सिंधु नदी और इसकी छह सहायक नदियों – रावी, ब्यास, सतलुज, सिंधु, झेलम, और चिनाब – के पानी के बँटवारे को नियंत्रित करती है। संधि के अनुसार, भारत को पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) पर पूरा अधिकार है, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का 80% पानी (लगभग 135 मिलियन एकड़ फीट) मिलता है। यह संधि तीन युद्धों और कई तनावों के बावजूद 65 साल तक चली। लेकिन, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोग मारे गए, के बाद भारत ने इसे निलंबित कर दिया।

ये भी पढ़ें – UP: खेती अब सिर्फ गुज़ारा नहीं, कारोबार बनेगी! किसानों को मिलेगा सस्ता कर्ज, भंडारण-मार्केटिंग की भी मिलेगी मजबूत सुविधा

निलंबन का कारण और भारत का रुख

पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया, जिसे पाकिस्तान ने खारिज किया। भारत ने न सिर्फ संधि को निलंबित किया, बल्कि चिनाब नदी पर बगलिहार बांध से पानी रोकने और डेटा साझा करना बंद करने जैसे कदम उठाए। भारत के जल संसाधन मंत्री चंद्रकांत रघुनाथ पाटिल ने कहा, “पाकिस्तान को सिंधु का एक बूंद पानी नहीं मिलेगा।” भारत ने रावी नदी का पानी भी मार्च 2025 में पूरी तरह रोक दिया था। यह कदम पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि वह अपनी 80% सिंचाई के लिए इन नदियों पर निर्भर है।

सिंध प्रांत में खरीफ फसलों पर असर

पाकिस्तान सरकार की इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 16 जून 2025 को सिंध प्रांत को सिंधु नदी से सिर्फ 1.33 लाख क्यूसेक पानी मिला, जबकि पिछले साल इसी दिन 1.6 लाख क्यूसेक पानी मिला था। यह 17% की कमी है। सिंध, जो पहले से ही पानी की कमी और समुद्री जल के घुसपैठ से जूझ रहा है, अब खरीफ फसलों (धान, कपास, गन्ना) की बुआई में मुश्किलों का सामना कर रहा है। किसान नदीम शाह, जिनके पास सिंध में 150 एकड़ खेत हैं, कहते हैं, “अगर पानी नहीं मिला, तो हमारा खेत थार रेगिस्तान बन जाएगा।

पंजाब प्रांत की चुनौतियाँ

पाकिस्तान का पंजाब प्रांत, जो देश का 85% खाद्यान्न पैदा करता है, भी पानी की कमी से प्रभावित है। IRSA के अनुसार, इस साल पंजाब को 1.26 लाख क्यूसेक पानी मिला, जबकि पिछले साल 1.29 लाख क्यूसेक मिला था। यह 2.25% की कमी है। यह कमी छोटी लग सकती है, लेकिन खरीफ फसलों (गेहूँ, चावल, गन्ना) के लिए यह बड़ी मुसीबत है। पंजाब और सिंध के बीच पहले से ही पानी बँटवारे को लेकर तनाव है। पंजाब में छह नहरों के निर्माण की योजना, जैसे चोलिस्तान नहर, को सिंध के विरोध के कारण रोकना पड़ा। पानी की कमी से अंतर-प्रांतीय विवाद और बढ़ सकते हैं।

ये भी पढ़ें – अमेरिका के साथ आयात शुल्क घटाने और खरीद नीति पर गरजे किसान नेता चढूनी, सरकार को दी खुली चेतावनी

पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था पर खतरा

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान 24% है, और 37% रोजगार इसी से आता है। सिंधु नदी और इसकी सहायक नदियाँ 80% सिंचाई और एक-तिहाई जलविद्युत उत्पादन के लिए जरूरी हैं। पानी की कमी से न सिर्फ खेती, बल्कि बिजली उत्पादन और शहरों की पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। कराची, लाहौर, और मुल्तान जैसे शहर नदियों पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पानी का प्रवाह और कम हुआ, तो खाद्य संकट और आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है। पाकिस्तान पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहा है, और प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता तेजी से घट रही है।

भारत की सीमाएँ और भविष्य

भारत के पास अभी इतनी बुनियादी सुविधाएँ नहीं हैं कि वह पश्चिमी नदियों के सारे पानी को रोक ले। बांधों की भंडारण क्षमता सीमित है, और नए बांध बनाने में 4-7 साल लग सकते हैं। हालांकि, भारत डेटा साझा न करके और बांधों से पानी की रिहाई को नियंत्रित करके पाकिस्तान पर दबाव बना सकता है। यह रणनीति खरीफ और रबी दोनों फसलों को प्रभावित कर सकती है। भारत के इस कदम से बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में भी चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि वे भी भारत के साथ जल संधियों पर निर्भर हैं।

ये भी पढ़ें – खेती में करें इन आधुनिक ड्रोन का इस्तेमाल, बचाएं समय और लागत, कमाई होगी दोगुनी

Author

  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

    View all posts

Leave a Comment