Urad Ki Kheti: आलू की खुदाई के बाद खेत खाली हो जाते हैं और किसान भाई अक्सर सोचते हैं कि अगली फसल क्या लगाएं जो जल्दी तैयार हो, कम पानी में चल जाए और अच्छी कमाई दे। ऐसे में उड़द (Black Gram) की खेती एक बहुत अच्छा विकल्प है। आलू की फसल के बाद खाली खेत में उड़द की बुवाई करके किसान भाई अतिरिक्त आय कमा सकते हैं। खास तौर पर NSC की T-9 वैरायटी के उत्तम बीज से बेहतरीन क्वालिटी और भरपूर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। ये वैरायटी पुरानी और भरोसेमंद है, जो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों में बहुत लोकप्रिय है।
T-9 उड़द वैरायटी की मुख्य विशेषताएं
T-9 वैरायटी एक प्रारंभिक (early maturing) किस्म है, जो 75 से 85 दिन में तैयार हो जाती है। ये वैरायटी सीधी खड़ी होने वाली (erect growth habit) होती है, पौधे की ऊंचाई 30-40 सेमी तक रहती है। दाने मध्यम आकार के, काले चमकीले और अच्छी क्वालिटी के होते हैं। ये वैरायटी सूखा सहन करने वाली है और रेनफेड (बारिश पर निर्भर) तथा सिंचित दोनों स्थितियों में अच्छी पैदावार देती है।
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कई किसान भाई बताते हैं कि T-9 से प्रति हेक्टेयर 10 से 15 क्विंटल तक पैदावार आसानी से मिल जाती है। अगर अच्छी देखभाल की जाए, तो 18-20 क्विंटल तक उत्पादन संभव है। ये वैरायटी येलो मोज़ेक वायरस (YMV) और अन्य सामान्य रोगों के प्रति मध्यम प्रतिरोधक क्षमता रखती है, जिससे स्प्रे का खर्च कम होता है। दाने की क्वालिटी अच्छी होने से दाल बनाने में कम फाइबर और ज्यादा प्रोटीन मिलता है, जो बाजार में अच्छा दाम देता है।
आलू की खुदाई के बाद T-9 उड़द की बुवाई क्यों फायदेमंद
उत्तर प्रदेश में आलू की फसल की खुदाई अक्सर फरवरी-मार्च में पूरी हो जाती है। उसके बाद खेत में मार्च-अप्रैल में उड़द की बुवाई की जा सकती है। T-9 जैसी अगेती वैरायटी 75-85 दिन में तैयार हो जाती है, यानी जून तक फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इस समय खेत में गर्मी बढ़ती है, लेकिन उड़द कम पानी में चलती है और गर्मी सहन कर लेती है। आलू के बाद खेत में बची नाइट्रोजन और जैविक पदार्थ उड़द को अच्छा पोषण देते हैं, जिससे पैदावार बढ़ जाती है।
ये बुवाई रबी के बाद जायद सीजन में अतिरिक्त फसल के रूप में की जाती है। इससे खेत साल भर उत्पादक रहता है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और किसान की आय में 20-30 हजार रुपये प्रति एकड़ तक का इजाफा हो सकता है। उड़द की फसल मिट्टी में नाइट्रोजन फिक्स करती है, जो अगली फसल (जैसे धान या बाजरा) के लिए फायदेमंद साबित होती है।
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बड़े पैमाने पर खेती के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
आलू की खुदाई के बाद खेत को साफ करें और हल्की जुताई करें। मिट्टी में 5-8 टन गोबर खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डालें। उड़द कम उपजाऊ मिट्टी में भी चलती है, लेकिन अच्छी तैयारी से पैदावार ज्यादा मिलती है।
बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर 20-25 किलो काफी होती है। NSC से प्रमाणित T-9 बीज लें, ताकि अंकुरण दर अच्छी रहे। बीज को थिरम या कैप्टान (2 ग्राम प्रति किलो) से उपचारित करें। बुवाई के लिए पंक्ति से पंक्ति 30-45 सेमी और पौधे से पौधे 10 सेमी दूरी रखें। बुवाई मार्च के पहले या दूसरे सप्ताह में करें।
सिंचाई हल्की रखें। पहली सिंचाई बुवाई के 15-20 दिन बाद। फूल आने पर पानी थोड़ा बढ़ाएं, लेकिन ज्यादा न होने दें। खाद के लिए बेसल में 20-25 किलो नाइट्रोजन, 40-50 किलो फॉस्फोरस और 20-30 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर डालें। टॉप ड्रेसिंग में बाकी नाइट्रोजन दें।
कीट-रोग प्रबंधन के लिए YMV से बचाव के लिए नीम आधारित स्प्रे या जैविक दवाएं इस्तेमाल करें। फ्रूट बोरर या एफिड्स के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाएं। तुड़ाई जब फलियां 80-90 प्रतिशत पक जाएं, तब करें। ज्यादा देर छोड़ने से दाने फट सकते हैं। अच्छी पैदावार से 10-15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मिल सकती है। बाजार में भाव 80-120 रुपये किलो तक रहता है, तो अच्छा मुनाफा होता है।
NSC से प्रमाणित T-9 बीज कैसे प्राप्त करें
NSC सरकारी कंपनी है, इसलिए बीज प्रमाणित, उच्च अंकुरण दर वाले और भरोसेमंद मिलते हैं। T-9 उड़द के 5 किलो पैकेट मात्र 866 रुपये में उपलब्ध है। बड़े पैमाने पर खेती के लिए ज्यादा मात्रा में ऑर्डर कर सकते हैं। ऑनलाइन ऑर्डर करने के लिए लिंक: https://mystore.in/en/product/nsc-black-gram-t-9-certified-seeds-5-kgs-3
भाइयो, आलू की खुदाई के बाद खाली खेत में T-9 उड़द की बुवाई करके अतिरिक्त आय कमाएं। ये वैरायटी उत्तम क्वालिटी देती है, भरपूर उत्पादन देती है और कम खर्च में ज्यादा कमाई कराती है।
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