अब बिना सूरज रौशनी में भी होगी सब्जीयों और फूलों की खेती, होगा तगड़ा मुनाफा

Artificial Photosynthesis Farming : किसान भाइयों, खेती में नई तकनीक का नाम सुनते ही मन में सवाल उठता है कि ये हमारे काम कैसे आएगी। आज बात करते हैं कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण की, जो सूरज की रोशनी को नकल करके पौधों को बढ़ने में मदद करता है। ये कोई जादू नहीं, बल्कि विज्ञान का ऐसा कमाल है जो गाँव के खेतों में भी फसल की पैदावार बढ़ा सकता है। सूरज की रोशनी से पौधे अपना खाना बनाते हैं, इसे तो हम सब जानते हैं, लेकिन जब मौसम खराब हो या धूप कम पड़े, तब ये तकनीक हमारे लिए संजीवनी बन सकती है। आइए, इसे आसान भाषा में समझें कि ये क्या है और हमारे लिए कैसे फायदेमंद हो सकता है।

कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण का मतलब समझें

अब ये कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण है क्या? आसान शब्दों में कहें तो ये सूरज की रोशनी की तरह काम करने वाली खास बत्तियाँ हैं, जो पौधों को वो ताकत देती हैं जो उन्हें धूप से मिलती है। पौधे धूप में क्लोरोफिल की मदद से हवा की कार्बन डाइऑक्साइड और पानी को अपने खाने में बदलते हैं। जब सूरज की रोशनी न मिले, तो वैज्ञानिकों ने LED लाइट्स बनाईं, जो लाल और नीले रंग की रोशनी छोड़ती हैं। ये रोशनी पौधों के लिए सबसे जरूरी होती है। गाँव में बिजली की दिक्कत हो तो सूरज की रोशनी से चलने वाली छोटी बैटरी भी इसका जुगाड़ कर सकती है। ये तकनीक खेतों को सालभर हरा-भरा रखने का रास्ता खोलती है।

खेती में इसका इस्तेमाल कैसे करें

अब सवाल ये है कि इसे खेत में कैसे लाएँ। मान लीजिए, आपके पास छोटा सा खेत है या घर की छत पर सब्जियाँ उगाने का शौक है। वहाँ पर आप बैंबू या लकड़ी का ढाँचा बना सकते हैं और उस पर ये खास LED बत्तियाँ लगा दें। सर्दियों में जब धूप कम होती है या बरसात में बादल छाए रहते हैं, तब ये बत्तियाँ चालू करें। धान, गेहूँ, या सब्जियों जैसे पालक, टमाटर की बेल को ये रोशनी देकर देखें, फर्क अपने आप दिखेगा। गाँव में पुराने लोग कहते हैं कि पौधों को प्यार और देखभाल चाहिए, तो थोड़ी मेहनत से ये तकनीक आपकी फसल को दोगुना कर सकती है। शुरू में थोड़ा खर्चा लगेगा, लेकिन फायदा लंबा चलेगा।

मौसम की मार से बचाव

गाँव में खेती का सबसे बड़ा दुश्मन है मौसम की मार। कभी बारिश ज्यादा, कभी सूखा, तो कभी कोहरा। कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण इस परेशानी को कम करता है। जिन इलाकों में सूरज कम निकलता है, वहाँ ये तकनीक पौधों को जिंदा रखती है। मान लीजिए, आप टमाटर या मिर्च उगा रहे हैं और बारिश ने धूप छीन ली। ऐसे में इन बत्तियों को कुछ घंटे चलाएँ, पौधे फिर से हरे-भरे हो जाएँगे। गाँव में नीम के तेल से कीड़े भगाने का नुस्खा तो चलता ही है, अब इस रोशनी से फसल को ताकत भी दे सकते हैं। ये तरीका खेती को मौसम के भरोसे से आजाद करने का रास्ता है।

फायदा और कमाई का हिसाब

अब बात करते हैं फायदे की। इस(Artificial Photosynthesis Farming) तकनीक से फसल जल्दी तैयार होती है और पैदावार भी बढ़ती है। एक छोटे खेत में अगर आप 50-60 हज़ार रुपये लगाकर ये बत्तियाँ और ढाँचा बनाएँ, तो सालभर में सब्जियों या फूलों से लाखों की कमाई हो सकती है। मंडी में अच्छा भाव मिले, तो मेहनत वसूल हो जाएगी। गाँव में बिजली की कमी हो तो सोलर पैनल का जुगाड़ करें, इससे खर्चा भी कम होगा। साथ ही, फसल जल्दी तैयार होने से बाजार में जल्दी पहुँचकर ज्यादा दाम मिल सकता है। ये तकनीक मेहनतकश किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आती है।

गाँव के लिए आसान तरकीब

गाँव में इसे अपनाने के लिए बड़े खर्चे की जरूरत नहीं। शुरू में छोटे पैमाने पर आजमाएँ। जैसे, घर के पास छोटी क्यारी में पालक या धनिया उगाकर देखें। बैंबू के सहारे बत्तियाँ लगाएँ और देखें कि पौधे कैसे फटाफट बढ़ते हैं। गाँव के नौजवान इसे सीखकर दूसरों को भी बता सकते हैं। पुराने जमाने में हम लोग चाँदनी रात में खेतों की सैर करते थे, अब इस रोशनी से रात में भी पौधों को ताकत दे सकते हैं। थोड़ी हिम्मत और समझदारी से ये तकनीक गाँव की खेती को नई ऊँचाई दे सकती है।

ये भी पढ़ें –गर्मियों में कम पानी वाली फसलें उगाएँ, ऐसे शुरू करें और लाखों कमाएँ

 

Author

  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

    View all posts

Leave a Comment