आजकल खेती का जमाना बदल रहा है। जहाँ ज्यादातर किसान नई-नई किस्मों से ज्यादा पैदावार और मुनाफे की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं सिसाना गाँव के किसान सुनील चौहान ने पुराने खजाने को फिर से जिंदा कर दिखाया है। उन्होंने ढाई बीघा जमीन में सोना-मोती नाम की गेहूं की पुरानी किस्म बोई, जो दो हजार साल से भी ज्यादा पुरानी है। अब उनकी फसल तैयार है, और खेत में बालियाँ इतनी भरी पड़ी हैं कि बंपर पैदावार की उम्मीद लग रही है। ये किस्म न सिर्फ सेहत का खजाना है, बल्कि जेब भरने का भी बड़ा जरिया बन रही है। तो आइए, इस अनोखी कहानी को समझते हैं।
सुनील भाई कोई आम किसान नहीं हैं। वो खेती में नए-नए प्रयोग करते रहते हैं। पहले धान की कई किस्मों को आजमाया, और अब सोना-मोती गेहूं की बारी आई। इसकी खासियत ये है कि ये न सिर्फ पौष्टिक है, बल्कि बाजार में इसका दाम भी आसमान छूता है। सामान्य गेहूं से अलग, ये किस्म पुरानी विरासत को ढोती है और सेहत को दुरुस्त करती है। सुनील भाई की मेहनत देखकर गाँव वाले भी हैरान हैं, और अब कई लोग इस राह पर चलने की सोच रहे हैं।
देहरादून से आया अनमोल बीज
सुनील भाई को ये सोना-मोती का बीज देहरादून से मिला। वहाँ एक पुराने वैज्ञानिक से उनकी मुलाकात हुई, जिन्होंने इस अनमोल किस्म का बीज उन्हें सौंपा। ढाई बीघा जमीन में बोया गया ये बीज अब फसल बनकर तैयार है। सुनील भाई का कहना है कि उन्हें करीब 15 क्विंटल गेहूं मिलने की उम्मीद है। ये कोई छोटी बात नहीं है, भाइयों! इतनी पैदावार वो भी ढाई बीघा में, वो भी एक ऐसी किस्म से जो बाजार में सोने की तरह बिकती है। इससे पहले वो धान की किस्मों पर हाथ आजमा चुके हैं, और हर बार कुछ नया सीखते हैं। उनकी मेहनत और हिम्मत वाकई काबिल-ए-तारीफ है।
सेहत का खजाना
सोना-मोती गेहूं सिर्फ पैदावार के लिए नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी कमाल है। ये खासतौर से मधुमेह और दिल की बीमारी वालों के लिए वरदान माना जाता है। इसमें ग्लूटेन और ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, यानी ये खून में शक्कर को बढ़ने नहीं देता। सामान्य गेहूं से ज्यादा प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज इसमें भरे पड़े हैं। जो लोग सेहत का ध्यान रखते हैं, उनके लिए ये गेहूं किसी दवा से कम नहीं। रोटी बनाओ या आटा इस्तेमाल करो, ये शरीर को ताकत देता है और बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव जी भी कहते हैं कि ये किस्म पोषण से भरपूर है और कई बीमारियों में फायदा देती है।
बाजार में सोने का दाम
भाइयों, सोना-मोती गेहूं की सबसे बड़ी खासियत इसका बाजार भाव है। जहाँ आम गेहूं 20-30 रुपये किलो बिकता है, वहीं ये 80 से 150 रुपये प्रति किलो तक जाता है। मतलब, जितना गेहूं सुनील भाई उगा रहे हैं, उसका दाम लाखों में हो सकता है। ढाई बीघा से 15 क्विंटल गेहूं हुआ, और अगर औसतन 100 रुपये किलो भी मिले, तो 15 लाख रुपये की कमाई बनती है। ये कोई छोटा-मोटा मुनाफा नहीं है। बाजार में लोग सेहतमंद चीजों के लिए ज्यादा पैसे देने को तैयार हैं, और सोना-मोती उनकी पहली पसंद बन रहा है। किसानों के लिए ये सुनहरा मौका है।
हड़प्पा काल की धरोहर
सुनील भाई बताते हैं कि सोना-मोती गेहूं कोई नई चीज नहीं, बल्कि हड़प्पा सभ्यता से जुड़ी धरोहर है। दो हजार साल पहले हमारे पुरखे इसे उगाते थे, और आज भी इसकी ताकत बरकरार है। इसका दाना गोल होता है, जो आम गेहूं के लंबे दाने से अलग है। पौधा करीब दो फीट ऊँचा होता है, जिससे आंधी-बारिश में भी बालियाँ टूटकर गिरती नहीं। ये मजबूती इसे खास बनाती है। बाल गोविंद यादव जी कहते हैं, “ये किस्म न सिर्फ अच्छी है, बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। किसानों का नए प्रयोग करना बड़ी बात है।” ये गेहूं सिर्फ खेत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति को भी जिंदा रखता है।
बंपर फसल से बंपर उम्मीद
सुनील भाई के खेत में सोना-मोती की फसल लहलहा रही है। बालियाँ इतनी भरी हैं कि देखकर लगता है, इस बार पैदावार जोरदार होगी। ढाई बीघा में 15 क्विंटल की उम्मीद है, और बाजार में इसका दाम देखते हुए मुनाफा भी शानदार होगा। ये प्रयोग न सिर्फ सुनील भाई के लिए, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा है। अगर आप भी अपने खेत में कुछ नया करना चाहते हैं, तो सोना-मोती जैसी पुरानी किस्मों पर नजर डालें। ये सेहत देती है, मुनाफा देती है, और पुरखों की मेहनत को सम्मान भी देती है।
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