हाथी बांस की खेती: एक बार लगाइए और 40 साल तक कमाई, हरा सोना से होगा बम्पर मुनाफा

Bans Ki Kheti : आज खेती बदल रही है, और किसान पारंपरिक फसलों से हटकर हाथी बांस (Giant Bamboo) जैसी लाभकारी खेती की ओर बढ़ रहे हैं। ये बांस की मोटी, ऊँची, और टिकाऊ किस्म है, जिसकी माँग भारत और विदेश में बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इसे उगाकर किसान 25,000-35,000 रुपये की लागत से सालाना 3 लाख रुपये तक कमा रहे हैं। एक बार लगाने पर 40 साल तक मुनाफा देने वाली ये खेती बंजर जमीन पर भी हो सकती है। राष्ट्रीय बांस मिशन (NBM) इसे बढ़ावा दे रहा है। आइए जानें इसकी खेती कैसे करें।

हाथी बांस की खासियत

हाथी बांस 50-60 फीट ऊँचा और 6-8 इंच मोटा होता है। ये तेजी से बढ़ता है, साल भर नई टहनियाँ देता है, और इसकी लकड़ी मजबूत होती है। इसका उपयोग फर्नीचर, फ्लोरिंग, कंस्ट्रक्शन, और हैंडीक्राफ्ट में होता है। इसकी जड़ें मिट्टी के कटाव को रोकती हैं, और ये सूखा, गर्मी, या पथरीली जमीन सहन कर लेता है। निर्यात बाजार (चीन, यूरोप) में इसकी माँग इसे खास बनाती है। एक पौधा 3-4 साल में कटाई के लिए तैयार हो जाता है, और 40-50 साल तक उपज देता है। पर्यावरण के लिए भी लाभकारी, ये CO2 अवशोषण में मदद करता है।

खेती के लिए जलवायु और मिट्टी

हाथी बांस गर्म, आर्द्र जलवायु (18-38°C) और 1200-4000 मिमी बारिश वाले क्षेत्रों में सबसे अच्छा उगता है। मॉनसून (जून-जुलाई) रोपण का आदर्श समय है। दोमट, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त है, लेकिन बंजर या कम उपजाऊ जमीन भी चलती है। एक एकड़ में 400-500 पौधे (10×10 फीट दूरी) लगाएँ। खेत की हल्की जुताई और 2×2 फीट गड्ढे तैयार करें। शुरुआत में जैविक खाद (5 किलो गोबर/पौधा) और मॉनसून के बाद ड्रिप सिंचाई करें। पहले साल खरपतवार हटाएँ।

खेती की प्रक्रिया और देखभाल

पौधे नर्सरी, KVK, या वन विभाग से लें (30-50 रुपये/पौधा)। गड्ढों में 100 ग्राम नीम खली और गोबर खाद डालकर रोपण करें। पहले 6 महीने हर 15-20 दिन में सिंचाई करें, बाद में मॉनसून पर्याप्त है। सालाना 5 किलो गोबर खाद प्रति पौधा डालें। कीटों (दीमक) के लिए नीम तेल (5 मिली/लीटर) छिड़कें। तीसरे साल से कटाई शुरू करें (अक्टूबर-दिसंबर)। हर साल नई टहनियाँ निकलती हैं, इसलिए बार-बार रोपण की जरूरत नहीं। इंटरक्रॉपिंग (मक्का, हल्दी) से अतिरिक्त आय संभव है।

लागत और मुनाफे का हिसाब

एक एकड़ की लागत:

  • पौधे (400-500): 12,000-25,000 रुपये

  • खेत तैयार करना, खाद, मजदूरी: 10,000-15,000 रुपये

  • कुल: 25,000-35,000 रुपये

तीसरे साल से एक एकड़ में 10-12 टन बांस (3000-5000 रुपये/क्विंटल) मिलता है, यानी 3-6 लाख रुपये/साल। रखरखाव (10,000 रुपये/साल) घटाकर 2.9-5.9 लाख रुपये मुनाफा। 5-7 साल बाद उत्पादन बढ़कर 15-20 टन हो सकता है, जिससे 7-8 लाख रुपये/साल कमाई संभव। बांस बोर्ड, फर्नीचर, या प्रोसेसिंग यूनिट से मुनाफा दोगुना हो सकता है। 40 साल तक स्थिर आय इसे दीर्घकालिक निवेश बनाती है।

बाजार, बिक्री, और सरकारी सहायता

हाथी बांस की माँग फर्नीचर, कागज मिल, बायो-प्लास्टिक, और हैंडीक्राफ्ट उद्योगों में है। वन विभाग, निर्यातक, और स्थानीय कारखानों को बेचें। NBM की वेबसाइट (nbm.nic.in) से खरीदारों की जानकारी लें। राष्ट्रीय बांस मिशन 50% सब्सिडी (120 रुपये/पौधा, 3 साल में किश्तों में) देता है। मध्य प्रदेश में 50% तक अतिरिक्त सब्सिडी मिलती है। KVK और वन विभाग मुफ्त प्रशिक्षण और पौधे देते हैं। FPO बनाकर सब्सिडी और मार्केटिंग आसान करें। ऑनलाइन (IndiaMART) और निर्यात (APEDA) से दाम बढ़ाएँ।

सुझाव और सावधानियाँ

  • KVK से प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण पौधे लें।

  • पहले साल खरपतवार और कीटों का ध्यान रखें।

  • इंटरक्रॉपिंग से शुरुआती आय बढ़ाएँ।

  • बांस की प्रोसेसिंग यूनिट पर विचार करें।

  • सरकारी योजनाओं (NBM, AIF) का लाभ लें।

हाथी बांस की खेती कम मेहनत और लागत में लाखों की कमाई का रास्ता है। इसकी बढ़ती माँग और सरकारी सहायता का फायदा उठाएँ, और खेती को लाभकारी बनाएँ। हर पौधे के बीच में 10×10 फीट की दूरी रखनी चाहिए ताकि पौधे आसानी से फैल सकें। पौधा लगाने के बाद शुरुआती 6 महीने तक घास-फूस और खरपतवार हटाते रहें। एक साल बाद यह अपने आप मजबूत हो जाता है।

ये भी पढ़ें – एक बार करें बांस की खेती और 40-50 साल तक मुनाफा कमायें

Author

  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

    View all posts

Leave a Comment