Bela Ki Kheti: आजकल खेती का रंग-ढंग बदल रहा है। पहले हमारे किसान भाई धान, गेहूं, और आलू जैसी फसलों पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब समय बदल गया है। अब खेतों में फूलों की खेती से खुशहाली की बयार बह रही है। खासकर बेला के फूलों की खेती ने तो किसानों की जिंदगी में नई रोशनी भर दी है। ये फूल न सिर्फ खूबसूरत और खुशबूदार हैं, बल्कि कम लागत में मोटा मुनाफा भी दे रहे हैं। आइए जानते हैं कि बेला की खेती कैसे किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता बन रही है।
बेला की खेती ने बदली किसानों की तकदीर
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के किसान आजकल बेला के फूलों की खेती करके अपनी किस्मत चमका रहे हैं। पहले यहां के किसान परंपरागत फसलों पर मेहनत करते थे, लेकिन अब फूलों की खेती ने उनकी जिंदगी में रंग भर दिए हैं। बेला का फूल, जिसे ज्यादातर लोग उसकी खुशबू के लिए जानते हैं, अब किसानों के लिए सोने की खान बन गया है। इसकी खेती में न ज्यादा खर्च आता है, न ही ज्यादा मेहनत की जरूरत पड़ती है। फिर भी कमाई इतनी होती है कि किसान खुशी-खुशी इसे अपना रहे हैं।
कम लागत में तगड़ा मुनाफा
बेला की खेती की सबसे खास बात ये है कि इसमें लागत बहुत कम लगती है। एक बीघा खेत में बेला की खेती शुरू करने के लिए करीब 10-12 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें पौधे, खाद, और थोड़ी-सी दवा का खर्च शामिल है। एक बार पौधे लगाने के बाद ये कई सालों तक फूल देते रहते हैं। यानी, एक बार खर्च करो और फिर बस कमाई करते रहो। हर दिन 15-20 किलो फूल आसानी से तैयार हो जाते हैं, और ये फूल 150-200 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकते हैं। यानी एक बीघा से हर महीने 50-60 हजार रुपये की कमाई आराम से हो जाती है। अब बताइए, इतनी कम मेहनत में इतना मुनाफा कहां मिलता है?
शादियों का सीजन, फूलों की बिक्री चरम पर
बेला के फूलों की मांग सालभर रहती है, लेकिन शादियों के सीजन में तो इसकी डिमांड आसमान छूती है। शादी-ब्याह में जयमाला, गजरे, हार, और गाड़ी की सजावट के लिए बेला के फूलों का खूब इस्तेमाल होता है। इतना ही नहीं, मंदिरों में पूजा के लिए और इत्र बनाने के लिए भी इन फूलों की जरूरत पड़ती है। कई बार तो खेत में ही खरीदार आकर फूल ले जाते हैं, और किसानों को बाजार तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। ये तो वाकई में कमाल की फसल है, जो हर तरफ से फायदा देती है।
कैसे शुरू करें बेला की खेती?
अगर आप भी बेला की खेती शुरू करना चाहते हैं, तो ये कोई रॉकेट साइंस नहीं है। सबसे पहले अच्छी क्वालिटी के बेला के पौधे लें। इन पौधों को लगाने के लिए खेत को अच्छे से तैयार करें। थोड़ी-सी जैविक खाद और पानी की सही व्यवस्था कर दें। बेला के पौधे को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, बस मिट्टी को नम रखें। खरपतवार और कीटों से बचाने के लिए थोड़ी-सी दवा का छिड़काव करें। एक बार पौधे बड़े हो जाएं, तो फूलों की तुड़ाई शुरू हो जाती है। खास बात ये है कि बेला के पौधे साल में कई बार फूल देते हैं, जिससे कमाई का सिलसिला रुकता नहीं है।
किसानों के लिए प्रेरणा
फर्रुखाबाद के एक युवा किसान, जिनका नाम गोलू है, ने बताया कि उन्होंने कुछ साल पहले बेला की खेती शुरू की थी। आज उनकी मेहनत रंग ला रही है। गोलू कहते हैं, “पहले हम गेहूं और आलू बोते थे, लेकिन उसमें लागत ज्यादा और मुनाफा कम था। बेला की खेती ने हमारी जिंदगी बदल दी। अब न ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, न ही ज्यादा खर्च। फिर भी हर महीने अच्छी कमाई हो जाती है।” गोलू जैसे किसान आज न सिर्फ खुद कमाई कर रहे हैं, बल्कि दूसरे किसानों को भी इस खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
क्यों है बेला खास?
बेला का फूल अपनी खुशबू और खूबसूरती के लिए जाना जाता है। ये फूल छोटा-सा दिखता है, लेकिन इसका महत्व बहुत बड़ा है। चाहे शादी-ब्याह हो, पूजा-पाठ हो, या फिर इत्र बनाने की बात हो, बेला हर जगह छा जाता है। इसकी खेती न सिर्फ आसान है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है। बेला के पौधे ज्यादा जगह नहीं लेते और इन्हें छोटे खेतों में भी उगाया जा सकता है। यानी छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी ये फसल वरदान है।
तो भाई, अगर आप भी खेती में कुछ नया करना चाहते हैं, तो बेला के फूलों की खेती जरूर आजमाएं। ये न सिर्फ आपकी जेब भरेगी, बल्कि आपके खेतों में भी खुशहाली लाएगी। अपने अनुभव हमारे साथ जरूर शेयर करें, ताकि और किसान भाई इस फसल का फायदा उठा सकें।
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