कीजिए इन 5 किस्मों की प्याज की खेती, 40-45 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुँचती है।

Bhima Onion Varieties: किसान भाइयों, अगर आप अपनी फसलों में बदलाव लाना चाहते हैं और मुनाफा बढ़ाना चाहते हैं, तो प्याज अनुसंधान निदेशालय (डीओजीआर) की 5 नई भीमा प्याज किस्में आपके लिए सुनहरा मौका हैं। हाल ही में विधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय, कल्याणी में आयोजित अखिल भारतीय प्याज और लहसुन नेटवर्क अनुसंधान परियोजना की कार्यशाला में इन किस्मों, भीमा सुपर, भीमा गहरा लाल, भीमा लाल, भीमा श्वेता, और भीमा शुभ्रा को राष्ट्रीय स्तर पर जारी करने की मंजूरी दी गई है।

ये किस्में विभिन्न मौसमों और मिट्टी के लिए तैयार की गई हैं, जो हमारे खेतों में पैदावार को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकती हैं। आइए, इनके फायदों, खेती के तरीकों, और बाजार में उनकी उपयोगिता को विस्तार से समझें।

भीमा सुपर, लाल रंग का कमाल

भीमा सुपर एक ऐसी लाल प्याज किस्म है, जो छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, और तमिलनाडु जैसे राज्यों में खरीफ मौसम के लिए आदर्श है। इसे पछेती खरीफ में भी उगाया जा सकता है, जो इसकी बहुमुखी प्रतिभा दिखाता है। इसकी औसत उपज खरीफ में 20-22 टन प्रति हेक्टेयर और पछेती खरीफ में 40-45 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुँचती है। कंद 100-105 दिन (खरीफ) और 110-120 दिन (पछेती खरीफ) में तैयार हो जाते हैं।

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इसकी गहरी लाल छटा और मजबूत बनावट इसे बाजार में खास बनाती है। अगर आप इसे उगाना चाहते हैं, तो हल्की और जल निकासी वाली मिट्टी में बोएँ और नियमित सिंचाई करें। भीमा सुपर की इमेज में इसके चमकते लाल कंद और गोल आकार साफ दिखाई देते हैं, जो ग्राहकों को आकर्षित करते हैं।

भीमा गहरा लाल, आकर्षक और लाभकारी

भीमा गहरा लाल छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, और तमिलनाडु में खरीफ के लिए अनुकूल है। इसकी खासियत इसके गहरे लाल, चपटे और गोलाकार कंद हैं, जो 95-100 दिन में पककर तैयार हो जाते हैं। औसत उपज 20-22 टन प्रति हेक्टेयर है, जो इसे छोटे और मझोले किसानों के लिए फायदेमंद बनाती है। इसकी आकर्षक उपस्थिति इसे सजावटी और खाद्य दोनों रूपों में लोकप्रिय बनाती है।

भीमा लाल

भीमा लाल पहले से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में रबी के लिए मशहूर थी, लेकिन अब इसे दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, और तमिलनाडु में खरीफ और पछेती खरीफ के लिए भी अनुमोदित किया गया है। यह फसल खरीफ में 105-110 दिन, पछेती खरीफ और रबी में 110-120 दिन में तैयार होती है। इसकी उपज खरीफ में 19-21 टन, पछेती खरीफ में 48-52 टन, और रबी में 30-32 टन प्रति हेक्टेयर है। रबी में इसे 3 महीने तक भंडारण के लिए रखा जा सकता है, जो किसानों की आय को स्थिर रखता है। इसे उगाने के लिए मिट्टी में जैविक पदार्थ मिलाएँ और सही समय पर पानी दें।

भीमा श्वेता

भीमा श्वेता सफेद प्याज की वह किस्म है, जो रबी के लिए पहले से जानी जाती थी और अब खरीफ में छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, और तमिलनाडु में उगाई जा सकती है। यह 110-120 दिन में पककर तैयार होती है और 3 महीने तक भंडारण के लिए उपयुक्त है। खरीफ में इसकी उपज 18-20 टन और रबी में 26-30 टन प्रति हेक्टेयर तक होती है। इसका सफेद रंग और मधुर स्वाद इसे प्रोसेसिंग और निर्यात के लिए खास बनाता है। खेती के लिए हल्की सिंचाई और सूरज की रोशनी का ध्यान रखें। भीमा श्वेता की इमेज में इसके चमकते सफेद कंद और गोल आकार दिखाई देते हैं, जो इसे अनोखा बनाते हैं।

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भीमा शुभ्रा

भीमा शुभ्रा भी सफेद प्याज की एक और शानदार किस्म है, जो छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, और तमिलनाडु में खरीफ, साथ ही महाराष्ट्र में पछेती खरीफ के लिए अनुकूल है। यह खरीफ में 110-115 दिन और पछेती खरीफ में 120-130 दिन में तैयार होती है। इसकी उपज खरीफ में 18-20 टन और पछेती खरीफ में 36-42 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुँचती है। यह मौसम के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकती है, जो इसे छोटे किसानों के लिए उपयोगी बनाती है। इसे उगाने के लिए मिट्टी में जैविक खाद मिलाएँ और पानी का प्रबंधन करें। भीमा शुभ्रा की इमेज में इसके सफेद और चमकदार कंद नजर आते हैं, जो इसे बाजार में लोकप्रिय बनाते हैं।

खेती और देखभाल की सलाह

इन किस्मों को उगाने के लिए सही समय और मिट्टी का चयन जरूरी है। खरीफ के लिए जुलाई-अगस्त और रबी के लिए नवंबर-दिसंबर सही समय है। हल्की दोमट मिट्टी में इनकी पैदावार बढ़ती है, जहाँ जलभराव न हो। प्रति हेक्टेयर 8-10 टन गोबर खाद डालें और 100-120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम फॉस्फोरस, और 50 किलोग्राम पोटाश का इस्तेमाल करें। सिंचाई 7-10 दिन के अंतराल पर करें और कीटों से बचाव के लिए ट्राइकोडर्मा या नीम का तेल उपयोगी है। अगर मौसम खराब हो, तो नालियाँ बनाकर पानी निकालें।

इन नई किस्मों ने कई किसान भाइयों की जिंदगी बदली है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में भीमा लाल से 50 टन प्रति हेक्टर की रिकॉर्ड उपज ली गई है। स्थानीय इलाकों में भीमा श्वेता को प्रोसेसिंग उद्योग ने अपनाया है। अगर आप भी इनका लाभ उठाना चाहते हैं, तो नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से बीज लें। अपनी सफलता की कहानी साझा करें और दूसरों को प्रेरित करें।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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