बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए एक बड़ी पहल शुरू की है। इस नई योजना का नाम है ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’। इसका मकसद है बिहार की हर महिला को आत्मनिर्भर बनाना और उनके परिवार की आमदनी बढ़ाना। यह योजना खासकर उन ग्रामीण महिलाओं के लिए वरदान साबित हो सकती है, जो खेती-किसानी से जुड़े छोटे-मोटे काम शुरू करना चाहती हैं। आइए, जानते हैं कि यह योजना क्या है और यह किसानों को कैसे फायदा पहुँचाएगी।
योजना का मकसद और उसकी खासियत
बिहार सरकार ने इस योजना के जरिए हर परिवार की एक महिला को आर्थिक मदद देने का फैसला किया है। इस मदद से महिलाएँ अपनी पसंद का कोई छोटा व्यवसाय शुरू कर सकती हैं, जैसे कि मुर्गी पालन, मशरूम की खेती, जैविक खाद बनाना, या फिर स्थानीय उत्पादों का छोटा व्यापार। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ महिलाएँ आत्मनिर्भर होंगी, बल्कि गाँवों में रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। इससे बिहार के लोगों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम होगी।
शुरुआती मदद और उसका इस्तेमाल
इस योजना के तहत हर परिवार की एक महिला को शुरू में 10,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। यह रकम सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। इस पैसे से महिलाएँ अपने लिए जरूरी सामान खरीद सकती हैं, जैसे कि बीज, छोटे-मोटे औजार, या फिर व्यवसाय शुरू करने के लिए कच्चा माल। मिसाल के तौर पर, कोई महिला इस रकम से अपने खेत में सब्जियों की खेती शुरू कर सकती है या फिर गाय-भैंस के लिए चारा खरीद सकती है। यह छोटी सी शुरुआत उनके लिए बड़ा बदलाव ला सकती है।
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आगे की मदद और मूल्यांकन
योजना की एक खास बात यह है कि सरकार सिर्फ शुरुआती मदद देकर रुक नहीं रही। छह महीने बाद सरकार यह देखेगी कि महिला ने अपने व्यवसाय को कैसे आगे बढ़ाया। अगर काम अच्छा चल रहा हो और और पैसे की जरूरत हो, तो सरकार 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त मदद दे सकती है। यह रकम उन महिलाओं के लिए बहुत काम आएगी, जो अपने छोटे व्यवसाय को और बड़ा करना चाहती हैं। मिसाल के तौर पर, अगर कोई महिला डेयरी का काम शुरू करती है, तो वो इस रकम से और पशु खरीद सकती है या दूध बेचने के लिए बेहतर व्यवस्था कर सकती है।
हाट बाजारों से मिलेगा बढ़ावा
इस योजना का एक और फायदा यह है कि सरकार गाँवों से लेकर शहरों तक हाट बाजार बनाएगी। इन बाजारों में महिलाएँ अपने बनाए उत्पाद बेच सकेंगी, जैसे कि जैविक सब्जियाँ, मसाले, अचार, या फिर हस्तशिल्प की चीजें। इससे न सिर्फ उनकी कमाई बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय बाजार भी मजबूत होंगे। किसान परिवारों की महिलाएँ, जो पहले सिर्फ खेतों में काम करती थीं, अब अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुँचा सकेंगी। यह उनके आत्मविश्वास और आमदनी, दोनों को बढ़ाएगा।
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कैसे मिलेगा योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को आवेदन करना होगा। सरकार जल्द ही आवेदन की प्रक्रिया शुरू करेगी, जिसका जिम्मा ग्रामीण विकास विभाग को सौंपा गया है। जरूरत पड़ने पर नगर विकास और आवास विभाग भी इसमें मदद करेगा। आवेदन की प्रक्रिया को आसान रखा जाएगा ताकि गाँव की महिलाएँ भी बिना किसी परेशानी के इसका फायदा उठा सकें। सितंबर 2025 से इस योजना के तहत पैसे महिलाओं के बैंक खातों में भेजे जाने शुरू हो जाएँगे।
किसानों के लिए इसका महत्व
बिहार में ज्यादातर परिवार खेती-किसानी पर निर्भर हैं। यह योजना उन महिलाओं के लिए खास तौर पर फायदेमंद है, जो खेती से जुड़े छोटे व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं। मिसाल के तौर पर, कोई महिला इस योजना की मदद से बीज बैंक शुरू कर सकती है या फिर जैविक खेती को बढ़ावा दे सकती है। इससे न सिर्फ उनकी अपनी कमाई बढ़ेगी, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। साथ ही, गाँवों में रोजगार के नए अवसर बनने से युवाओं को भी बाहर जाने की जरूरत कम होगी।
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