भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने नई गन्ना वैरायटी ‘बिस्मिल’ को इन तीन राज्यों में खेती के लिए मंजूरी दे दी है। ये वैरायटी भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ और अन्य संस्थानों की लंबी रिसर्च का नतीजा है। वैज्ञानिकों ने बताया कि बिस्मिल वैरायटी न सिर्फ पैदावार में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देगी, बल्कि चीनी की रिकवरी भी बहुत अच्छी होगी। ये वैरायटी उत्तर भारत के मौसम और मिट्टी के लिए खासतौर पर तैयार की गई है।
बिस्मिल वैरायटी की खासियत ये है कि ये रेड रॉट, विल्ट और टॉप बोरर जैसे प्रमुख रोगों से काफी हद तक प्रतिरोधी है। इससे किसानों को दवाइयों पर खर्च कम करना पड़ेगा और फसल सुरक्षित रहेगी। औसत पैदावार 100 से 120 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है, जो पुरानी वैरायटी से काफी बेहतर है। चीनी की रिकवरी 12 से 13 प्रतिशत तक रहती है, जो मिलों के लिए भी फायदेमंद है।
बिस्मिल वैरायटी की मुख्य विशेषताएं और फायदे
ये वैरायटी मध्यम से देर से पकने वाली है, जिसकी फसल अवधि 12 से 14 महीने होती है। पौधे लंबे और मजबूत होते हैं, जिससे लॉजिंग यानी गिरने का खतरा बहुत कम रहता है। पत्तियां चौड़ी और हरी रहती हैं, जो फोटोसिंथेसिस के लिए अच्छी है। कंद मजबूत और मोटे होते हैं, जिससे चीनी मिलों में क्रशिंग आसान होती है। वैज्ञानिकों ने फील्ड ट्रायल में पाया कि ये वैरायटी सूखा और ज्यादा ठंड दोनों सहन कर सकती है। उत्तर प्रदेश के तराई इलाकों से लेकर हरियाणा और पंजाब के मैदानी क्षेत्रों में ये अच्छा प्रदर्शन कर रही है।
किसान भाइयों के लिए ये वैरायटी इसलिए भी फायदेमंद है क्योंकि इसमें बीज की जरूरत कम पड़ती है। एक हेक्टेयर के लिए 30-35 क्विंटल बीज काफी है। साथ ही ये वैरायटी ज्यादा पानी नहीं मांगती, इसलिए सिंचाई का खर्च भी कम होता है। अगर सही तरीके से देखभाल की जाए तो एक एकड़ से 40-50 टन तक गन्ना उत्पादन संभव है।
ये भी पढ़ें- मंडियों में नए आलू की बंपर आवक शुरू! जल्दबाजी में बिक्री न करें किसान, एक्सपर्ट ने दी अहम सलाह
खेती के लिए जरूरी टिप्स और सावधानियां
बिस्मिल वैरायटी की खेती के लिए सबसे पहले अच्छी तरह से जुताई करें। मिट्टी में गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट जरूर मिलाएं। बुवाई के लिए फरवरी-मार्च या अक्टूबर-नवंबर का समय सबसे अच्छा है। बीज को 2-3 आंखों वाले टुकड़ों में काटकर बोएं और दूरी 75-90 सेंटीमीटर रखें। रोपाई के बाद पहली सिंचाई 10-15 दिन बाद करें। खाद का संतुलित इस्तेमाल करें – नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा मिट्टी जांच के अनुसार डालें।
रोगों से बचाव के लिए शुरुआत में नीम आधारित कीटनाशक या जैविक उपचार का इस्तेमाल करें। अगर कोई रोग दिखे तो तुरंत कृषि विभाग से सलाह लें। फसल की कटाई के समय गन्ने को साफ-सुथरा रखें ताकि मिलों में अच्छे दाम मिलें।
किसानों के लिए क्या मतलब
बिस्मिल वैरायटी की मंजूरी से उत्तर भारत के गन्ना किसानों को नई उम्मीद मिली है। ये वैरायटी न सिर्फ पैदावार बढ़ाएगी बल्कि मिलों को भी ज्यादा चीनी देगी। किसान भाई अगर इस वैरायटी को अपनाते हैं तो उनकी आय में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। ये वैरायटी धीरे-धीरे बीज केंद्रों और कृषि विभाग से उपलब्ध हो रही है।
ये भी पढ़ें- जनवरी में UP के किसानों को बड़ा तोहफा! मुफ्त मिलेंगे उड़द-मूंग-मूंगफली के बीज