Black Potato Farming: कृषि क्षेत्र में नए प्रयोगों के चलते अब पारंपरिक फसलों के अलावा औषधीय गुणों से भरपूर फसलें भी लोकप्रिय हो रही हैं। काला आलू (Black Potato) भी इन्हीं में से एक है। इस आलू में मौजूद एंथोसायनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट इसे अधिक पौष्टिक बनाता है और यह कई बीमारियों से बचाव में सहायक होता है। अगर आप खेती से अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो काले आलू की खेती एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।
काले आलू की विशेषताएँ
काले आलू की पहचान इसके गहरे बैंगनी या काले रंग के गूदे और छिलके से होती है। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट हृदय रोग, डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव में सहायक होते हैं। यह सामान्य आलू की तुलना में अधिक पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है। इसकी बाजार में अधिक मांग होने के कारण इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है। इसके अलावा, काले आलू की खेती मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में भी मददगार होती है।
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मिट्टी और जलवायु
काले आलू की खेती के लिए समशीतोष्ण और ठंडी जलवायु सबसे अच्छी मानी जाती है। इसका आदर्श तापमान 10 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए। अधिक गर्मी से फसल को नुकसान हो सकता है, इसलिए सिंचाई और छायांकन का सही प्रबंधन जरूरी है।
इसकी खेती के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का pH स्तर 5.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में इसकी पैदावार अधिक होती है। खेत की अच्छी तरह जुताई कर उसमें जैविक खाद मिलाने से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है।
बीज का चुनाव और बोआई
स्वस्थ और रोगमुक्त बीजों का चयन करना चाहिए। बुवाई से पहले बीज उपचार करना आवश्यक होता है ताकि फसल रोगों से सुरक्षित रहे। आलू के बीज टुकड़ों में कम से कम एक से दो आँखें होनी चाहिए। प्रत्येक टुकड़े का वजन 30-40 ग्राम होना चाहिए।बुवाई का सही समय नवंबर से जनवरी के बीच होता है। बीजों को 6-8 सेंटीमीटर गहराई में रोपा जाता है और हल्की मिट्टी से ढका जाता है। कतारों के बीच की दूरी 50-60 सेंटीमीटर और पौधों के बीच की दूरी 20-30 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।
सिंचाई और खाद प्रबंधन
बुवाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करनी चाहिए। इसके बाद हर 10-12 दिन में हल्की सिंचाई की जरूरत होती है। फसल को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए जलभराव से बचना चाहिए। खेत में जैविक खाद जैसे गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग करना चाहिए। प्रति एकड़ 15-20 क्विंटल गोबर की खाद डालना लाभकारी होता है। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश संतुलित मात्रा में डालने से उपज अच्छी होती है।
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प्रमुख बीमारियाँ और उनका नियंत्रण
झुलसा रोग फफूंद जनित बीमारी है, जो पत्तियों और कंदों को प्रभावित करता है। इससे बचाव के लिए मैनकोज़ेब 75 WP या क्लोरोथालोनिल का छिड़काव करना चाहिए।
वायरस जनित रोग फसल को कमजोर बना सकता है और उपज घटा सकता है। इससे बचाव के लिए स्वस्थ बीजों का चयन करना चाहिए और खेत में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना आवश्यक है।
कटुआ कीट और सूत्रकृमि कंदों को नुकसान पहुंचाते हैं। इनके नियंत्रण के लिए जैविक कीटनाशकों और नीम तेल का छिड़काव करना चाहिए।
कटाई, उत्पादन और भंडारण
बुवाई के 90-120 दिन बाद काले आलू तैयार हो जाते हैं। कटाई के 10 दिन पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए ताकि आलू अच्छी तरह सूख जाएं। एक हेक्टेयर में 200 से 250 क्विंटल तक उपज मिल सकती है।भंडारण के लिए आलू को ठंडी और हवादार जगह पर रखना चाहिए। इन्हें 10-15 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्टोर करने से ये लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। प्लास्टिक बैग की बजाय जूट की बोरियों का उपयोग करना चाहिए ताकि आलू में नमी न बने।
बाजार में बिक्री और मुनाफा
ऑर्गेनिक फार्मिंग स्टोर्स और सुपरमार्केट में काले आलू की मांग अधिक रहती है। इसे ऑनलाइन प्लेटफार्मों जैसे कि अमेज़न, फ्लिपकार्ट और बिगबास्केट पर भी बेचा जा सकता है। स्थानीय सब्जी मंडियों और होटल इंडस्ट्री में भी इसकी अच्छी कीमत मिलती है।
काले आलू की खेती (Black Potato Farming) न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि किसानों के लिए अधिक मुनाफा कमाने का भी एक बेहतरीन विकल्प है। सही तकनीक और आधुनिक खेती के तरीकों का उपयोग करके किसान इससे अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
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