किसान भाइयों, खेती को बेहतर बनाने और फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए ऋण लेना आम बात है। लेकिन कई बार मौसम की मार या फसलों में बीमारी लगने से नुकसान हो जाता है। ऐसे में ऋण चुकाना मुश्किल हो जाता है, और बैंक का ब्याज बढ़ता चला जाता है। इससे नया ऋण मिलना बंद हो जाता है, और अगली फसल की खेती में परेशानी आती है। राजस्थान सरकार ने इस दिक्कत को समझा और किसानों के लिए मुख्यमंत्री अवधिपार ब्याज राहत एकमुश्त समझौता योजना 2025-26 शुरू की है। इस योजना से ब्याज का बोझ हल्का होता है, और किसान फिर से नया ऋण ले सकते हैं।
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा ये है कि किसान भाई को पुराने अवधिपार ऋण की सिर्फ 25 फीसदी राशि जमा करनी होती है। इसके बाद ब्याज में पूरी छूट मिल जाती है। यानी, अगर ब्याज का बोझ लाखों में है, तो सिर्फ मूल राशि का चौथाई हिस्सा जमा करके किसान ब्याज से मुक्त हो सकता है। इतना ही नहीं, ये करने के बाद वो फिर से बैंक से नया ऋण लेने के लिए पात्र हो जाता है। ये योजना पूरे राजस्थान के किसानों के लिए है, और अब तक लाखों रुपये की राहत दी जा चुकी है। सरकार ने इसके लिए 200 करोड़ रुपये का बजट रखा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को फायदा मिले।
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जयपुर और जोधपुर में दिखा असर
ये योजना राजस्थान के कई जिलों में किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। जयपुर में अब तक 91 किसानों ने 150.26 लाख रुपये जमा किए हैं, और इनमें से 66 किसानों को 154.50 लाख रुपये की ब्याज राहत मिल चुकी है। जोधपुर में भी 36 किसानों को 62.41 लाख रुपये की राहत दी गई है। इन किसानों ने अपने पुराने ऋण का 25 फीसदी हिस्सा जमा किया, और ब्याज का पूरा बोझ हट गया। अब वो नई फसल के लिए ऋण ले सकते हैं। ये आँकड़े दिखाते हैं कि योजना किसानों तक पहुँच रही है, और उनका भरोसा बढ़ा है।
योजना का लाभ कैसे लें
इस योजना का फायदा उठाने के लिए किसान भाइयों को 30 जून 2025 तक अपने हिस्से की 25 फीसदी राशि सहकारी भूमि विकास बैंक में जमा करानी होगी। इसके लिए नजदीकी बैंक शाखा में संपर्क करें। सरकार ने योजना को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया है, जो पारदर्शी और तेज है। अगर किसी को आवेदन में दिक्कत हो, तो बैंक अधिकारी या ई-मित्र केंद्र से मदद ली जा सकती है। जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, ऋण दस्तावेज, और जमीन के कागजात साथ रखें। समय रहते आवेदन करें, ताकि मौका न छूटे।
राजस्थान सरकार चाहती है कि इस योजना का लाभ हर पात्र किसान तक पहुँचे। इसके लिए गाँव-गाँव में प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। सहकारिता विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वो किसानों को योजना के बारे में बताएँ और उन्हें आवेदन के लिए प्रेरित करें। रेडियो, अखबार, और गाँव की पंचायतों में भी इसकी जानकारी दी जा रही है। जिन जिलों में बकाया ऋण ज्यादा है, वहाँ खास रणनीति बनाई गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान ब्याज के बोझ से मुक्त हो सकें।
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