किसान भाई अब ड्रोन से करेंगे दवा छिड़काव, हर पंचायत में खुलेगा कस्टम हायरिंग सेंटर

राजस्थान सरकार ने उदयपुर के किसानों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने जिले में 40 नए कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) खोलने का फैसला किया है, जिससे करीब साढ़े चार लाख किसान खेती के आधुनिक उपकरण किराए पर ले सकेंगे। इन केंद्रों के जरिए ड्रोन स्प्रेयर जैसे नए और उन्नत उपकरण भी उपलब्ध होंगे, जो खेती को आसान, तेज और कम खर्चीला बनाएंगे। सरकार इन केंद्रों को शुरू करने के लिए 24 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद भी देगी।

गाँव-गाँव तक पहुँचेगी आधुनिक खेती की सुविधा

पहले कस्टम हायरिंग सेंटर सिर्फ ब्लॉक स्तर पर थे, जिसके कारण दूर-दराज के गाँवों के किसानों को उपकरण लेने में परेशानी होती थी। अब सरकार ने फैसला किया है कि हर ग्राम पंचायत में एक सीएचसी होगा। साल 2025-26 में उदयपुर में 40 नए केंद्र खुलेंगे, जिससे छोटे और मझोले किसानों को अपने गाँव में ही ट्रैक्टर, लेजर लैंड लेवलर, सीड ड्रिल जैसे उपकरण आसानी से मिल सकेंगे। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी। खास बात यह है कि इन केंद्रों में अब ड्रोन स्प्रेयर भी शामिल किया गया है। यह नई तकनीक कीटनाशकों का छिड़काव तेजी से और सुरक्षित तरीके से करती है, जिससे फसल की देखभाल आसान हो जाएगी।

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ड्रोन स्प्रेयर: खेती में नया बदलाव

उदयपुर जैसे क्षेत्रों में, जहाँ ज्यादातर खेत छोटे-छोटे हैं, ड्रोन स्प्रेयर किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। यह मशीन खेतों में कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव हवा से करती है, जिससे समय कम लगता है और मेहनत भी बचती है। पहले किसानों को भारी मशीनें या हाथ से छिड़काव करना पड़ता था, जो थकाऊ और समय लेने वाला था। अब ड्रोन की मदद से एक घंटे में कई एकड़ खेत में छिड़काव हो सकता है। यह खासकर आदिवासी क्षेत्रों के किसानों के लिए फायदेमंद है, जहाँ खेत पहाड़ी इलाकों में बिखरे हुए हैं।

सरकार की आर्थिक मदद से शुरू करें केंद्र

इन कस्टम हायरिंग सेंटरों को शुरू करने के लिए सरकार ने खास इंतजाम किए हैं। कोई भी किसान संगठन, स्वयं सहायता समूह, सहकारी समिति, या निजी उद्यमी इन केंद्रों को खोलने के लिए आवेदन कर सकता है। सरकार सामान्य वर्ग के लोगों को 40% और अनुसूचित जाति, जनजाति, या महिला आवेदकों को 50% से 80% तक अनुदान देगी। यह अनुदान 10 लाख से लेकर 24 लाख रुपये तक हो सकता है। यानी, अगर कोई महिला या आदिवासी किसान समूह इस योजना में हिस्सा लेता है, तो उसे बहुत कम लागत में केंद्र शुरू करने का मौका मिलेगा। यह न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ाएगा, बल्कि गाँव में और लोगों को रोजगार भी देगा।

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किसानों को सस्ते में उपकरण

इन केंद्रों से किसानों को उपकरण किराए पर लेने में बहुत फायदा होगा। पहले ट्रैक्टर का किराया 400 से 900 रुपये प्रति घंटा था, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर केंद्र होने से किराया और कम हो सकता है। जिला स्तर की समिति हर क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से किराए की दरें तय करेगी। इससे किसानों को सस्ते दामों पर उपकरण मिलेंगे, जिससे खेती की लागत घटेगी। मिसाल के तौर पर, अगर कोई किसान ड्रोन स्प्रेयर किराए पर लेता है, तो वह कम समय में ज्यादा खेतों में छिड़काव कर सकेगा, जिससे उसका उत्पादन बढ़ेगा और मेहनत कम होगी।

उदयपुर के लिए क्यों खास है यह योजना?

उदयपुर में ज्यादातर किसान छोटे और मझोले हैं, और कई आदिवासी समुदाय से हैं। यहाँ के खेत छोटे-छोटे और पहाड़ी इलाकों में हैं, जिसके कारण आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल पहले कम होता था। कृषि विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, यह योजना उदयपुर जैसे क्षेत्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अभी जिले में 36 सीएचसी काम कर रहे हैं, और नए 40 केंद्रों के खुलने से हर पंचायत में यह सुविधा होगी। इससे न सिर्फ खेती आसान होगी, बल्कि फसलों की पैदावार भी बढ़ेगी। साथ ही, ड्रोन जैसी नई तकनीक छोटे किसानों तक पहुँचेगी, जो पहले सिर्फ बड़े किसानों के लिए उपलब्ध थी।

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  • Shashikant

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