डीएपी नहीं मिल रहा? जानिए धान की रोपाई के लिए सबसे असरदार उर्वरक विकल्प!

किसान भाइयों, धान की रोपाई का समय नजदीक है, लेकिन देश के कई इलाकों में डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कमी ने किसानों को चिंता में डाल दिया है। डीएपी धान की जड़ों को मजबूत करने और शुरुआती वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी अनुपलब्धता में घबराने की जरूरत नहीं। वैज्ञानिक और रासायनिक उर्वरकों के कई विकल्प मौजूद हैं, जो डीएपी की जगह ले सकते हैं और अच्छी पैदावार सुनिश्चित कर सकते हैं। यह लेख किसानों को ऐसे ही प्रभावी विकल्पों की जानकारी देगा।

यूरिया और सिंगल सुपर फॉस्फेट, सस्ता और प्रभावी

डीएपी का सबसे आसान और किफायती विकल्प यूरिया और सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) का मिश्रण है। यूरिया में 46% नाइट्रोजन होता है, जो पौधों की हरी पत्तियों और तनों को बढ़ावा देता है। वहीं, SSP में 16% फॉस्फोरस और सल्फर होता है, जो जड़ विकास और बालियों की संख्या बढ़ाने में मदद करता है। प्रति एकड़ 50 किलोग्राम यूरिया और 125 किलोग्राम SSP का उपयोग करें। रोपाई से पहले या रोपाई के समय इस मिश्रण को खेत में समान रूप से बिखेरें। सल्फर की मौजूदगी धान की फसल को फफूंदी रोगों से बचाने में भी सहायक है। यह विकल्प डीएपी की तुलना में सस्ता है और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखता है।

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क्या है मिश्रित उर्वरक, NPK का संतुलित पोषण

बाजार में उपलब्ध NPK मिश्रित उर्वरक जैसे 10:26:26 या 12:32:16 डीएपी का उत्कृष्ट विकल्प हैं। इनमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, और पोटाश का संतुलित अनुपात होता है, जो धान की प्रारंभिक वृद्धि को तेज करता है। प्रति एकड़ 50-60 किलोग्राम NPK उर्वरक का उपयोग करें। रोपाई के समय इसे खेत में डालें, ताकि पौधे इसे आसानी से अवशोषित कर सकें। पोटाश की मौजूदगी पौधों को सूखा और रोगों के प्रति सहनशील बनाती है। यह उर्वरक उन किसानों के लिए आदर्श है, जो एक ही खाद से तीनों प्रमुख पोषक तत्व देना चाहते हैं।

नीम कोटेड यूरिया और रॉक फॉस्फेट

नीम कोटेड यूरिया नाइट्रोजन को धीरे-धीरे छोड़ता है, जिससे पौधों को लंबे समय तक पोषण मिलता है। इसे रॉक फॉस्फेट के साथ मिलाकर उपयोग करें। रॉक फॉस्फेट एक प्राकृतिक फॉस्फोरस स्रोत है, जो धीरे-धीरे पोषक तत्व प्रदान करता है। प्रति एकड़ 50 किलोग्राम नीम कोटेड यूरिया और 100-150 किलोग्राम रॉक फॉस्फेट डालें। यह मिश्रण दीर्घकालिक मिट्टी उर्वरता के लिए लाभकारी है, विशेषकर उन खेतों में जहाँ मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ कम हैं। रॉक फॉस्फेट अम्लीय मिट्टी में अधिक प्रभावी होता है, इसलिए मिट्टी परीक्षण जरूरी है।

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मिट्टी परीक्षण और जलनिकासी का महत्व

किसी भी उर्वरक का उपयोग करने से पहले मिट्टी परीक्षण करवाएँ। यह मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की कमी को दर्शाता है, जिससे सही उर्वरक और मात्रा का चयन आसान होता है। धान की खेती में जलनिकासी का विशेष ध्यान रखें। अधिक पानी होने पर उर्वरक घुलकर बर्बाद हो सकता है। रोपाई से पहले खेत को समतल करें और पानी का स्तर 2-5 सेमी रखें। फॉस्फोरस आधारित उर्वरक रोपाई के समय डालना सबसे प्रभावी होता है, क्योंकि यह जड़ों के विकास में मदद करता है।

सरकार की तरफ से पहल

उत्तर प्रदेश और बिहार में डीएपी की कमी को पूरा करने के लिए सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के माध्यम से वैकल्पिक उर्वरकों की आपूर्ति और प्रशिक्षण दे रही है। किसान अपने नजदीकी KVK या जिला कृषि कार्यालय से संपर्क कर SSP, NPK, और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता की जानकारी ले सकते हैं। यूपी सरकार ने 2025 में उर्वरक सब्सिडी को बढ़ाने की घोषणा की है, जिससे SSP और यूरिया सस्ते दामों पर मिलेंगे।

डीएपी की कमी धान की खेती में बाधा नहीं बननी चाहिए। यूरिया + SSP, NPK मिश्रण, और रॉक फॉस्फेट जैसे वैज्ञानिक विकल्प अपनाकर किसान अच्छी पैदावार पा सकते हैं। मिट्टी परीक्षण और सही उर्वरक प्रबंधन के साथ लागत कम और उपज अधिक होगी। अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें और वैज्ञानिक खेती को अपनाएँ।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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