Depot Darpan Portal: खेती-किसानी का आधार मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सरकार एक नया कदम उठाने जा रही है। 20 मई 2025 को ‘डिपो दर्पण पोर्टल’ और मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च होने वाला है, जिसका मकसद खाद्य भंडारण के गोदामों को उच्चतम गुणवत्ता और प्रदर्शन के मानकों पर लाना है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) के मुताबिक, ये डिजिटल पहल गोदाम प्रबंधकों को लगभग रीयल-टाइम में गोदामों के ढांचे, संचालन और वित्तीय प्रदर्शन को जांचने में मदद करेगी।
ये योजना देश के 80 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों के लिए खाद्य सुरक्षा को और मजबूत करेगी। आइए, इस योजना को आसान और देसी भाषा में समझते हैं, ताकि हमारे किसान भाई और इससे जुड़े लोग इसका पूरा फायदा समझ सकें।
डिपो दर्पण क्या है?
डिपो दर्पण एक ऐसा डिजिटल मंच है, जो खाद्य भंडारण के गोदामों की हर छोटी-बड़ी जानकारी को रीयल-टाइम में ट्रैक करेगा। ये पोर्टल और मोबाइल ऐप भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी), और राज्य एजेंसियों या निजी क्षेत्र से किराए पर लिए गए कुल 2,278 गोदामों को एक डिजिटल छतरी के नीचे लाएगा। इस पहल का उद्घाटन केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी 20 मई 2025 को करेंगे। गोदाम प्रबंधक इस पोर्टल पर अपने गोदाम की जियो-टैग की गई जानकारी अपलोड करेंगे, जिसके आधार पर ऑटोमेटेड रेटिंग और सुधार के लिए जरूरी सुझाव मिलेंगे। ये सिस्टम 100 फीसदी सत्यापन और थर्ड-पार्टी ऑडिट के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
गोदामों की जाँच के दो बड़े आधार
इस पोर्टल के जरिए गोदामों को दो मुख्य आधारों पर परखा जाएगा। पहला है ढांचागत स्थिति, जिसमें गोदाम की सुरक्षा, भंडारण की व्यवस्था, पर्यावरणीय कारक, नई तकनीकों का इस्तेमाल और कानूनी नियमों का पालन शामिल है। दूसरा है संचालन दक्षता, जिसमें स्टॉक का टर्नओवर, नुकसान की मात्रा, जगह का सही इस्तेमाल, कर्मचारियों का खर्च और गोदाम की मुनाफे की स्थिति देखी जाएगी। दोनों आधारों पर गोदामों की अलग-अलग जाँच होगी और फिर एक समग्र स्टार रेटिंग दी जाएगी। ये रेटिंग गोदामों को बेहतर करने के लिए सुझाव देगी, ताकि खाद्यान्न का भंडारण सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण हो।
हाई-टेक तकनीक का कमाल
डिपो दर्पण की सबसे बड़ी खासियत है इसका स्मार्ट तकनीकों से जुड़ा होना। इसमें सीसीटीवी कैमरों और आईओटी सेंसरों का इस्तेमाल किया गया है, जो कार्बन डाइऑक्साइड, फॉस्फीन गैस, आग का खतरा, नमी, तापमान और अनधिकृत प्रवेश जैसी चीजों पर नजर रखेंगे। कुछ गोदामों में तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीकों का भी परीक्षण हो रहा है, जैसे बैग गिनती, वाहनों की नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर), और चेहरा पहचान सिस्टम (एफआरएस)। ये सारी तकनीकें मिलकर गोदामों में खाद्यान्न को सुरक्षित रखने और नुकसान को कम करने में मदद करेंगी। मोबाइल ऐप के जरिए अधिकारी कहीं से भी गोदामों की स्थिति देख सकेंगे और तुरंत फैसले ले सकेंगे।
किसानों और खाद्य सुरक्षा के लिए फायदे
डिपो दर्पण योजना का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये खाद्यान के भंडारण को और सुरक्षित बनाएगी। हमारे किसान भाई दिन-रात मेहनत करके अनाज उगाते हैं, लेकिन अगर गोदामों में अनाज खराब हो जाए, तो सारी मेहनत बेकार चली जाती है। ये पोर्टल नमी, कीट, या आग जैसे खतरों को पहले ही पकड़ लेगा, जिससे अनाज का नुकसान कम होगा। साथ ही, ये सिस्टम गोदामों की कार्यक्षमता बढ़ाएगा, जिससे अनाज का सही समय पर वितरण हो सकेगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिलने वाला अनाज अब ज्यादा सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण होगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही
डिपो दर्पण सिर्फ एक तकनीकी मंच नहीं है, बल्कि ये पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रतीक है। गोदामों की हर जानकारी जियो-टैग के साथ अपलोड होगी, जिसे पर्यवेक्षी अधिकारी पूरी तरह जाँचेंगे। इसके अलावा, रैंडम थर्ड-पार्टी ऑडिट से ये सुनिश्चित होगा कि कोई गड़बड़ी न हो। ऑटोमेटेड रिपोर्ट्स और स्टार रेटिंग सिस्टम गोदाम प्रबंधकों को अपनी कमियों को सुधारने का मौका देगा। इससे न सिर्फ गोदामों की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि खाद्य वितरण की पूरी प्रक्रिया में भरोसा भी बढ़ेगा।
किसान भाइयों के लिए ये समझना जरूरी है कि डिपो दर्पण जैसी योजनाएँ उनकी मेहनत को और मूल्यवान बनाएँगी। अगर आप अनाज को एफसीआई या अन्य गोदामों में भंडारण के लिए देते हैं, तो इस पोर्टल के जरिए आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आपका अनाज सुरक्षित रहेगा। अपने नजदीकी एफसीआई या सीडब्ल्यूसी कार्यालय से संपर्क करें और इस योजना की प्रगति के बारे में जानकारी लें। अगर आप गोदामों से जुड़े किसी काम में हैं, तो इस पोर्टल का इस्तेमाल सीखें, क्योंकि ये भविष्य में अनाज भंडारण का अहम हिस्सा बनने वाला है।
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