Desi Murgi Farm: भारत में मुर्गी पालन (Poultry Farming) एक तेजी से उभरता हुआ कृषि व्यवसाय बन चुका है, जिसकी मांग अंडों और मांस की खपत के चलते साल भर बनी रहती है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ परंपरागत खेती मुख्य आय का स्रोत है, वहाँ किसान भाई यदि खेत के पास या खाली जगह में देसी मुर्गियों का पालन शुरू करें, तो वे अपनी आमदनी को कई गुना तक बढ़ा सकते हैं।
मुर्गी पालन न केवल कम निवेश में शुरू किया जा सकता है, बल्कि यह नियमित आय का स्थिर जरिया भी बनता है। यदि सही योजना, नस्लों का चयन, पोषण प्रबंधन और रोग नियंत्रण की जानकारी हो, तो यह व्यवसाय बेहद लाभकारी सिद्ध होता है। इस लेख में हम बताएंगे कि मुर्गी फार्म कैसे शुरू करें, किन-किन बातों का ध्यान रखें और सफल मुर्गी पालन के लिए किन तकनीकों को अपनाना चाहिए, जिससे आप कम समय में बेहतर मुनाफा कमा सकें।
देसी मुर्गी पालन (Desi Murgi Farm) आप दो तरीके से खोल सकते हैं।
1. कम्पनी के सहयोग से
भारत मे बहुत से मुर्गी फार्म की सहयोगी कम्पनी हैं जो आपको मुर्गी के बच्चों को देती हैं चारा देती हैं फिर 45 दिन बाद जब मुर्गे 2 से 3 किलो के हो जाएंगे तब ओ खुद बाजार में लेकर चले जाएंगे आपको मंडी के भाव से पैसा दे देंगे इससे आपको हर 40 दिन में एक निकासी हो जाएगी और आपके औसतन 1 से 2 लाख रुपए की आमदनी हो जाएगी।
2. निजी तरीके से
यदि आप निजी तरीके से देसी मुर्गी फार्म (Desi Murgi Farm) खोलते हैं तो आपको कुछ मुर्गी के बच्चे, चारा, विक्री खुद करनी होगी आप अपने आसपास के होल सेलर से जुड़ कर अपने मुर्गे को बेंच सकते हैं।
मुर्गे की उत्तम नस्लें
भारत मे मुर्गे की कई नस्ले पाई जाती हैं जिनकी मांग बाजार में अलग अलग होती है। निम्नलिखित मुर्गो की नस्ले हैं।
1. प्लाईमाउथ रॉक
यह अमेरिका में मांस और अंडे के लिए प्रचलित है यह उजले, पिले ,नीले ,भूरे इत्यादि रंगों में पाई जाती है ,इसके मुर्गे का वजन 4.25 किलोग्राम एवम मुर्गी का वजन 3.25 किलोग्राम होता है।
2. रॉड आइलैंड रेड
यह पक्षी भारी शरीर का होता है इसका शरीर लम्बा और आयताकार होता है यह अंडा और मांस दोनों के लिए उपयोगी नस्ल है। इसका मांस बहुत स्वादिष्ट होता है यह साल भर में 150 से 200 अंडे देती हैं इसके मुर्गे का वजन 4 किलोग्राम एवम मुर्गी का वजन 3 किलो होता है।
3. न्यूहैम्पशायर
यह भी रेड आइलैंड के ही तरह विकसित होती हैं ।यह एक कलंगी होती हैं, इस मुर्गे का वजन 4किलो मुर्गी का वजन 3 किलोग्राम होता है।
4. कोर्निश
यह अति उत्तम मांस गुणवत्ता की होती है यह उजले ,लाल उजले रंग की होती है। इसके मुर्गे के वजन 3.5 किलोग्राम एवम मुर्गी का वजन 2.5किलोग्राम होता है।
5. ससेक्स
यह मांस के लिए सर्वोत्तम मानी जानी वाली नस्ल है यह देखने में सुंदर लगती है । सीना विकसित तथा उभरा हुआ होता है इसका रंग लाल ,चितकबरा,हल्का होता है इस नस्ल के मुर्गे का वजन 4 किलोग्राम तथा मुर्गी का 3 किलोग्राम होता है।
6. व्हाइट लेगहोर्न
यह उजले रंग की होती है,5 से 6 माह में अंडे देने योग्य हो जाती है। यह दाना कम चुगती है किंतु अंडे अधिक देती है,यह भारत देश मे बहुत प्रचलित है ,इसके मुर्गे का वजन 2.75किलोग्राम तथा मुर्गी का वजन 1.75किलोग्राम होता है। यह मुर्गी औसतन एक साल में 200 से 300 अंडे देती है।
7. कोचीन
इस प्रकार के मुर्गे वजनदार एवम अधिक पंख वाली होती है ,इसके मुर्गे का वजन 5 किलोग्राम एवम मुर्गी का 4 किलोग्राम होता है।
8. असील
इस प्रकार की मुर्गी खेल एवं मनोरंजन के लिए पाली जाती हैं इसके मुर्गे की लड़ाई देहात में बहुत प्रसिद्ध है यह मुर्गे झगड़ालू किस्म के होते हैं इनका मांस बहुत स्वादिष्ट होता है इस नस्ल की मुर्गी अंडे बहुत कम देती है इसीलिए यह ज्यादा तर मांस के लिए पाली जाती हैं।
मुर्गो के लिए चारा एवं पोषण
- पानी – पानी मुर्गो का प्रमुख आहार है इससे उन्हें भोजन को पचाने में मदद मिलती है अतः पानी का अच्छा प्रबन्धन करें
- कार्बोहाइड्रेट – पीली मक्का ,जौ,ज्वार,राइस पोलिस कनकी आदि
- प्रोटीन – हरा चारा बरसीम ,मूंगफली ,तिल, सोयाबीन की खली, दाल का छिल्का, मछली का चूरा आदि
- खनिज- हड्डी का चूरा,नमक,चुना सिप संगमरमर चुरा
- विटामिन्स- हरा चारा, पिला मक्का, मछली का चूरा आदि
मुर्गियों को होने वाले रोग
झुमरी
चेचक
सफेद दस्त
खूनी दस्त
कृमि
सर्दी
मुर्गियों की देखभाल
नियमित जांच और टीकाकरण इनमें होने वाले रोगों से बचा जा सकता है इनके आवास की साफ सफाई करते रहे। यदि कोई रोग मुर्गो में हो तो उन्हें तुरंत बाकी मुर्गो से अलग करके उनका उपचार करें।
किसान भाई आप अपनी आय में कई गुणा वृद्धि करना चाहते हैं तो मुर्गी फार्म ( murgi farm) खोल कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं ।
यदि आप के पास पूंजी की कमी है तो आप नजदीकी बैंक से कृषि लोन ले सकते हैं फिर अपनी आमदनी से धीरे धीरे लोन भर सकते हैं।सरकार कई योजनाएं चलाई है जिससे कि किसानों की आयके बढ़ोतरी हो।
देसी मुर्गी फार्म खोलने के फायदे: गांव में आत्मनिर्भरता और कमाई दोनों
देसी मुर्गी पालन (Desi Murgi Farm) एक ऐसा ग्रामीण उद्यम है जिसे कम लागत में शुरू करके अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। यह व्यवसाय विशेष रूप से उन किसान भाईयों के लिए वरदान साबित हो सकता है, जिनके पास सीमित संसाधन हैं लेकिन वे अपनी आमदनी बढ़ाने का मजबूत इरादा रखते हैं। देसी मुर्गियां कठोर जलवायु और देसी चारे में भी जीवित रह सकती हैं, जिससे इनके पालन में खर्च अपेक्षाकृत कम होता है।
भारत सरकार ने देसी मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें सब्सिडी, निशुल्क प्रशिक्षण और आसान ऋण सुविधाएं शामिल हैं। अगर किसी किसान के पास शुरुआती पूंजी की कमी है, तो वे नजदीकी बैंक या ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत कृषि ऋण लेकर इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं।
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