Desi Poultry Farming Business: भाइयों, हमारे गाँवों में आजकल एक नई हवा चल रही है। लोग अब पोल्ट्री फार्म की मुर्गियों से मुँह फेरकर खेतों में पाली गई देशी मुर्गियों की ओर बढ़ रहे हैं। इसका कारण साफ है ये मुर्गियाँ प्राकृतिक माहौल में पलती हैं, जिससे इनमें बीमारियाँ कम होती हैं। लोग इन्हें ज़्यादा सुरक्षित और सेहतमंद मानते हैं।
पेड्डापल्ली जिले में ये देशी मुर्गियाँ सस्ते दामों पर मिल रही हैं, जो हर किसी के लिए एक बढ़िया और स्वास्थ्यवर्धक रास्ता बन रही हैं। चिकन खाने वालों में ये नया चलन तेज़ी से फैल रहा है। जो पहले पोल्ट्री फार्म के मुर्गों से बचते थे, वो अब खेतों की इन देसी मुर्गियों को पसंद कर रहे हैं।
बाज़ार में सस्ती और शुद्ध देशी मुर्गियाँ
बाज़ार में पोल्ट्री फार्म की मुर्गियाँ 450 से 480 रुपये प्रति किलो तक बिकती हैं, लेकिन देशी मुर्गियाँ इससे कहीं सस्ती हैं। पेड्डापल्ली जिले के कमानपुर मंडल में ये मुर्गियाँ थोक में बेची जा रही हैं। यहाँ एक मुर्गी की कीमत सिर्फ 350 रुपये है, और अगर स्थानीय पुंजू नस्ल की बात करें, तो वो 400 रुपये में मिलती है।
खास बात ये कि अगर आप ढेर सारी मुर्गियाँ एक साथ लेते हैं, तो दाम और कम होकर 270 रुपये प्रति मुर्गी तक आ जाता है। ये सस्ते दाम लोगों को खींच रहे हैं, और साथ ही सेहत का भरोसा भी दे रहे हैं। खेतों में पली इन मुर्गियों में न केमिकल डाले जाते हैं, न इंजेक्शन, बस शुद्ध देसी स्वाद और ताकत मिलती है।
प्राकृतिक तरीके से पालन का कमाल
देशी मुर्गियों को खेतों में खुला छोड़कर पाला जाता है। इन्हें प्राकृतिक चारा खिलाया जाता है, जिससे इनकी सेहत बढ़िया रहती है। हमारे गाँवों में ये तरीका पुराना है, लेकिन अब इसकी कीमत समझ में आ रही है। पोल्ट्री फार्म में मुर्गियाँ तंग जगहों में पलती हैं और कई बार दवाइयों पर निर्भर रहती हैं, लेकिन देशी मुर्गियाँ आज़ाद माहौल में बड़ी होती हैं।
यही वजह है कि इनमें बीमारियाँ कम होती हैं और माँस भी स्वादिष्ट बनता है। लोग अब इन मुर्गियों को इसलिए चुन रहे हैं, क्योंकि ये सेहत के लिए सुरक्षित हैं और जेब पर भी भारी नहीं पड़तीं। गाँवों में ये धंधा तेज़ी से बढ़ रहा है, और माँग हर दिन नई ऊँचाई छू रही है।
कम खर्च में दोगुना फायदा
देशी मुर्गी पालन का धंधा गाँवों में एक नया रास्ता खोल रहा है। इसमें खर्च कम लगता है और मुनाफा अच्छा मिलता है। अगर आप थोक में बेचें, तो 270 रुपये प्रति मुर्गी का दाम भी फायदा देता है। बाज़ार में इनकी माँग इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि लोग प्राकृतिक तरीके से पली मुर्गियों को ज़्यादा भरोसेमंद मानते हैं। ये मुर्गियाँ न सिर्फ सस्ती हैं, बल्कि इनका स्वाद और सेहतमंदी भी लोगों को लुभा रही है। गाँव के किसान इसे छोटे स्तर पर शुरू करके भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। ये धंधा मेहनत का पूरा फल देता है, और जो पैसा लगता है, उसका दोगुना वापस लौटाता है।
महिलाओं के लिए सुनहरा मौका
देशी मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए कई लोग आगे आ रहे हैं। खासकर महिलाओं के लिए ये एक बढ़िया मौका बन रहा है। कुछ जगहों पर एक महीने तक पाली गई मुर्गियाँ सिर्फ 90 रुपये में दी जा रही हैं, ताकि गाँव की बहनें भी इस धंधे से जुड़ सकें। ये सस्ती दरें और आसान तरीका महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता दिखा रही हैं। अगर आप भी अपने गाँव में ऐसा कुछ शुरू करना चाहते हैं, तो अभी से तैयारी करें। देशी मुर्गियाँ न सिर्फ सेहत का ख्याल रखती हैं, बल्कि कमाई का भी ज़रिया बन सकती हैं। मेहनत आपकी, फायदा आपका बस थोड़ा जुगाड़ लगाएँ।
ये भी पढ़ें- जानिए इस काली प्रजाति की मुर्गी पालन बारे में, कमाई होगी छप्परफाड़