उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जिलों में किसानों ने धान की रोपाई पूरी कर ली है। कई जगहों पर फसल 35 से 40 दिन की हो चुकी है, लेकिन अब बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में मिट्टी सूख रही है और उसमें दरारें पड़ने लगी हैं। बिजली की अनियमित आपूर्ति और भूजल स्तर के नीचे जाने की वजह से ट्यूबवेल और पंपिंग सेट से भी पानी मिलना मुश्किल हो रहा है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक रही, तो धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है। लेकिन कुछ आसान उपायों से किसान अपनी मेहनत को बर्बाद होने से बचा सकते हैं।
सही समय पर करें हल्की सिंचाई
कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश न होने से खेतों में नमी खत्म हो रही है, जिससे धान के पौधों की जड़ें कमजोर हो रही हैं। मिट्टी में पड़ी दरारें धूप की किरणों को जड़ों तक पहुंचने देती हैं, जिससे फसल की ग्रोथ रुक रही है। ऐसे में जिन किसानों के पास ट्यूबवेल या पंपिंग सेट हैं, उन्हें शाम के समय हल्की सिंचाई करनी चाहिए। हल्का पानी देने से मिट्टी धीरे-धीरे नमी सोख लेती है और सुबह तक पौधों को फायदा पहुंचता है। अगर लंबे समय बाद अचानक ज्यादा पानी भर दिया जाए, तो खेत का तापमान बढ़ सकता है, जो पौधों की जड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
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खरपतवार हटाएं
जिन इलाकों में सिंचाई के साधन सीमित हैं, वहां किसान खरपतवार नियंत्रण करके भी फसल को बचा सकते हैं। खरपतवार मिट्टी की नमी को सोख लेते हैं, जिससे पौधों को पानी कम मिलता है। अगर खेत में खरपतवार दिख रहे हैं, तो उन्हें तुरंत काटकर बाहर निकाल देना चाहिए। इससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है। बाराबंकी के किसान रामलाल यादव बताते हैं कि खरपतवार हटाने के बाद एक बार हल्की सिंचाई करने से कई दिनों तक खेत में नमी रहती है, जिससे फसल को सूखने से बचाया जा सकता है।
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जैविक खाद से मिट्टी को करें मजबूत
खेत में नमी बनाए रखने का एक और आसान तरीका है जैविक खाद का इस्तेमाल। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, वर्मी कम्पोस्ट या अन्य जैविक खाद मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाती है और उसकी पानी रोकने की क्षमता को बढ़ाती है। अगर धान की खड़ी फसल में वर्मी कम्पोस्ट डाला जाए, तो एक बार सिंचाई करने के बाद कई दिनों तक खेत में नमी बनी रहती है। इससे न सिर्फ फसल को सूखने से बचाया जा सकता है, बल्कि पौधों की ग्रोथ भी बेहतर होती है। यह तरीका छोटे किसानों के लिए भी किफायती और कारगर है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी फसल की नियमित निगरानी करें और मौसम की जानकारी रखें। अगर बारिश की संभावना कम है, तो छोटे-छोटे उपायों जैसे हल्की सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और जैविक खाद के इस्तेमाल से फसल को बचाया जा सकता है। इसके अलावा, नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या जिला कृषि कार्यालय से संपर्क करके और सलाह ले सकते हैं। ये उपाय न सिर्फ धान की फसल को सूखे से बचा सकते हैं, बल्कि किसानों की मेहनत को भी बर्बाद होने से रोक सकते हैं।
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