Dhan me Kanduva Rog se Bachav ke Upay: प्री-मानसून की बारिश के बाद धान की बुवाई का समय शुरू हो गया है। इस मौसम में धान की फसल को रोगों से बचाना बहुत जरूरी है, वरना मेहनत पर पानी फिर सकता है। कंडुवा रोग धान की फसल का एक बड़ा दुश्मन है, जो बालियों में लगकर पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है। लेकिन अगर सही समय पर सही कदम उठाए जाएँ, तो इस रोग से बचा जा सकता है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और कुछ आसान देसी नुस्खों से धान की फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। आइए, जानें कंडुवा रोग क्या है और इसे कैसे रोकें।
कंडुवा रोग का खतरा
कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर के वैज्ञानिक डॉ. सी. के. त्रिपाठी बताते हैं कि कंडुवा रोग धान की बालियों को निशाना बनाता है। इस रोग में दानों पर छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं, और बालियों पर पीला पाउडर दिखता है, जो बाद में काला हो जाता है। ये रोग तेजी से पूरी फसल में फैलता है, जिससे पैदावार कम हो जाती है। कई बार तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन अगर बुवाई से पहले और बाद में कुछ सावधानियाँ बरती जाएँ, तो इस रोग को रोका जा सकता है।
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मिट्टी की जाँच और खेत की तैयारी
कंडुवा रोग से बचने का पहला कदम है खेत की मिट्टी की जाँच। अगर मिट्टी में नमी ज्यादा है या रोग के लक्षण पहले दिखे हैं, तो उसे ठीक करना जरूरी है। बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर लें। जुताई से मिट्टी में हवा पहुँचती है, और रोग फैलाने वाले कीटाणु कम होते हैं। साथ ही, सड़ी हुई गोबर की खाद डालें। ये खाद मिट्टी को ताकत देती है और कंडुवा रोग को रोकने में मदद करती है। खेत को समतल करें, ताकि बारिश का पानी कहीं जमा न हो।
बीज का इलाज जरूरी
बुवाई से पहले धान के बीज का इलाज करना कंडुवा रोग से बचाव का सबसे आसान तरीका है। डॉ. त्रिपाठी की सलाह है कि बीज को बोने से पहले पानी में भिगोएँ और उसमें दवा मिलाएँ। हर किलो बीज के लिए 2 से 2.5 ग्राम कार्बेंडाजिम मिलाना चाहिए। इस दवा को पानी में अच्छे से घोल लें और बीज को उसमें भिगोकर रखें। ये इलाज बीज को रोगों से बचाता है और फसल को मजबूत बनाता है। अगर कार्बेंडाजिम उपलब्ध न हो, तो नजदीकी कृषि केंद्र से दूसरी मुफीद दवा की सलाह ले सकते हैं।
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धान की बुवाई जुलाई में बारिश शुरू होने पर करें। इस दौरान खेत में नमी का ध्यान रखें, लेकिन पानी ज्यादा जमा न होने दें। सही समय पर बीज बोने और इलाज करने से फसल की शुरुआत मजबूत होती है। कंडुवा रोग ज्यादातर फसल के अंतिम चरण में, यानी बालियाँ बनने पर लगता है। लेकिन अगर बीज और मिट्टी की तैयारी सही हो, तो रोग का खतरा बहुत कम हो जाता है। उन्नत किस्मों का चयन करें, जो रोगों से लड़ने में बेहतर हों।
रोग दिखे तो तुरंत कदम उठाएँ
अगर फसल में कंडुवा रोग के लक्षण दिखें, जैसे बालियों पर पीला पाउडर या गांठें, तो तुरंत कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लें। प्रभावित बालियों को खेत से हटा दें, ताकि रोग और न फैले। खेत में साफ-सफाई रखें और पुराने फसल अवशेषों को जला दें। अगली फसल के लिए मिट्टी की जाँच और बीज का इलाज जरूर करें। ये छोटे-छोटे कदम फसल को बर्बादी से बचा सकते हैं।
कंडुवा रोग से बचने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है। नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि अधिकारी से संपर्क करें। मिट्टी की जाँच और बीज के इलाज के लिए वहाँ से मुफ्त सलाह मिल सकती है। सही समय पर गोबर की खाद और दवाओं का इस्तेमाल करें। अगर फसल में रोग के लक्षण दिखें, तो देर न करें। इन आसान देसी नुस्खों से धान की फसल को कंडुवा रोग से बचाया जा सकता है, और पैदावार बढ़ाई जा सकती है।
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